कलेक्टर, Durg को सौंपी जाएगा जांच प्रतिवेदन, सीएमएचओ दफ्तर में पीडि़त परिवार का भी हुआ बयान

प्रेग्नेंट महिला की मौत,

By: Abdul Salam

Published: 04 Oct 2021, 11:44 PM IST

भिलाई. प्रेग्नेंट महिला की एक निजी अस्पताल से दूसरे, तीसरे और चौंथे में जाने के बाद मौत के मामले में सोमवार को चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग के दफ्तर में पीडि़त परिवार का भी बयान लिया गया। इसके साथ-साथ जिन अस्पतालों में प्रेंग्नेंट महिला को लेकर जाया गया, उनके बयान भी लिए गए हैं। जांच कर प्रतिवेदन को कलेक्टर, दुर्ग को सौंपा जाएगा। जिसके बाद इस मामले में कार्रवाई तय की जाएगी। निजी अस्पतालों का खासा दबाव विभाग के अधिकारियों पर है। इस वजह से जांच प्रतिवेदन पर अधिकारी कुछ खुलकर कहने से गुरेज कर रहे हैं।

यहां उठ रहे सवाल
- पीडि़ता सबसे पहले जिस निजी अस्पताल में पहुंची, वहां चिकित्सक नहीं थे। मौजूद नर्स ने दूसरे अस्पताल जाने कह दिया। दूसरे अस्पताल के लिए रेफर नर्स कर सकती है क्या। चिकित्सक को फोन क्यों नहीं किए। यह सवाल उठ रहा है।
- एक निजी बड़े अस्पताल में पहुंचने पर वहां कोई देखने आया ही नहीं, पहले एक स्टेचर लाए और बाद में बेड नहीं कहते हुए दूसरे अस्पताल में जाने के लिए कह दिया। बेड था या नहीं। सबसे पहले इसकी जांच होनी चाहिए।

कार में बैठकर घर से निकली पीडि़ता
गुजरात से भिलाई के हाउसिंग बोर्ड में आई पूनम नागदेवे (२४ साल) प्रेग्नेंट थी। पिछले गुरुवार की अल सुबह उसको सांस लेने में तकलीफ हुई। वह कार में बैठकर अपने पति के साथ उस निजी अस्पताल पहुंची। जहां दो माह से जांच करवा रहे थे। वहां चिकित्सक नहीं थे, तब मौजूद नर्स व स्टॉफ ने दूसरे अस्पताल ले जाने कहा। दूसरे हॉस्पिटल में चिकित्सक ने जांच किया। उसकी कंडीशन को देखते हुए ऑक्सीजन और एंबुलेंस दिया। तीसरे अस्पताल में पहुंचे तो मरीज को देखने एंबुलेंस तक कोई चिकित्सक नहीं आया और बेड नहीं है कहते हुए दूसरे सेंटर जाने कहा। चौंथे सेंटर में पहुंची लेकिन वहां दाखिल कर इलाज शुरू किए तब तक प्रेग्नेंट ने दम तोड़ दिया। घर से जो कार में बैठकर निकली उसकी मौत हो जाएगी, यह परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था।

महाराष्ट्र की रहने वाली थी पूनम
भिलाई में रहने वाले विपिन से महाराष्ट्र की पूनम की शादी हुई थी। विपिन गुजरात में जॉब करते हैं। घटना को चार दिन पूरा हो चुका है। अब तक मामले में डाटा एकत्र कर बयान लिए हैं। सोमवार को चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग के दफ्तर में पीडि़त परिवार का भी बयान लिए। इस दौरान अन्य अस्पताल ने भी अपना पक्ष रखा है।

सख्त कार्रवाई की जरूरत
पीडि़त परिवार का कहना है कि इस तरह के मामले फिर से प्रकाश में न आए, इसके लिए उन पर कार्रवाई करने की जरूरत है, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। पीडि़त परिवार का कहना है कि चिकित्सक नहीं है, बेड नहीं है यह कह कर लौटाया जा रहा है। तब जांच कर इस तरह के मामले में एक्शन लिया जाना चाहिए। प्रकरण में यह भी देखना चाहिए कि छोटे अस्पताल से बड़े में भेजा जा रहा है या बड़े से छोटे में। यह भी अहम है.

डाटा कलेेक्ट कर चुके

डॉक्टर सुगम सावंत, जांच प्रभारी और वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल, दुर्ग ने बताया कि मामले में डाटा कलेक्ट करके चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग को दिया जा चुका है। मामले में हर पक्ष का बयान भी लिया जा रहा है। जिसमें पीडि़त परिवार, अस्पताल शामिल हैं।

कलेक्टर को सौंपा जाएगा जांच प्रतिवेदन
डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर, चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग, ने बताया कि प्रेग्नेंट की मौत के मामले में बयान लिया जा रहा है। हर पहलू की जांच की जा रही है। इसके बाद जांच प्रतिवेदन कलेक्टर, दुर्ग को सौंपा जाएगा।

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