Video: फटे जूतों ने रोकी मैराथन धावक दो बहनों की रफ्तार, सपनों के पंख पर ये कैसी बेबसी

रुआबांधा बस्ती के छोटे से घर में रहने वाली इन साहू बहनों में रुकमणि बड़ी है। पिछले चाल सालों में वह 23 से ज्यादा प्रतियोगिताओं में शामिल होकर कई पदक जीत चुकी है।

By: Dakshi Sahu

Published: 03 Mar 2019, 04:32 PM IST

भिलाई. सिलाई के निकलते टांके को देखकर रुकमणि और प्रिंयका जब भी नए जूते खरीदने का सोचती तो किसी तरह घर चलाते कॉरपेंटर पिता याद आ जाते हैं, जिन पर पांच बेटियों की जिम्मेदारी है। फिर भी अपने सपनों को पंख देने की कोशिश में दोनों बहनें ऐसे ही दौडऩे लगती हैं और यह सोचकर घंटों पसीना बहाती हैं कि उनके भी अच्छे दिन आएंगे।

पदक जीत चुकी है दोनों बहने
रुआबांधा बस्ती के छोटे से घर में रहने वाली इन साहू बहनों में रुकमणि बड़ी है। पिछले चाल सालों में वह 23 से ज्यादा प्रतियोगिताओं में शामिल होकर कई पदक जीत चुकी है। हाल ही में राज्य स्तरीय मैराथन में 21 किलोमीटर की दौड़ में वह दूसरे स्थान पर रही और उसकी बहन प्रियंका 10 वीं पोजिशन पर थी।

इन बहनों का कहना है कि अच्छा एथलीट बनने मेहनत के साथ-साथ अच्छी डाइट की भी जरूरत होती, लेकिन वे केवल दाल-चावल खा पाती है, क्योंकि उनके पास पौष्टिक आहार के लिए पैसे नहीं होते।

अब डे-बोर्डिग स्किम से भी बाहर
रुकमणि पहले बीएसपी की डे-बोर्डिग स्किम में शामिल थी। जिसमें तीन साल तक उसे सुबह पौष्टिक आहार के साथ खेलने के लिए जूते और किट मिलता था, लेकिन निर्धारित उम्र के बाद वह स्किम से बाहर हो गई।

अब तो हालात यह है कि केला, अंडा और दूध खाने के बारे में वह सोच भी नहीं सकती। वह बताती है कि अपने घर से सेक्टर 4 सेल एथलेटिक्स एकेडमी में वह सुबह-शाम प्रेक्टिस करती है और इस दौरान आने-जाने में २४ किमी साइकिल चलानी पड़ती है।

इसलिए हो गई चोटिल
कोच अनिरुद्ध बताते हैं कि रुकमणि मिडिल डिस्टेंस के इंवेट में हिस्सा लेती है। जिसमें 5 किलोमीटर से लेकर 21 किलोमीटर की दौड़ शामिल है। ऐसे इवेंट के लिए जूते भी टेक्नीकल आते हैं जो 3 से 5 हजार रुपए तक मिलते हैं।

जीते कई पदक
रुकमणि ने पदक जीतने का सफर स्कूल गेम से किया। रुकमणि और प्रियंका दोनों ही गल्र्स कॉलेज में फस्र्ट इयर की छात्रा हैं। कोच का कहना है कि अगर उन्हें डाइट और किट के लिए कोई मदद करें तो वे अपनी परफॉर्मेस और बेहतर कर सकती हैं। जब तक वे अच्छी डाइट नहीं लेंगी, उनका स्टेमिना नहीं बढ़ पाएगा।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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