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जिस भिलाई ने पहुंचाया सात समंदर पार अब उसी शहर को कुछ लौटाने चार दोस्त शिक्षा से संवार रहे गरीब होनहार छात्रों का जीवन

स्कूल के जमाने के चार दोस्त, बचपन से साथ-साथ बड़े सपने देखे। भिलाई की अच्छी एजुकेशन ने उनके सपनों को इस कदर साकार किया कि वे देश और दुनिया में छा गए।

भिलाई

Published: January 10, 2022 11:45:10 am

भिलाई. स्कूल के जमाने के चार दोस्त, बचपन से साथ-साथ बड़े सपने देखे। भिलाई की अच्छी एजुकेशन ने उनके सपनों को इस कदर साकार किया कि वे देश और दुनिया में छा गए। 1989 के इन चार दोस्तों ने सफलता के ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर जब पीछे देखा तो उन्हें लगा जिस भिलाई ने हमें यहां तक पहुंचाया, वहां की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने कुछ अलग किया जाए। बस क्या था चारों ने मिलकर एजुकेशन सेक्टर में ही कुछ बेहतर करने की सोची। मुंबई में जा बसे आईआईटीयंस अभय पांडेय, हांगकांग में रहने वाले एवं बैंक ऑफ अमेरिका के पूर्व एमडी राजकुमार सिंघल, सिंगापुर में रहने वाली फेमस यू ट्यूबर जुही शुक्ला और भिलाई में रहने वाले व मैत्री विद्या निकेतन के डायेरक्टर एस साजी ने मिलकर भिलाई एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 2014 में की। इसके जरिए लगातार 7 सालों से जिले के जरूरतमंद होनहार बच्चों को मदद की जा रही है। ट्रस्ट से जुड़े ईपी रितेश ने बताया कि चारों दोस्तों ने मिलकर अब तक 500 से ज्यादा बच्चों को जेईई और नीट की कोचिंग कराई बल्कि कंप्यूटर एजुकेशन, स्कील डेवलपेंट की ट्रेनिंग भी दिलाई है, ताकि बच्चे 12वीं के बाद अपने पैरों पर भी खड़े हो सकें। इन दोस्तों का मानना है कि भिलाई की अच्छी शिक्षा से वे ऊंचे मुकाम तक पहुंचे। यदि सरकारी स्कूलों को होनहारों को वे अच्छी शिक्षा पाने का मौका उपलब्ध कराएंगे तो उनके साथ-साथ उनके परिवार की भी जिंदगी बदलेगी।
जिस भिलाई ने पहुंचाया सात समंदर पार अब उसी शहर को कुछ लौटाने चार दोस्त शिक्षा से संवार रहे गरीब होनहार छात्रों का जीवन
जिस भिलाई ने पहुंचाया सात समंदर पार अब उसी शहर को कुछ लौटाने चार दोस्त शिक्षा से संवार रहे गरीब होनहार छात्रों का जीवन
पहले स्कॉलरशिप फिर फीस की व्यवस्था
ट्रस्ट के माध्यम से इन दोस्तों ने शुरुआती कुछ सालों में बच्चों को लाखों रुपए की स्कालरशिप बांटी। लेकिन जब लगा कि कुछ पैरेंट्स बच्चों के पैसे का दुरुपयोग करने लगे तो उन्होंने स्कालरशिप की बजाए उन्हें जेईई, नीट की कोचिंग में बढ़ाना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने टैलेंट सर्च शुरू किया और सरकारी स्कूलों के उन होनहारों को चुना जो आर्थिक रूप से कमजोर थे, लेकिन कुछ करने का माद्दा रखते थे। ऐसे बच्चों को छांटकर उन्होंने उनका एडमिशन शहर के अच्छे कोचिंग में कराया। लगातार दो साल तक तैयारी करा उन्हें प्रतियोगीत परीक्षा के लिए तैयार किया। 2017 से शुरू हुए इस काम में शुरुआती दो साल तो कोई परिणाम नहीं मिला, लेकिन धीरे-धीरे बच्चों का सलेक्शन गर्वमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर जेईई के जरिए एनआईटी तक में होने लगा।
स्कूल की बदली तस्वीर
ट्रस्ट के जरिए ही स्टेशन मरोदा के पास स्थित छोटे से आजाद हिन्द स्कूल की तस्वीर बदली। ट्रस्ट ने यहां बच्चों के लिए कमरों का निर्माण, कंप्यूटर लैब सहित कंप्यूटर उपलब्ध कराया। इतना ही नहीं यहां के शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग भी दी, ताकि वे बच्चो ंको और बेहतर ढंग से पढ़ा सकें। वही ट्रस्ट सरकारी स्कूलों के करीब 150 बच्चों को स्पोकन इंग्लिश की कोचिंग भी दे रहा है ताकि वे अंग्रेजी भी अच्छी तरह सीख सकें।
ऐसे हुई दोस्ती
एस साजी और राजकुमार सिंघल ईएमएमएस सेक्टर 5 में साथ में पढ़े थे। जबकि एसएसएस सेक्टर 10 में एस साजी की दोस्ती जुही शुक्ला और अभय पांडेय से हुई। इस बीच राजकुमार सिंघल डीपीएस भिलाई में पढऩे चले गए,लेकिन इन चारों की दोस्ती बनी रही। स्कूलिंग के बाद वे सभी अलग-अलग जगह हायर एजुकेशन के लिए चले गए, लेकिन भिलाई से वे जुड़े रहे।

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