BSP के डिजास्टर मैनेजमेंट में सुधार की है बड़ी जरूरत, सेफ्टी कमेटी ने आखिर ऐसा क्यों कहा, यहां पढि़ए

बीएसपी में 12 जून को पानी की सप्लाई करने वाले विभाग के पंप हाउस 2 में गैस रिसाव हुआ था, जिसमें 6 कर्मियों की जान चली गई थी।

By: Dakshi Sahu

Published: 15 May 2018, 04:38 PM IST

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में १२ जून २०१४ को गैस कांड हुआ था। जिसके बाद प्रबंधन ने कुछ सुधार किया, इसके बाद भी आपदा प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) में काफी सुधार की जरूरत है। मंगलवार को सेफ्टी कमेटी यहां का दौरा करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची है।

बीएसपी में 12 जून को पानी की सप्लाई करने वाले विभाग के पंप हाउस 2 में गैस रिसाव हुआ था, जिसमें 6 कर्मियों की जान चली गई थी। पंप हाउस-1, 2 और 11 का आपरेटर कंट्रोल केबिन अभी भी भूतल से 30 से 40 फीट नीचे मौजूद है।जमीन के नीचे स्थित पंप फ्लोर पर गैस लीकेज या अन्य कोई हादसा होता है, तो तत्काल राहत पहुंचाने में बड़ी बाधा आ सकती है।

गैस लिकेज होने से बाहर आने का नहीं मिलता मौका
सेफ्टी कमेटी को कर्मियों ने बताया कि अधिकांश उपकरण भूतल से 40 फीट नीचे लगे हैं, जिसकी मॉनिटरिंग वहा पर स्थित नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) में रहकर की जाती है।

गैस लीकेज की स्थिति में उन्हें सीढिय़ों से ऊपर चढ़ कर खुले में आने का मौका नहीं मिलता। यही वजह है कि सभी पंप हाउस के कंट्रोल रूम जमीन की गहराई से निकालकर बाहर बनाना चाहिए। जिससे गैस रिसाव की स्थिति में कर्मी तुरंत निकलकर खुली हवा में आ सके।

वाकी-टॉकी का हो उपयोग
यहां काम करने वाले कर्मियों ने बताया कि 40 फीट नीचे मौजूद पंप हाउस पर कार्य करते समय खुद चार्जमैन को निर्देश देने के लिए कंट्रोल रूम में जाना पड़ता है। जहां से चार्जमैन कर्मियों को बिना देखे निर्देश देते हैं। कर्मियों ने सुझाव दिया कि निर्देश देने के लिए वाकी टाकी का उपयोग किया जाए, ताकि वह उपर खड़े होकर कर्मियों को और कार्यों को देखते हुए निर्देश दे सकें।

दुर्घटना के बाद हुए यह सुधार
12 जून की दुर्घटना के बाद पंप हाउस-2 में अनेकों सुधार किए गए हैं। भूतल से नीचे स्थित पंप हाउस में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए। कैमरा के सहारे पंप हाउस को उपर स्थित नियंत्रण कक्ष से देखा जा सकता है।

इसी तरह जलस्तर ***** व कार्बन मोनो आक्साइड ***** यंत्र ? भी भूतल (उपर) पर स्थित नियंत्रण कक्ष में लगाया गया है, जिससे नीचे पंप हाउस में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर भूतल पर स्थित नियंत्रण कक्ष में इसकी सूचना मिल जाती है और कार्रवाई की जाती है।

वेंटिलेशन सिस्टम में हुआ सुधार
कर्मियों ने बताया कि पंप क्रमांक-13 व 14 के पास जहां हादसा हुआ था, वहां के वेंटिलेशन सिस्टम को बेहतर बनाया गया है, जिससे गैस लीकेज होने कि स्थिति में भी वह हवा के साथ मिलकर विरल हो जाएगा और उसका असर न्यूनतम हो जाएगा।

गेट वाल्व ऑपरेट के लिए लगे मोटर ड्राइव
कर्मियों ने यह भी बताया कि क्लोरिन गैस स्टेशन में विंच मशीन के गेट वाल्व को ऑपरेट करने के लिए चार व्यक्तियों की जरूरत पड़ती है। गेट वाल्व में मोटर ड्राइव लगाया जाए, ताकि एक व्यक्ति आसानी से उसे ऑपरेट कर सके।

सेफ्टी कमेटी ने खामियों को किया इंगित
पंप हाउस क्रमांक 1 व 4 के बीच वेंटिलेशन में सुधार की जरूरत है। क्रेन की इमरजेंसी ब्रेकडाउन के समय न तो क्रेन ऑपरेटर के उतरने की और न ही उन्हें किसी भी तरह की राहत पहुंचाने की व्यवस्था है। सेफ्टी टीम ने रख-रखाव (हाउस कीपिंग) की जरूर भी यहां महसूस किया।

प्लेट को बदलने की है जरूरत
सेफ्टी कमेटी ने पाया कि रोटरी स्क्रीन आउटलेट चेंबर पर रखी प्लेट पूरी तरह सड़ गई है और उसे जल्द बदला जाना चाहिए, नहीं तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सीटू के सेफ्टी कमेटी की जांच टीम में एसपी डे, सविता कुमारी, अली अकबर, कुंज बिहारी मिश्र, रवि शंकर साहू, वीएस साहू, जेके वर्मा, एमके राव, अजय सोनी व वीरेंद्र सिंह मौजूद थे।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned