CISF के अधिकारी ने हड़ताली BSP कर्मियों से कही ऐसी बात, सुनकर आगबबूला हो गए कर्मी, कहा ये छत्तीसगढ़ है...

Strike in Bhilai Steel Plant: पुलिस ने बीएसपी कर्मचारियों पर जमकर लाठियां भांजी। इसमें दो यूनियन नेता सहित दो दर्जन से भी अधिक कर्मचारियों को चोट लगी है।

By: Dakshi Sahu

Updated: 03 Jul 2021, 06:45 PM IST

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में हड़ताल (Strike in Bhilai steel Plant) के दौरान बुधवार की रात 11 बजे पुलिस ने बीएसपी कर्मचारियों (BSP Worker) पर जमकर लाठियां भांजी। इसमें दो यूनियन नेता सहित दो दर्जन से भी अधिक कर्मचारियों को चोट लगी है। ज्यादा चोट लगने पर चार कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा, हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत छुट्टी दे दी गई। वहीं पहली बार केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों का भी उग्र चेहरा सामने आया। जवान आंदोलन पर बैठे कर्मचारियों को धकियाते और घसीटते रहे। दुव्र्यवहार पर भी उतर आए थे। इसके कारण कर्मियों और बल के अधिकारियों के बीच काफी झड़प भी हुई। पुलिस और बल के जवानों से नोंक झोंक के साथ आंदोलन दिनभर शांतिपूर्ण रहा। यूनियन नेता और आंदोलनरत कर्मी ड्यूटी आने वाले कर्मियों से अनुनय- विनय व उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे। स्थिति रात 10 बजे उस समय तनावपूर्ण हुई जब बीएसपी प्रबंधन लगभग सौ-डेढ़ सौ कर्मियों को पहले भिलाई निवास बुलवा लिया और फिर वहां से पुलिस की मौजूदगी में बस में बैठाकर संयंत्र ले जाने लगा। इस दौरान संयंत्र के मेन गेट जाने के रास्ते पर मुर्गा चौक के सामने एचएमएस के नेता व कार्यकर्ता डटे हुए थे।

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कर्मियों को बस में प्लांट ले जाने का विरोध करने से बिगड़ा माहौल
रात करीब 10.30 बजे सुनियोजित योजना के तहत आंदोलनकारियों के बीच में से दो बस धड़धड़ाते हुई घुसी। कर्मी दुर्घटना के खतरे को देखते हुए किनारे हो गए और बस संयंत्र की ओर निकल गई। बाद में देखा तो उसके साथी कर्मचारी बैठे हुए थे। इसके बाद जैसे ही तीसरी बस आई, कर्मचारी बीच सड़क पर खड़े हो गए। वे यूनियन के झंडे वाले डंडे से बस का नॉक कर अपने साथी कर्मियों से बाहर निकलने की अपील कर रहे थे। इतने में बस की एक खिड़की का कांच टूट गया।

वरिष्ठ नेता मिश्रा पर बरसाए डंडे, कर्मी का हाथ हुआ लहूलुहान
इसके बाद पुलिस आक्रोशित हो गई। जवान लाठियां भांजने लगे। इस दौरान सामने खड़े एचएसएम के अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता 72 वर्षीय एचएस मिश्रा और महासचिव प्रमोद मिश्रा पर डंडे बरसाए। दोनों नेताओं की पीठ, कुल्हे, कमर और हाथ पर कई वार किए। कर्मियों ने डंडे की मार से बचने की कोशिश की। इसमें एक कर्मचारी का हाथ लहूलुहान हो गया। एक की उंगली फ्रैक्चर हो गई। दो अन्य कर्मियों को भी गंभीर चोट लगी। रात 12 बजे आंदोलन खत्म होने के ऐलान के साथ ही कर्मी अपने घर को गए।

कर्मियों को घसीटते व धकियाते रहे सीआईएसएफ जवान
यूनियन नेता व युवा कर्मचारी टीपीएल वर्कशॉप के रास्ते पर बैठे थे। वे ड्यूटी जाने वाले कर्मियों को रोक रहे थे। इस दौरान यहां मौजूद सीआईएसएफ के जवानों ने कर्मचारियों के साथ काफी देर तक दुव्र्यवहार किया। सीआईएसएफ के एक अधिकारी एसके वाजपेयी तमतमाते हुए आए। इसके बाद कुछ जवान सड़क पर बैठे कर्मियों को धकियाते व घसीटते हुए ले गए। सीआईएसएफ की महिला जवान प्रीति और अलका मार्को सीटू की अध्यक्ष सविता मालवीय को बार-बार घेर और पकड़कर किनारे कर दे रही थीं। अधिकारी कुमार अनीश और विपिन शर्मा और कर्मियों के बीच काफी हुज्जत हुई। एक सीआईएसएफ अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि मैं बिहारी हंू। यह नहीं चलेगा। इससे कर्मी और आक्रोशित व उद्वेलित हो गए। हड़ताली यही बात दोहराते रहे ये छत्तीसगढ़ है।

शिक्षक भी रहे हड़ताल पर
इस बार बीएसपी के शिक्षकों ने भी हड़ताल में अपनी भागीारी निभाई है। वेतन समझौता आदि मांगों को लेकर शिक्षक न केवल हड़ताल में शामिल हुए, बल्कि जत्था बनाकर संयंत्र के हर गेट पर पहुंचकर वहां के हड़ताली साथियों के साथ एकजुटता व्यक्त की। बीएसपी अस्पतालों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए। आवश्यक सेवा के तहत ड्यूटी करने के बाद वे संयंत्र के विभिन्न् गेटों पर हड़ताल में शामिल कर्मियों के साथ एकजुटता दिखाई। हड़ताल से दो दिन पहले इंटक यूनियन ने खुद को अलग करने संबंधी पत्र प्रबंधन को सौंप दिया था। बावजूद इंटक के कई जमीनी नेता और कार्यकर्ता हड़ताल में शामिल हुए। भूषण एक्का, टीआई भ_ी थाना ने इस मामले में कहा कि पुलिस ने कोई लाठी नहीं भांजी है। सिर्फ बीच बचाव किया है।

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