पत्रिका पैरेंटिंग : रात को पढऩे वाले विद्यार्थी ध्यान दें-साढ़े सात बजे के बाद दिमाग रखता है सिर्फ 20 फीसदी याद

बोर्ड एग्जाम का टाइम-टेबल जारी हो चुका है। स्टूडेंट्स की तैयारियां भी जोरों पर है। स्टूडेंट्स अक्सर कहते हैं कि पूरी तैयारी करने के बाद भी एग्जाम हॉल में पहुंचते ही सबकुछ भूल जाते हैं। एक्सपट्र्स ने इस समस्या का हल खोज लिया है।

By: Satya Narayan Shukla

Published: 30 Dec 2018, 08:09 PM IST

भिलाई@Patrika. बोर्ड एग्जाम का टाइम-टेबल जारी हो चुका है। स्टूडेंट्स की तैयारियां भी जोरों पर है। स्टूडेंट्स अक्सर कहते हैं कि पूरी तैयारी करने के बाद भी एग्जाम हॉल में पहुंचते ही सबकुछ भूल जाते हैं। एक्सपट्र्स ने इस समस्या का हल खोज लिया है। बड़ी ही आसान सी ट्रिक है। परीक्षा में अभी ४५ दिनों का समय शेष है। तो चलिए इतने दिन तक हर रोज एग्जाम में शामिल होते हैं। आपको सिर्फ ४५ दिन तक अपने घर को ही एग्जाम हॉल बनाना है। अब आप पूछेंगे कैसे? घर का कोई भी एक कमरा लीजिए। इसमें अपनी स्टडी टेबल को वैसे ही सेट करें, जैसे एग्जाम हॉल में होता है। इन तीन घंटों में घर का कोई सदस्य आपको डिस्टर्ब न करें, न ही दूसरा काम हो। यूनिफॉम पहन लीजिए और तैयार होकर कमरे में दाखिल हों इसके बाद घड़ी में देखकर सैंपल पेपर या बोर्ड के पुराने पेपर हल कीजिए। याद रहे तीन घंटे के पहले टेबल से ना उठे। इस दौरान पूरा फोकस पेपर हल करने में हो। यकीन मानिए ऐसा करने से आपमें एग्जाम का जो बैठ गया है, देखते ही देखते छूमंतर हो जाएगा। ४५ दिनों में लिखने की स्पीड जबरस्त तो होगी ही साथ में कॉन्फीडेंस लेवल भी बढ़ेगा। पढ़ा और भूल जाने की शिकायत दोबारा नहीं होगी, एग्जाम के दिन पेपर में मजा आ जाएगा।

इसलिए एक्सपर्ट ने बताई यह तरकीब
शनिवार को पत्रिका और सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज ने दुर्ग के श्री महावीर जैन हायर सेकंडरी स्कूल में पैरेंटिंग टुडे वर्कशॉप कराई। यहां एक स्टूडेंट ने सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने सवाल पूछा कि उनकी तैयार तो पूरी रहती है, लेकिन एग्जाम हॉल में पहुंचते ही वह सबकुछ भूलकर घबरा जाता है। इसके जवाब में ही एक्सपर्ट चिरंजीव ने ३ घंटे के लिए घर को एग्जाम हॉल बनाने की तरकीब सुझाई। वर्कशॉप में बैठे सैकड़ों ने इसे अपने रिजल्ट को बेहतर बनाने बूस्टर बताया। एक्सपर्ट ने बताया कि हमारा दिमाग रिवीजन को कभी नहीं भूलता। आप नर्वस होकर खुद ही घबरा जाते हैं, जिससे यह स्थिति बनती है और आपको पेपर खराब गुजरता है।

परीक्षा में पढ़ा हुआ क्यों भूल जाते हैं आप?
एक्सपर्ट डॉ. दत्ता ने इसका साइंटिफिक कारण बताया है। उनके मुताबिक हमारे मिड ब्रेन में एक पार्ट होता है, जिसे हिपोकैंपस कहते हैं। हमारी सभी शॉर्टटर्म मेमोरी इसी में फीड होती है। एग्जाम के दौरान स्ट्रेस लेने से एक तरह का हार्मोन निकलता है, जिसे सीएसएच कहते हैं। यही वो हार्मोन है जो हिपोकैंपस को खराब करता है, और आप पढ़ा हुआ सबकुछ भूलने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि एग्जाम के दौरान बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लें।
क्या है इसका उपाए - सबसे पहले तो स्ट्रेस को बाहर कर दीजिए। बहुत सिंपल है। हमारी बॉडी में ऑक्सीजन की मात्रा प्रॉपर रहने से हम निश्चिंत रहते हैं। इसलिए अभी एक्सरसाइज जरूर कीजिए। योग के जरिए लंबी व गहरी सांसों की प्रैक्ट्सि कीजिए। खाने में ओमेगा-३ फेटी एसिड को शामिल करें। तला और खाना फिलहाल बंद कर दें। हां प्रॉपर नींद जरूर लें।

टॉपर्स कैसे अचीव करते हैं हाई परसेंटेज
यह सवाल हर स्टूडेंट के मन में होता है। एक्सपर्ट का कहना है कि पढ़ाई दो तरीके से की जाती है। पहला होता है क्रेमिंग। इसका मतलब है एक साथ सभी चीजों को पढऩे की कोशिश करना। यानि पढ़ाई का मिस मैनेजमेंट। इसी तरह दूसरा एक तरीका है जिसे स्पेसिंग कहते हैं। टॉपर्स हमेशा स्पेसिंग तरीके से ही अव्वल आते हैं। टॉपर्स के पास हर एक सब्जेक्ट के लिए टाइम-टेबल सेट है। पढऩे के घंटे से लेकर इंटरवल व खेलकूद सबकुछ प्लान होता है। अच्छे रिजल्ट के लिए आप भी पढ़ाई को स्लॉट में डिवाइड करके पढ़े।

 

 

Bhilai patrika

इतने बजे सबसे तेज होता है दिमाग
एक्सपर्ट के मुताबिक हमारे दिमाग की केपेसिटी सौ फीसदी होती है, लेकिन इसमें भी स्लॉट तय है। दिमाग अपने टाइम के हिसाब से ही परफॉम करता है। सुबह ४ से ६.३० बजे की पढ़ाई सबसे बेस्ट होती है। इस समय पढ़ा हुआ दिमाग सौ फीसदी बेहतर तरीके से सेव करता है। इसके बाद शाम को दिमाग की केपेसिटी ५० फीसदी हो जाती है। इसलिए शाम में ७.३० बजे तक ही पढ़ाई करें, इसके बाद ८ बजे तक सोने की तैयारी कर लें। रात को पढ़ाई करते वक्त दिमाग की केपेसिटी सिर्फ २० फीसदी हो जाती है, इसलिए रात को देर तक पढऩा सही आइडिया नहीं है।

बच्चों को कहिए.. फिक्स कर लें स्ट्रेस
पैरेंटिंग वर्कशॉप में कॅरियर काउंसलर डॉ. किशोर दत्ता बतौर एक्सपर्ट मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि साइंस भी इस नतीजे पर पहुंचा है कि हमारे दिमाग को भी ४५ मिनट के बाद थोड़ा रिलीफ चाहिए। अक्सर बच्चे लगातार ६-७ घंटे पढ़ते हैं। सच तो यह है कि ४५ मिनट के बाद थका हुआ दिमाग कोई भी नई इंफर्मेशन बेहतर तरीके से गेन नहीं करता। पांच मिनट ही सही पर उसे भी थोड़ा रिलीफ चाहिए। इसलिए पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में ब्रेक जरूर लेना चाहिए। पैरेंट्स भी इसके लिए बच्चों को न रोकें। ब्रेक के दौरान, म्यूजिक, टीवी देख भी रहे हैं तो कोई हर्ज नहीं। यह उनके दिमाग को चार्ज ही करेगा। पांच-दस मिनट के बाद दिमाग दोबारा उसी फुर्ती से काम करेगा। दूसरी ओर बच्चे भी अपनी स्ट्रेस लिमिट फिक्स कर लें। खुद तय करें तो पढ़ते वक्त वे कितने देर में थकेंगे। उस हिसाब से अपना ब्रेक टाइम बनाएं।

सवाल - एग्जाम हॉल में पहुंचने के बाद स्टे्रस फील होता है, इससे हमारा पेपर बिगड़ेगा, क्या करें?
जवाब - स्ट्रेस के तीन साइन होते हैं। पहला फाइट, इसमें हमारा शरीर सामने आई चुनौती को स्वीकार कर लडऩे के लिए तैयार होता है। दूसरा है फ्लाइट। यानि पलायान, बिना लड़े ही हथियार डाल देना। चुनौती से लड़ नहीं पाएंगे इसलिए दूर भागना ही बेहतर है। और आखिर मेें आता है, फ्रीज। यह स्ट्रेस का सबसे डेंजर प्वाइंट है। इसमें उस चुनौती से न लड़ सकते हैं और न ही भाग। हमारा ब्रेन साथ नहीं देता, बॉडी को शॉर्ट डाउन कर देता है। दिमाग में नकारात्मक ख्याल आते है, यही स्ट्रेस है। अगर हम अपने अंगूठे के तीनों कोनों को कुछ देर तक दवाएं तो इससे स्ट्रेस कम होता है। ऐसे ही १० से ११ बार डीप ब्रिथिंग करने से शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है।

सवाल - बेटा सुबह जल्दी उठकर नहीं, बल्कि देर रात तक जागकर पढ़ता है, इससे क्या नुकसान है?
जवाब - ऐसा करना और करने देना सरासर गलत है। इससे बच्चों की हेल्थ साइकिल पूरी तरह बिगड़ जाएगी। बीमारियां उन्हें घेरेंगी। बेहतर होगा कि बच्चे जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करें। सुबह हमारा दिमाग एक्टिव होता है, याददाश्त सही रहती है।

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सवाल - मैं जिस तरह पेपर हल कर रही हूं उससे मेरे माक्र्स अच्छे नहीं आ रहे, इसे कैसे सुधारूं?
जवाब - आप अपनी प्रैक्ट्सि जारी रखिए। अपनी कॉपी टीचर को दिखाकर पूछिए कि कमी कहां आ रही है। टीचर आपको गाइड करेंगे। जहां डाउट लग रहा हो उसे बेझिझक पूछिए।

सवाल - मैं बाहर से आकर पढ़ रहा हूं। कक्षा १०वीं में ९१ फीसदी माक्र्स थे, लेकिन ११ वीं में कम हो गए। इस साल बोर्ड के लिए डर लग रहा है, क्या करूं?
जवाब - आप बाहर से आकर यहां अकेले रहकर पढ़ रहे हैं, यह काबिले तारीफ है। बोर्ड में भी अच्छे नंबर आएंगे, पहले आप एक टाइम-टेबल सेट कर लीजिए। सोने से लेकर पढ़ाई तक सबकुछ सेट होना चाहिए। लक्ष्य बनाइए कि आप इस साल ९९ फीसदी हासिल करेंगे, उसकी तैयारियों में जुट जाइए। सफलता मिलना तय है।

सवाल - मुझे सोशल साइंस पसंद नहीं, दूसरे विषयों में मैं बेहतर हूं, लेकिन सोशल याद नहीं रहता?
जवाब - इसमें ऑडियो-विजुअल का सहारा लिया जाएगा तो बेहतर होगा। यू-ट्यूब पर इतिहास और सिविक जैसे तथ्यों को आसानी से समझाने के लिए कई कंटेंट मौजूद है। पढ़ा और बेहतर समझने के लिए इसका सहारा लिया जा सकता है। इससे वह चीजें दिमाग में फीड हो जाएंगी।

पैरेंट्स और बच्चे बनाएं तालमेल
कार्यक्रम में पत्रिका भिलाई के स्थानीय संपादक नितिन त्रिपाठी बतौर एक्सपर्ट शामिल हुए। उन्हें पैरेंट्स के सवालों का जवाब दिया। स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के लिए कहा कि दोनों का तालमेल अच्छे रिजल्ट लाएगा। एग्जाम की नजदीकी की वजह से हर पैरेंट अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए इनकरेज कर रहे हैं। अक्सर बच्चों को यही लगता है कि पैरेंट्स उनपर दबाव डाल रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि बच्चों के लिए माता-पिता से बढ़कर दूसरा कोई हितैषी नहीं है। पैरेंट्स भी अपने बच्चों को समझें, उन पर अपनी उम्मीदें नहीं थोपें। परीक्षा तक बच्चों के दोस्त की तरह पेश आएं। प्रीपरेशन में उनकी मदद करें। इस दौरान स्कूल की प्राचार्य सोनाली पात्रा भी मौजूद रहीं। उन्होंने बच्चों को एग्जाम में बेहतर नतीजे लाकर सबका मान बढ़ाने का हौसला दिया।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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