भिलाई. फुगड़ी, तीरीपासा, बिल्लस, मटका दौड़, गोटा, सहित कई पारंपरिक खेलों को खेल जहां महिलाओं ने अपना बचपन याद किया। वही मायके जैसा माहौल भी उन्हें मिला। टंकी मरोदा स्थित मां कल्याणी शीतला मंदिर में दिनभर बहन-बेटियों के परिसर गुलजार रहा। हरितालिका तीज पर बालू की शिवलिंग के साथ माता पार्वती की पूजा कर दिनभर तिजहारिनों ने महादेव को प्रसन्न कर किया। निर्जला व्रत रख सुहागिनों ने पांच पहर की पूजा की और व्रत की कथा भी सुनी। शाम को घरों में महिलाओं ने मिलकर पूजा-अर्चना कर भजन-कीर्तन में अपना समय बिताया। इस दौरान माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर फूलेरा बांधा और पति की लंबी उम्र की कामना की। शहर के कई मंदिरों और सामाजिक भवन में भी दोपहर से पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। कुछ मदिरों में निर्जला व्रत रहकर दिनभर महिलाओं ने पारंपरिक खेलों के बीच अपना समय बिताया और शाम को पूजन कर कथा सुनी। सारी रात जागरण के बाद सुहागिनों ने सुबह स्नान के बाद पूजा कर अपना व्रत छोड़ा और जल ग्रहण किया।

 

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