Breaking news मोबाइल की लाइट में पंचनामा, शास्त्री अस्पताल की मच्र्यूरी में बिजली गुल होने से हो रही दिक्कत

शव के डिकंपोज होने का रहता है खतरा, पीएम करने में भी होती है परेशानी.

By: Abdul Salam

Updated: 12 Jul 2021, 08:58 AM IST

भिलाई. लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, सुपेला के मच्र्यूरी में बिजली बंद हो जाने से खासी परेशानी होती है। अक्सर पुलिस के अधिकारी बिजली बंद होने पर पंचनामा करने मोबाइल की लाइट का सहारा लेते हैं। जिससे शव के तमाम निशान वगैरह देखने में पंचों को भी दिक्कत होती है। अस्पताल में जनरेटर है लेकिन उसका कनेक्शन अब तक फ्रीजर और पोस्ट मार्टम सेंटर से किए नहीं है। इससे शिनाख्ती के लिए रखे शवों के डिकंपोज होने का खतरा बना रहता है। पीएम सेंटर से हर साल राजस्व सुपेला के सिविल अस्पताल के खजाने में भेजा जाता है, बावजूद इसके यहां की परेशानियों को दूर करने कोई पहल नहीं हो रही है।

अज्ञात शव को रखना होता है तीन-तीन दिनों तक फ्रीजर में
शहर में मिलने वाले अज्ञात शव को तीन-तीन दिनों तक फ्रीजर में रखना पड़ता है। इस दौरान अगर बिजली गुल होती है तब शव के डिकंपोज होने का खतरा बना रहता है। हाल ही में फ्रीजर में जगह नहीं थी, तब अतिरिक्त रखे फ्रीजर में शव रखा गया था, वह फूल कर डिकंपोज होने की स्थिति में आ गया था। परिजनों ने चीरघर में इसको लेकर नाराजगी भी जाहिर की थी।

शव को बाहर रख किया जाता है पंचनामा
शव का पोस्टमार्टम करने से पहले अस्पताल की मच्र्यूरी में रखे फ्रिजर से शव को निकालकर पहले पंचनामा किया जाता है। इस दौरान बिजली गुल हो जाने पर शास्त्री अस्पताल के मच्र्यूरी में कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इस वजह से पुलिस अधिकारी मजबूरी में मोबाइल की लाइट के सहारे लिखना शुरू करते हैं। उस लाइट से ही शव को पंच देखकर पंचनामा में सहयोग करते हैं। यहां की व्यवस्था में सुधार लंबे समय से नहीं की गई है।

जनरेटर का वायर पहुंचा पर नहीं किए कनेक्शन
शास्त्री अस्पताल में जनरेटर लगा हुआ है। इसका एक वायर पीएम सेंटर तक लाकर छोड़ दिए हैं। इसे फ्रीजर और पीएम कक्ष से जोडऩे की जरूरत है। जनरेटर की क्षमता कम है तब पीएम सेंटर के लिए अलग से जनरेटर लगाना होगा। जहरखुरानी के शव का पोस्ट मार्टम करते वक्त अधिक दिक्कत होती है, उस शव के पेट से निकलने वाले गैस से नशा आने लगता है। उसका एग्जॉस्ट फैन के सहारे बाहर निकलना जरूरी है। बिजली गुल रहने से यह नहीं हो पाता है।

पीएम सेंटर का टूटा है दरवाजा
इसी तरह से पीएम सेंटर का दरवाजा टूट गया है। जिसकी वजह से लोग कई बार पीएम होने के दौरान भीतर तक पहुंच जाते हैं। राजधानी रायपुर के पीएम सेंटर की तर्ज पर यहां प्रकाश व्यवस्था नहीं है। फ्रीजर में रखे जाने वाले शव के बदले जो शुल्क मिलता है, वह भी अस्पताल के राजस्व में जमा किया जाता है। अब तक करीब दो लाख रुपए इस पीएम सेंटर से अस्पताल के खाते में जमा हो चुका है। इसके बाद भी सेंटर में न तो फ्रीजर को बढ़ाया गया है और मरम्मत का काम पूरा किए हैं।

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