भिलाई@ नीली, भूरी, हरी के साथ बिल्ली जैसी आंखें.. सभी को पसंद आती है,लेकिन ज्यादातर लोगों की आंखों की पुतली का रंग काला या गहरा भूरा ही होता है। आंखों में मेलानिन की मात्रा के हिसाब से आंखों के रंग बनते हैं। यानी आंखों के रंगों के लिए हमारे शरीर में मौजूद 16 जीन जिम्मेदार है। जिसमें से खासकर क्रोस में उपस्थित ओसीपी -2 और एचआरसी-2 की वजह से रंग तय होता है। जन्म से मिली आंखें और पुतलियों का रंग हमेशा के लिए तो नहीं बदला जा सकता, लेकिन इन दिनों नई टेक्नीक से बने कलर्ड कांटेक्ट लेंस ने इसे संभव कर दिखाया है। खासकर यूथ अब ड्रेस के हिसाब से अपनी आंखों का रंग बदल रहे हैं। ट्विनसिटी के ऑप्टिकल्स शॉप में कलर्ड लेंस आसानी से उपलब्ध है और यूथ की पसंद भी बने हुए हैं। नेत्र रोग चिकित्सकों की मानें तो मार्केट में आने वाले यह लेंस का उपयोग यदि सावधानी से किया जाए तो यह आंखों के लिए सुरक्षित भी है।

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