कौमी एकता, पहली बार दिन में भगवान की भक्ति, रात में खुदा की इबादत, माह-ए-रमजान

बुधवार से शुरू होने वाले हिन्दुओं के पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) और गुरुवार से माह-ए-रमजान की शुरुआत होगी।

By: Dakshi Sahu

Published: 16 May 2018, 12:43 PM IST

भिलाई. एक ओर मस्जिद में अजान की आवाज होगी तो दूसरी ओर मंदिरों में सुबह-सुबह घंटियों की धुन सुनाई देगी। मई से जून के बीच का यह समय ट्विनसिटी में कौमी एकता की मिसाल बनेगा। बुधवार से शुरू होने वाले हिन्दुओं के पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) और गुरुवार से माह-ए-रमजान की शुरुआत होगी।

दोनों ही कौम अपने-अपने ढंगे से इबादत करेंगे। अधिक मास में हिन्दू भगवान विष्णु सहित अन्य आराध्य देव की पूजा-अर्चना कर पूरा महीना पूजा-पाठ में बिताएंगे। वही रमजान शुरू होते ही मुस्लिम अल्लाह की इबादत में जुट जाएंगे। पुरुषोत्तम मास और रमजान को लेकर शहर में तैयारी पूरी हो चुकी है। मस्जिद के सामने सेवईयों की दुकानें सज चुकी है तो कई मंदिरों में भागवत कथा की तैयारी की जा चुकी है।

मांगलिक कार्य पर रोक, होगी आराधाना
पुरुषोत्म मास के लगते ही ***** समाज में मंागलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह, सगाई, गृहप्रवेश आदि कार्यो पर महीने भर रोक लग आएगी। इस पूरे महीने वे सभी भगवान विष्णु, श्रीराधा-कृष्ण की आराधना करेंगे। इस महीन में यमुना स्नान को भी श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान कृष्णभक्त श्रीमद भागवत एवं गीता का पाठ करेंगे। साथ ही वे महीनेभर तक उपवास भी रखेंगे। शहर में अधिकमास पर मंदिरों में भी रोजाना कई धार्मिक आयोजन होंगे।

कल से शुरू होगा माह-ए-रमजान
माहे रमजान की शुरुआत गुरुवार से होगी। इस पूरे महीने मुसलमान रोजा रख अल्लाह की इबादत करेंगे, ताकि मुसलमानों को गरीबी और तंगदस्ती में मुब्तला और भूख-प्यास से बिलकते इंसानों के दर्द व गम का एहसास हो जाए। जरूरतमंद मुसलामनों की किफालत का जज्बा-ए-सादिक पैदा हो जाए। खास तौर पर मुसलमान रमजान की इबादत की बदौलत अपने आप को पहले से ज्यादा अल्लाह तआला के करीब महसूस करेंगे।

इसका मकसद खास यह भी है कि मुसलमान साल भर के बाकी 11 महीने भी अल्लाह तआला से डरते हुए जिंदगी गुजारे, जिक्र व फिक्र, इबादत व रियाजत, कुरआन की तिलावत और यादें इलाही में खुद को मशरूफ रखे। सुपेला मस्जिद नूर के हॉफिज अमानुल्ला ने बताया कि रमजान मुबारक का हर लम्हा खास है। इसमें सबसे अहम इस माह में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ। कुरआन शरीफ लौहे महफूज से आसमान दुनिया की तरफ इसका नुजूल रमजान की सत्ताइसवीं तारीख में हुआ।

रमजान में पढ़ी जाएगी तरावीह
उन्होंने बताया कि रमजान के माह में हर वक्त इबादत होती है। रोजा इबादत, इफ्तार इबादत, इफ्तार के बाद तरावीह का इंतजार करना इबादत, तरावीह पढ़कर सहरी के इंतजार में सोना इबादत गरज कि हर पल खुदा की शान नजर आती है। उन्होंने बताया कि इसमें एक रात शबे कद्र है जो हजार महीनों से बेहतर है।

रमजान में इब्लीस और दूसरे शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है (जो लोग इसके बावजूद भी जो गुनाह करते हैं वह नफ्से अमारा की वजह से करते हैं) रमजान में नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर गुना मिलता है। रमजान में सहरी और इफ्तार के वक्त की दुआ कुबूल होती है। रमजान के माह में जिनका इंतकाल होता है, उनसे कब्र में सवालात नहीं होते।

कयामत के बाद अल्लाह तआला हर नेकी का बदला फरिश्तों से बंदों को देने कहेगा। जब रोजा का बदला देने की बात आएगी, तो वह उसे खुद उसका बदला देगा। जन्नत में बंदों को बेहतर मुकाम दिया जाएगा।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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