गणतंत्र दिवस विशेष: जान की बाजी लगा दी तो घायल जवान के सीने में सज गया डीजी मेडल

सीमाओं पर अपने ध्वज का हम रखते हैं मान, हर कुर्बानी देने को तैयार खड़े हैं हम है सशस्त्र सीमा बल।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 27 Jan 2018, 11:10 AM IST

भिलाई. जोश भरा है सीने में, हथेलियों में है जान, सीमाओं पर अपने ध्वज का हम रखते हैं मान, हर कुर्बानी देने को तैयार खड़े हैं हम है सशस्त्र सीमा बल। एसएसबी के गीत की यह लाइनें जवानों में एक नया जोशभर देती है। इन्हीं पंक्तियों को याद कर शायद आरक्षी कैलाश धारे के हौसले नक्सली हमले में घायल होने के बाद भी बुलंद है। वह 5 मई 2017 की दोपहर थी। करीब डेढ़ बजे बरेबंड़ा कंपनी से जवान पैदल ही पेट्रोलिंग पर निकले। जंगल की कैंप से 2 किलोमीटर दूर ही पहुंचे थे कि वहां उन्हें कुछगड़बडी़ पर जब तक कुछ समझ पाते नक्सलियों ने जमीन के अंदर छिपाई आईईडी ब्लॉस्ट कर दी। ब्लॉस्ट होते ही जवान कैलाश धारे बुरी तरह घायल हो गया।शरीर में छर्रेघुस चुके थे। खून से लथपथ कैलाश को समझ नहीं आया कि उसके साथ क्या हुआ? पर उसके हाथ की मजबूत पकड़ हथियार पर पहले की तरह बनी हुईथी। उसके सभी साथी पोजिशन ले चुके थे और सामने से होने वाले किसी भी हमले के लिए तैयार थे।

चिंता थी तो केवल हथियार की

पर उसकी हिम्मत जवाब देने लगी। उसे चिंता थी तो केवल हथियार की, क्योंकि जंगल में कोई भी उससे वह हथियार छीन सकता था। किसी तरह हिम्मत जुटाईऔर अपने साथी के पास जा पहुंचाउसे हथियार देते ही बेहोश हो गया फिर क्या हुआउसे कुछयाद नहीं। इस सब के बीच कैलाश के जज्बे को सभी ने तब सलाम किया जब वह अस्पताल से बाहर आया और वापस अपनी पोस्टिंग पर जाने की इच्छा जताई। उसके इस हौसले को देख हाल ही में उसे डीजी सिल्वर डिस अवार्डसे सम्मानित किया गया।

तो उनका मनोबल टूटता
देशसेवा का जज्बा लिए 2007 में एसएसबी में भर्ती हुएमध्यप्रदेशके कैलाश धारे ने 9 वर्षआसाम में बार्डपर बिताए। दो साल पहले ही छत्तीसगढ़ में उनकी पोस्टिंग रावघाट रेलवे प्रोजक्ट के तहत अंतागढ़ के ताड़ोकी स्टेशन के बरेबंडा कंपनी में हुई थी। वे बताते हैं कि नक्सली हमले में घायल होने के बाद वे चाहते तो वापस लौट सकते थे,लेकिन उनके ऐसा करने से उनके साथियों का मनोबल टूट जाता और ऐसे एरिया में कई ड्यूटी ही नहीं करना चाहता। जब वे वापस अपनी ड्युटी पर लौटे तो उनके साथी काफी खुश हुएऔर दोगुने उत्साह के साथवे सब अपनी ड्युटी कर रहे हैं।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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