बीएसपी में प्रीवेंटिव मेंटेनेंस बंद होना ही है हादसों का कारण

सीटू ने की जांच.

By: Abdul Salam

Published: 10 May 2020, 10:00 PM IST

भिलाई . सीटू की केंद्रीय सुरक्षा समिति व मिल जोन की टीम ने रविवार को रेल मिल शिपिंग में हुए क्रेन हादसे की जांच की। 9 मई की रात्रि पाली में रेल मिल शिपिंग एरिया का 16 नंबर क्रेन का केबिन वाला गार्डर टूट कर नीचे आ गिरा। क्रेन चला रहे मंसाराम ठाकुर क्रेन में ही फंस गए। दमकल विभाग की टीम ने केबिन को काटकर क्रेन ऑपरेटर को बाहर निकाला। जिन्हें मेन मेडिकल पोस्ट में प्राथमिक जांच के बाद सेक्टर 9 में भर्ती करवाया गया है।

इस वजह से हुआ हादसा
यूनियन ने तर्क दिया कि संयंत्र के अंदर जब भी कोई हादसा होता है, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण मेंटेनेंस का ना होने की बात ही सामने आती है। किसी समय में पूरे संयंत्र के अंदर सभी विभागों में माह में 1 से 2 दिन उत्पादन को बंद करके रख-रखाव का काम लिया जाता था। जिसे प्रीवेंटिव मेंटेनेंस कहते है। अब संयंत्र के अधिकांश विभागों में केवल ब्रेकडाउन मेंटेनेंस होता है। ब्रेकडाउन आने पर आनन-फानन में मेंटेनेंस का काम लेते हैं। यह पूरी तरह से अनप्लांड अर्थात बिना तैयारी के होता है। इससे रख-रखाव का उद्देश्य पूरा नहीं होता।

उत्पादन के दबाव में नहीं देते रख-रखाव पर ध्यान
यूनियन ने बताया कि प्रोडक्शन व मेंटेनेंस में दोनों एक-दूसरे के पूरक है। मेंटेनेंस को ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो रफ्तार के साथ प्रोडक्शन नहीं किया जा सकता। वहीं रफ्तार से एक तय अवधि तक प्रोडक्शन करने के बाद मेंटेनेंस लेने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। प्रबंधन अब केवल उत्पादन पर भी ध्यान दे रही है, जिसके चलते मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त समय नहीं देता जो कि हादसों का कारण बनने लगा है।

ठेका श्रमिकों से लेते हैं काम
जांच के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि कर्मी लगातार क्रेन के अंदर होने वाले गड़बडिय़ों से परेशान हैं। जब बात आगे बढ़ जाती हैं तो उस कर्मी को उस काम से हटाकर वहां पर ठेका श्रमिक से काम लिया जाता है। मेंटेनेंस पर सवाल उठाते हैं तो अधिकारी उन कर्मियों को कहते हैं कि जब दूसरे लोग चुपचाप काम कर रहे हैं तो तुम यह बात शुरू कर देते हो। क्रेन चलाने का काम स्थाई प्रकृति का काम है। इस काम को ठेका श्रमिकों से नहीं करवाना चाहिए।

कभी भी सुरक्षित नहीं रहा आरएसएम का शिपिंग एरिया
यूनियन का कहना है कि रेल व स्ट्रक्चरल मिल का शॉपिंग एरिया कभी भी कार्य करने के दृष्टिकोण से सुरक्षित नहीं रहा है। सीटू ने बीएसपी सीईओ को भी इसकी शिकायत की थी। वे मौके पर आकर इसका मुआयना भी किए थे, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

एक लेवल पर नहीं है क्रेन रेल
जांच में देखने को मिला कि क्रेन जिस पर चलती है, वह एक लेवल पर नहीं है। लंबे समय तक भारी भरकम लोड लेकर क्रेन चलते रहने के कारण लेवल का बिगडऩा हो सकता है। इसका रख-रखाव जरूरी है। जिसके अभाव में डिरेल होने की घटनाएं भी सामने आती है।

क्रेन से ले रहे ओवरलोड काम
ईओटी क्रेन से ओवरलोड काम लिया जाता है। जब रेल मिल की स्थापना हुई तब रेल मिल में 13 मीटर के रेल बना करते थे। बाद में 26 मीटर का रेल शुरू हुआ। 13 मीटर के रेल बनते समय इन क्रेन से 13 मीटर के 8 से 10 रेल उठाया जाता था। जो करीब 8 टन का लोड क्रेन पर पड़ता था। बाद में 26 मीटर के रेल बनने लगे तब भी इस क्रेन से लगभग 8 रेल तक उठाए जाने लगे। इस तरह 10 टन क्षमता वाले क्रीम से करीब 14 टन का काम लेने लगे। जिसके चलते लंबे समय में क्रेन पर विपरीत असर हो रहा।

मिनट्स में दर्ज है प्रबंधन के
सीटू ने कहा कि अपने कार्यकाल में विभागीय समिति की प्रबंधन के साथ होने वाली बैठक में आरएसएम के मेंटेनेंस के मुद्दे उठाते रहे हंै, जोकि मिनट्स में आज भी दर्ज है। प्रबंधन उन बैठकों में लिए गए निर्णय व मिनट्स को लेकर कितनी मुस्तैदी से काम करती रही है। इस बात का खुलासा ऐसे हादसों के बाद सामने आने लगता है।

तबादलने के बाद भी जमे हुए हैं अधिकारी
सीटू ने साफ किया कि शिपिंग में मेंटेनेंस के लिए जो अधिकारियों जिम्मेदार हैं, उनमें से ऐसे भी अधिकारी हैं जिनका शिपिंग एरिया से दूसरे क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन वह उस एरिया में जाने के बजाय शिपिंग एरिया में ही पड़े रहते हैं। इन सब के पीछे उनकी क्या मंशा और स्वार्थ है यह जांच का विषय है।

Abdul Salam Reporting
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