जब 80 के दशक में पहनी पुलिस की वर्दी, सेल्यूट करने से कतराते थे कनिष्ठ अधिकारी, आज CID की DIG है हिमानी

पूरे राज्य में 1982 के बाद अकेली महिला DSP बनी तो उस दौर में खुद को साबित करना आसान नहीं रहा, लेकिन पिताजी की सीख हमेशा याद रही।

By: Dakshi Sahu

Updated: 18 Apr 2021, 04:48 PM IST

कोमल धनेसर@भिलाई. पहली बार डीएसपी (DSP) बनकर ड्यूटी पर गई, तो कनिष्ठ अधिकारी सेल्यूट करने से भी कतराते थे। सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDOP) के पद पर रहते हुए देहात में जाती थी, तो गांव वाले पुलिस अधिकारी मानने से ही इनकार कर देते थे। उनके मुताबिक थानेदार या पुलिसवाले पुरुष ही होते थे। यह देखकर अंदर से महसूस होता था कि अपनी काबिलियत दिखाकर आगे बढऩे की चुनौती सबसे बड़ी है। यह कहना है रायपुर में CID की DIG हिमानी खन्ना का। वे वर्ष 2006 में आईपीएस प्रोन्नत हुईं।

PSC में सलेक्ट होकर पहनी पुलिस की वर्दी
हिमानी बताती हैं कि मेरा 1990 में मध्यप्रदेश की पीएससी परीक्षा (MP PSC) में चयन हुआ। मेरिट लिस्ट में मैं इकलौती लड़की थी। पूरे राज्य में 1982 के बाद अकेली महिला DSP बनी तो उस दौर में खुद को साबित करना आसान नहीं रहा, लेकिन पिताजी की सीख हमेशा याद रही। उनका मानना था कि लड़कियां अपनी काबिलियत साबित करके किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।

पिता ने दी जीवन की अहम सीख
पिता जी का मानना है कि पुलिस ही नहीं, वर्दी वाली किसी भी सर्विस में महिलाओं के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। अपने पद पर रहते हुए खुद को साबित करना, परिवार की जिम्मेदारियों का संभालना, दोनों ही मोर्चों पर महिलाओं को संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में परिवार व जीवनसाथी परिस्थितियों को समझने वाले और मददगार हो तो चुनौतियां आसान हो जाती हैं। हिमानी बताती हैं कि उनके पति विनीत खन्ना डीआईजी हैं और उनका हमेशा सहयोग करते हैं। उनके पिता प्रोफेसर टी.सी. जैन ने उन्हें कभी खुद को कमजोर नहीं समझने का हौसला दिया।

महिलाएं अपने कार्यों से बदलें लोगों की सोच
DIG हिमानी कहती हैं कि पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करना आसान नहीं, लेकिन उसे बदला जा सकता है। पहले भले ही लोग आपको न स्वीकारें, लेकिन अपने कार्यों से काबिलियत साबित करेंगी, तो लोगों की सोच में बदलाव आएगा। आज भी चुनौती कम नहीं है, बस उसका रूप बदल गया है। अब लोग वर्दी वाली सर्विस में बेटियों को भेजना चाहते हैं, लेकिन फील्ड पर काम करते वक्त पुरुषवादी सोच का सामना करना पड़ता है।

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