युवा दिवस: पढि़ए IIT भिलाई के दो होनहार छात्रों की कहानी, जो चीन और जापान को मात देने बना रहे देसी बायोमैट्रिक

स्पेशल खूबियों के साथ यह देशी बायोमैट्रिक सिस्टम होगा, जिसे एक्सेस कंट्रोल सिस्टम फॉर डिजिटल इंडिया नाम दिया गया है।

By: Dakshi Sahu

Published: 12 Jan 2021, 12:48 PM IST

मोहम्मद जावेद @भिलाई. सरकारी दफ्तरों में लगे बायोमैट्रिक डिवाइस पर हाजिरी लगाकर गायब हो जाने वाले कर्मचारियों पर अब ये हरकत भारी पड़ेगी। आईआईटी भिलाई के होनहार स्टूडेंट्स एक ऐसी डिवाइस तैयार करने में लगे है, जो कर्मचारियों की ऐसी हरकतों पर नजर रखेगी। स्पेशल खूबियों के साथ यह देशी बायोमैट्रिक सिस्टम होगा, जिसे एक्सेस कंट्रोल सिस्टम फॉर डिजिटल इंडिया नाम दिया गया है। एक बार कार्यालय के भीतर दाखिल होने के बाद कर्मचारी तभी बाहर जा पाएगा जब आला अधिकारी एक्सेस देंगे। अटैंडेंस लगाकर बाहर से बाहर चले जाने का मैसेज तुरंत ही आला अधिकारी के पास आएगा। अभी तक जो भी बायोमैट्रिक डिवाइस बनती है उसे हम चाइना से मंगवाते हैं, लेकिन यह डिवाइस पूरी तरह से मेड इन इंडिया होगी।

रुकेगी डाटा की चोरी
यह डिवाइस आईआईटी भिलाई के छात्र अभिषेक शिंगले और सक्षम भूषण तैयार कर रहे हैं, जिसमें प्रबंधन के प्रोफेसर भी अपना मार्गदर्शन दे रहे हैं। दोनों टेक्नोक्रेट्स ने बताया कि अभी देश में चाइना व जापान से खरीदी गई बायोमैट्रिक ही इस्तेमाल हो रही है। यानी यदि चाइना चाहे तो अपने देश में बैठे-बैठे ही हर एक कार्यालय के कर्मचारियों की जानकारी हासिल कर सकता है। डाटा की चोरी को रोकने के लिए इस डिवाइस के सॉफ्टवेयर की कोडिंग खुद करेंगे। हार्डवेयर पर काम चल रहा है, साल के अंत तक यह मशीन तैयार होगी, जिसे बाजार में बेचने की भी तैयारी है। इस डिवाइस के साथ आंत्रप्रेन्योरशिप की दुनिया में कदम रखेंगे। चाइना व अन्य देशों से आयात की गई बायोमैट्रिक मशीन 15 से 20 हजार तक कीमत में आती है, लेकिन हमारी देशी व सुपर हाईटेक डिवाइस 6 से 8 हजार में ही तैयार कर दी जाएगी।

छात्र नहीं लगा पाएंगे प्रॉक्सी
जिस तरह ऑफिस में यह मशीन मददगार होगी, ठीक वैसे ही स्कूलों में भी इसका बहुत फायदा होगा। इस मशीन के जरिए स्कूलों में अटैंडेंस लेने का टेंशन खत्म होगा। बच्चों को एक खास तरह का आईडी कार्ड देंगे, जिसे डिवाइस पर रखते ही अटैंडेंस लग जाएगी। वैसे ही यदि बच्चा टीचर्स को बिना बताए स्कूल से बाहर गया तो भी टीचर व पैरेंट्स दोनों को मैसेज मिलेगा। यही नहीं, बच्चे एक-दूसरे की प्रॉक्सी भी नहीं लगा पाएंगे।

लैब में थम जाएंगे हादसे
अक्सर ही स्कूल की केमिस्ट्री लैब व अन्य में प्रायोगिक के दौरान बच्चे केमिकल प्रयोग के दौरान हादसे कर बैठते हैं। यह मशीन इन हादसों पर भी विराम लगाएगी। अभिषेक का कहना है कि लैब के बाहर लगी डिवाइस तब तक बच्चे को लैब में एंट्री नहीं देगी, जब तक की संबंधित टीचर भीतर न गया हो। बिना टीचर के प्रायोगिक लैब का डोर नहीं खुलेगा। प्रो. रजत मूना, डायरेक्टर, आईआईटी भिलाई ने बताया कि स्टूडेंट्स के इस प्रोजेक्ट को खूब सराहा गया है। आईआईटी के प्रोफेसर उनके इस आइडिया को डिवाइस में बदलने और फिर इसे मार्केट करने में मदद करेंगे। जल्द ही यह डिवाइस बनकर तैयार हो जाएगी। इस पर रिसर्च लगातार जारी है।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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