हद दर्जे की लापरवाही : डेंगू पीडित को रेफर तो कर दिया और केस हिस्ट्री दूसरे मरीज की दे दी, किशोरी ने तोड़ दिया दम

हद दर्जे की लापरवाही : डेंगू पीडित को रेफर तो कर दिया और केस हिस्ट्री दूसरे मरीज की दे दी, किशोरी ने तोड़ दिया दम

Satyanarayan Shukla | Publish: Sep, 02 2018 08:43:41 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

डेंगू पीडि़त कक्षा 10वीं की छात्रा 16 वर्षीय ईशा सिंह की मौत के लिए उनके पिता ओमप्रकाश सिंह ने एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराया है।

भिलाई. डेंगू पीडि़त कक्षा 10 वीं की छात्रा 16 वर्षीय ईशा सिंह की मौत के लिए उनके पिता ओमप्रकाश सिंह ने एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि ईशा को यहां से रायपुर के एक अस्पताल में रेफर तो कर दिया, लेकिन साथ में उसकी केस हिस्ट्री नहीं भेजी। बेटी को छोड़कर वे खुद लेने आए तो बंद लिफाफे में उसी वार्ड में भर्ती किसी दूसरी बच्ची की रिपोर्ट दे दी। जब तक सही केस हिस्ट्री मिली बहुत देर हो चुकी थी। हालत बिगडऩे पर ईशा को फिर दूसरे हायर सेंटर में भेजा गया, लेकिन वह बच नहीं सकी।

चिकित्सकों पर बेटी के इलाज में लापरवाही का आरोप

वार्ड-३६ पंचशील खुर्सीपार निवासी ओमप्रकाश ने स्पर्श अस्पताल के चिकित्सकों पर अपनी बेटी के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि २६ अगस्त को बुखार आने पर ईशा को स्पर्श अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां चिकित्सकों ने उसे इंजेक्शन लगाया। इसके बाद इशा ने ठीक लगने की बात कही तब घर ले गया। शाम को करीब ७ बजे ईशा को उल्टी होने लगी। तब फिर अस्पताल लेकर पहुंचा और भर्ती कराया। रात १.३० बजे डेंगू पॉजीटिव रिपोर्ट आई। इसके बाद से ईशा को यूरीन करने में दिक्कतें होने लगी।

ईशा की जगह दे दी वागीशा की रिपोर्ट
स्थिति बिगडऩे पर स्पर्श अस्पताल प्रबंधन ने २८ अगस्त को ईशा को बाल गोपाल चिल्ड्रन अस्पताल रायपुर रेफर कर दिया, लेकिन साथ में केस हिस्ट्री नहीं दिया। ओमप्रकाश अपनी बेटी को अस्पताल में छोड़कर वापस भिलाई आया। बंद लिफाफे में रिपोर्ट लेकर फिर रायपुर गया, तो चिकित्सक रिपोर्ट देखकर दंग रह गए। लिफाफा में ईशा के बजाय सेक्टर-२ निवासी वागीशा झा की रिपोर्ट थी। वागीशा और इशा दोनों एक ही वार्ड में भर्ती थी। वागीशा को किडनी की समस्या थी। वागीशा ने ३० अगस्त को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

वाट्सऐप पर रिपोर्ट भेजने में भी लगा दिए डेढ़ घंटे
ओम प्रकाश सिंह ने स्पर्श हॉस्पिटल के चिकित्सकों को इसकी जानकारी दी। तत्काल वाट्सएप पर ईशा की रिपोर्ट मांगी, लेकिन चिकित्सकों ने इसमें भी देरी की। डेढ़ घंटे बाद रिपोर्ट भेजी। तब तक बाल गोपाल के चिकित्सकों ने डिजीटल एक्स-रे निकाली। किडनी और यूरीन नली में संक्रमण को देखते हुए बालाजी अस्पताल रेफर किया। वहां चिकित्सकों ने चार बार डायलिसिस की फिर भी जान नहीं बचा पाए। २ सितंबर को ईशा ने दम तोड़ दिया।

चिकित्सकों की लापरवही ने ले ली मेरी बेटी की जान
ईशा के पिता ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि स्पर्श हॉस्प्टिल के चिकित्सकों की से मेरी बेटी का उचित इलाज नहीं हुआ। मैं शिकायत करूंगा। गलत रिपोर्ट देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करूंगा

भीड़ के कारण मानवीय भूल हो सकती है
डॉ. संजय गोयल, डायरेक्टर स्पर्श हॉस्पिटल ने कहा कि डेंगू पीडि़त ईशा का सामान्य इलाज किया गया। डॉ. राजीव कौरा शुरू से उसे देख रहे थे। पैरेंट्स खुद रेफर कराकर ईशा को रायपुर ले गए थे। अस्पताल में काफी भीड़ चल रही है। रिपोर्ट देने में मानवीय भूल हो सकती है। ईशा की जगह बागिशा की रिपोर्ट फाइल में दे दिए होंगे।

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