scriptReport of 85 nursing homes reached CMHO office | सीएमएचओ दफ्तर, Durg तक पहुंची 85 नर्सिंग होम व क्लीनिक की रिपोर्ट | Patrika News

सीएमएचओ दफ्तर, Durg तक पहुंची 85 नर्सिंग होम व क्लीनिक की रिपोर्ट

बिना लाइसेंस के दौड़ रहे क्लीनिक.

भिलाई

Updated: January 10, 2022 10:56:02 pm

भिलाई. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक जिला के करीब 85 से अधिक नर्सिंग होम और क्लीनिक की जांच कर रिपोर्ट सीएमएचओ दफ्तर, दुर्ग में जमा कर दिया है। विभाग अब इसमें मौजूद खार्मियों के आधार पर नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। यहां बड़ी बात यह है कि लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए पोर्टल शुरू हो चुका है। बावजूद इसके जिला में 50 फीसदी से अधिक नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों ने ऑन लाइन आवेदन तक नहीं किया है।

सीएमएचओ दफ्तर, Durg तक पहुंची 85 नर्सिंग होम व क्लीनिक की रिपोर्ट
सीएमएचओ दफ्तर, Durg तक पहुंची 85 नर्सिंग होम व क्लीनिक की रिपोर्ट

लायसेंस का समय हुआ पूरा
जिला में नर्सिंग होम समेत तमाम तरह के क्लीनिक बिना लाइसेंस के ही संचालित हो रहे हैं। इसमें से बहुत से ऐसे हैं जो लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किए हैं। वहीं शेष ऐसे हैं जो आवेदन किए हैं लेकिन विभाग ने अब तक उनको लाइसेंस जारी नहीं किया है। इसके पीछे वजह लंबे समय तक पोर्टल का बंद रहना रहा है। एप्लीकेशन पेंडिंग होते चले गए तब आवेदक ने खुद ही बिना लाइसेंस के संचालन करना शुरू कर दिया।

पांच साल के बाद फिर करना होता है आवेदन
स्वास्थ्य विभाग अगर एक आदेश जारी कर दे कि जिनके पास वर्तमान में लाइसेंस नहीं है या नवीनीकरण नहीं करवाए हैं। वे नर्सिंग होम, निजी अस्पताल और क्लीनिक बंद कर दें, तो शहर के 50 फीसदी नर्सिंग होम में ताला लग जाएगा। समय बीत जाने के बाद भी विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले सुधार करने का मौका देता है। जिसकी वजह से वे लाइसेंस की प्रक्रिया को लेकर बेहद धीमी चाल चलते हैं।

बड़े लोगों के हैं नर्सिंग होम
जिला में नर्सिंग होम ऐसे लोगों के हैं, जिनकी पहुंच ऊपर तक है। यही वजह है कि विभाग उनके खिलाफ नोटिस जारी करने से पहले फोन करके उनसे बात करता है। वे अपने एक कर्मचारी को भेजकर क्या कमियां है पूछते हैं और बाद में दिक्कत दूर कर देने की बात कहकर लौटा देते हैं। विभाग तो जांच कमेटी भी शासन से आदेश मिलने के बाद गठित किया। वर्ना दो साल से तो किसी नर्सिंग होम या अस्पताल से पूछताछ भी नहीं हो रही थी कि कब और कैसे शुरू कर दिए हैं।

1339 ने किया है ऑन लाइन आवेदन
जिला में नर्सिंग होम, क्लीनिक, पॉली क्लीनिक व लैब संचालित करने के लिए अब तक करीब 1339 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें से पचास फीसदी को भी लाइसेंस जारी नहीं किया जा सका। पॉर्टल में खराबी की वजह से यह दिक्कत पेश आ रही थी। अब वह दिक्कत दूर हो गई है। बावजूद इसके काम उस गति से ही चल रहा है।

फिर से करो ऑन लाइन आवेदन
जिला में क्लीनिक और पॉली क्लीनिक चलाने लाइसेंस के लिए २55 ने आवेदन दिया। जिसमें से 168 को लाइसेंस दिए। इसके अलावा शेष का आवेदन पेंडिंग है। विभाग कह रहा है कि पोर्टल में दिक्कत दूर हो चुकी है, फिर से लाइसेंस के लिए आवेदन करें। संचालक यह सुनने के बाद भी बिना किसी अनुमति के दुकानदारी चला रहे हैं।

50 से अधिक लैब भी चल रहे ऐसे ही
जिला में लैब, सोनोग्राफी सेंटर संचालित करने के लिए 82 आवेदन आए थे। जिसमें से 31 को लाइसेंस दे दिए। इसके अलावा 51 को अब तक लाइसेंस नहीं मिला है। उनका आवेदन पेंडिंग में शामिल है। बावजूद इसके इसमें से बहुत से शुरू हो चुके हैं। कोरोना काल में लैब संचालकों ने जमकर कारोबार किया। अब विभाग उनसे लाइसेंस पूछ रहा है।

50 से अधिक डेंटल क्लीनिक भी संचालित हो रहे बिना लाइसेंस के
डेंटल क्लीनिक शुरू करने के लिए विभाग को 91 लोगों ने ऑन लाइन आवेदन किया। इसमे से 38 को लाइसेंस जारी हो गया। शेष इंतजार करते रहे तो विभाग ने बताया कि पोर्टल में तकनीकी दिक्कत है। तब वे बिना लाइसेंस के शुरू हो गए।
- विभाग अगर जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्ती से कार्रवाई शुरू कर दे तो शहर में संचालित हो रहे पचास फीसदी नर्सिंग होम और क्लीनिक में ताला लग जाएगा। नर्सिंग होम को बिना वाहन स्टैंड के ही शुरू कर दिया गया है। जब टीम आती है पड़ोस में किसी के भी आवासी प्लाट में वाहनों को खड़ा कर फ्लैक्स लगा देते हैं। यह रास्ता विभाग के कुछ लोगों ने ही बता रखा है।
- छत्तीसगढ़ में नर्सिंग होम एक्ट 2013 लागू है। जिसमें उल्लेखित प्रावधान के मुताबिक राज्य में निजी चिकित्सकीय काम के लिए संबंधित चिकित्सक या निजी चिकित्सा संस्थानों का उस जिले के नर्सिंग होम एक्ट 2013 में पंजीयन अनिवार्य है। उच्च न्यायालय, बिलासपुर से पारित आदेशानुसार अवैध, अपंजीकृत प्रायवेट प्रैक्टिस करने वाले सभी चिकित्सकों, चिकित्सा क्लीनिकों, चिकित्सा संस्थानों को तत्काल प्रभाव से सील बंद करना है। व बिना वैध चिकित्सकीय शिक्षा व पंजीयन के चिकित्सकीय कार्य पर प्रतिबंद्ध किया जाना है।

85 से अधिक की आ चुकी है जांच रिपोर्ट
डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर, चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग ने बताया कि जिला में संचालित हो रहे नर्सिंग होम, क्लीनिक, पॉली क्लीनिक और लैब की जांच करने टीम लगातार जा रही है। अब तक करीब 85 से अधिक की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। कोरोना के मामले बढऩे की वजह से फोकस अब उस ओर है। इस वजह से नोटिस जारी करने के काम में विलंब हुआ है।

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