गणतंत्र दिवस विशेष: दुश्मन बार्डर पार हो या देश के अंदर उनसे निपटना जरूरी

सशस्त्र सीमा बल के जवान रेलवे और बीएसपी की संपति की सुरक्षा में तो लगे ही है रावघाट प्रोजेक्ट को भी गति दे रहे हैं।

By: Satya Narayan Shukla

Published: 26 Jan 2018, 04:36 PM IST

भिलाई. बीएसपी के रावघाट माइंस का प्रोजेक्ट 2009 में शुरू हुआ पर 2014 तक फील्ड में काम शुरू ही नहीं हो पाया। गृह मंत्रालय ने सीआरपी को हटाकर एसएसबी को जिम्मेदारी दी तो चंद वर्ष में ही गुदुम तक ट्रेन दौडऩे लगी और दो महीने में ही भानुप्रतापपुर तक का सफर भी आसानी से तय होने लगेगा। स्पेशल ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ पहुंचे सशस्त्र सीमा बल के जवान 24 घंटे मुस्तैद रहकर रेलवे और बीएसपी की संपति की सुरक्षा में तो लगे ही है साथ ही रावघाट प्रोजेक्ट को भी गति दे रहे हैं।

नक्सली क्षेत्र में तैनात जवानों के हौसले बुलंद

एसएसबी के डीआईजी मनमोहन सिंह की सुझबूझ और जवानों के साथ बेहतर तालमेल की वजह से धूर नक्सली क्षेत्र में तैनात जवानों के हौसले बुलंद है। वे अपने जवानों के साथ ऑपरेशन में शामिल होने के लिए भी मशहूर हैं। कोई नक्सली हमला हो या कोई स्पेशल ऑपरेशन वे खुद वर्दी पहनकर जवानों के साथ मोर्चे पर डट जाते हैं। अपनी 25 साल की सर्विस में इंडियन पुलिस मैडल के साथ ही डीजी सिल्वर और गोल्डन डिस अवार्ड से नवाजे गए डीआईजी सिंह का मानना है कि फोर्स कोई भी हो जब तक अपने एरिया के लोगों का विश्वास नहीं जीतते तब तक वे अपने लक्ष्य को आसानी से नहीं पा सकते।

उनका बढ़ता है हौसला
डीआईजी सिंह बताते हैं कि जब ऑपरेशन एरिया में जवान दुश्मनों से मुकाबला करते हंै तो जब अधिकारी उनके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं तो उनका हौसला दोगुना हो जाता हैं, तब उन्हें लगता है कि उनके अधिकारी भी अपनी जान जोखिम में डालकर उनका साथ दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 मार्च को ही अंतागढ़ क्षेत्र में हुए आईईडी ब्लॉस्ट की खबर लगते ही वे सीधे ऑपरेशन एरिया में पहुंचे और जवानों के साथ मिलकर उन्होंने ऑपरेशन चलाया और बड़ी मात्रा में आईईडी भी खोज निकाली।

ड्यूूटी में नहीं है अंतर
अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल, सिक्किम, आसाम जैसे इलाकों में अपनी सेवाएं दे चुके डीआईजी सिंह 2014 से छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे दुर्गम जंगली क्षेत्र में भी काम कर चुके हैं। वे बताते हैं कि दुश्मन बार्डर पार हो या देश के अंदर उनसे निपटना जरूरी है। भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से कुछ दिक्कतें जरूरी आती है पर उनसे निपटना ही एसएसबी की खासियत है।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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