शिक्षक दिवस: पढि़ए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गणित वाले टीचर की कहानी, क्यों उन्हें देखते ही पैर छूते हैं CM, Video

एक मामूली शिक्षक हीरा सिंह ठाकुर ने आज से 46 साल पहले शिक्षा की ऐसी अलख जगाई कि उनका एक शिष्य छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री (CM Bhupesh Baghel) और दूसरा प्रदेश के एक मात्र तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) CSVTU का कुलपति बन गया। (Teachers Day 2019)

By: Dakshi Sahu

Updated: 05 Sep 2019, 02:26 PM IST

दाक्षी साहू @भिलाई. पाटन ब्लॉक के मर्रा गांव के सरकारी स्कूल में गणित पढ़ाने वाले एक मामूली शिक्षक हीरा सिंह ठाकुर (Hira singh thakur)ने आज से 46 साल पहले शिक्षा की ऐसी अलख जगाई कि उनका एक शिष्य छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री (Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel) और दूसरा प्रदेश के एक मात्र तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) CSVTU का कुलपति बन गया। खपरैल छत वाले घर और अभाव में रहकर ज्ञान के प्रकाश से हजारों छात्रों की जिंदगी सवार दी। ईमानदारी से पढ़ाई और बच्चों को सिखलाई देने वाले गुरु हीरा का मान उस वक्त और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हजारों की भीड़ में भी शीश झुकाकर उनका चरण स्पर्श करते हैं। बड़े-बड़े आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS)अधिकारियों को बताते हैं कि कैसे गणित वाले गुरुजी के मार से उनके जीवन का गणित हमेशा-हमेशा के लिए सुलझ गया। रिटायरमेंट के बाद भी बुजुर्ग गुरु ने ज्ञान बांटना नहीं छोड़ा। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत नायाब हीरों को तराशने के बाद अब वे गांव के कृषि महाविद्यालय के जरिए कृषि क्षेत्र में नए-नए प्रयोग करके किसानों की सूरत बदलने में जुटे हैं। अपने सफल प्रयोगों से समाज को निरंतर पोषित कर रहे हैं।

(Teachers Day 2019)

जिस स्कूल में पढ़े, वहीं पढ़ाकर जगाई शिक्षा की अलख

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मिडिल स्कूल में गणित पढ़ाने (Maths Teacher) वाले शिक्षक हीरा सिंह ठाकुर जिस स्कूल में पढ़े उसी स्कूल से बतौर शिक्षक, साल 1973 में अध्यापन की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि मैट्रिक पास होने के बाद उन्हें मर्रा मिडिल स्कूल (Marra middle school) में शिक्षक की नौकरी मिली। तब भूपेश बघेल सातवीं कक्षा में थे। गणित उनका मूल विषय था। गणित से दूरी बनाने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना ब्लैक बोर्ड पर लिखवाकर अभ्यास कराते थे। थोड़ी सख्ती की वजह से वे स्कूल में मारने वाले गुरुजी के नाम से भी प्रसिद्ध थे। छात्र भूपेश पढऩे में सामान्य होने के बावजूद उनसे झिझकते नहीं थे। हर दिन सुबह 6 बजे चार किमी. पैदल चलकर बेलौदी से मर्रा, गणित पढऩे उनके घर आया करते थे। स्कूल और गणित की पढ़ाई करने वे रोजाना 16 किमी. पैदल चलते थे।

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शिक्षा पर है सबका अधिकार, अभाव में पलती है प्रतिभा

सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ जीवन का पाठ पढ़ाने वाले सेवानिवृत शिक्षक का मानना है कि शिक्षा पर सबका बराबर अधिकार है। गांव की मिट्टी में अभाव में प्रतिभाओं को पलते देखा। नेतृत्व की प्रतिभा बालक भूपेश के अंदर बचपन से थी। छोटी कक्षा में रहकर स्कूल और बच्चों की समस्याओं से प्रधानपाठक को अवगत कराकर बड़ी कक्षाओं के छात्रों का नेतृत्व करते थे। तब देखकर लगता था ये लड़का एक दिन बड़ा नेता बनेगा। आज वही बाल नेता, प्रदेश का मुखिया बन गया है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मुकेश वर्मा की गणित की रूचि 7 वीं कक्षा में देखकर अनुमान लगा लिया था कि ये छात्र गणित के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा। आज हजारों सफल इंजीनियरों को गढ़कर उसने गुरु का मान बढ़ा दिया है।

कृषि महाविद्यालय के रूप में सीएम ने दी गुरु दक्षिणा

सौ साल पुराने मर्रा स्कूल में मुख्यमंत्री ने 6 वीं से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। गुरु हीरा अपने शिष्य से मिलने पहली बार मुख्यमंत्री निवास पहुंचे तो उन्हें गांव में कृषि महाविद्यालय खोलने के प्रस्ताव पर मंजूरी देकर सीएम ने असली गुरु दक्षिणा दी। शिक्षक हीरा सिंह ने बताया कि प्रस्ताव की दो लाइन पढ़कर मुख्यमंत्री ने बस इतना कहा कि आप मेरे गुरु हैं, आपने जो सोचा है, उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इतने सालों बाद भी शिक्षक के प्रति ऐसा विश्वास देखकर मन आनंदित हो गया। शिक्षक दिवस पर शॉल और श्रीफल देकर सम्मान देना वे आज तक नहीं भूले। राजनीति में चाहे जीते, चाहे हारे, गुरु की महत्ता आज भी वैसे ही है जैसे बचपन में थी।

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