इंजीनियरिंग के साथ अब स्टूडेंट सामाजिक विज्ञान और संविधान की पढ़ाई भी करेंगे

इंजीनियरिंग कोर्स कर रहे छात्र अगले सत्र से ह्यूमेनिटीज, सामाजिक विज्ञान,एन्वॉयरमेंटल साइंस, भारतीय संविधान जैसे विषयों की पढ़ाई करेंगे।

By: Satya Narayan Shukla

Published: 09 Dec 2017, 10:06 PM IST

भिलाई. इंजीनियरिंग कोर्स कर रहे छात्र अगले सत्र से ह्यूमेनिटीज, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, एन्वॉयरमेंटल साइंस, भारतीय संविधान जैसे विषयों की पढ़ाई करेंगे। तकनीकी शिक्षा की नियामक संस्था अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने खुद से संबंद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाए जा रहे टेक्निकल कोर्स और इंजीनियरिंग के अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए प्रस्तावित नए पाठ्यक्रम में इन विषयों को जोड़ा है।

अध्यादेश में संशोधन कर इसे लागू करेंगे

एआईसीटीई के रीजनल सेंटर भोपाल के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय सहित तमाम विश्वविद्यालयों को इस नई व्यवस्था के तहत लाया जाएगा। राज्य विश्वविद्यालय अध्यादेश में संशोधन कर इसे लागू करेंगे। हालांकि उससे पहले राज्यों के तकनीकी निदेशालयों ने इस व्यवस्था को लेकर सुझाव भी मांगे जाने हैं।

कम से कम लाने होंगे १२ क्रेडिट प्वॉइंट

नए करिकुलम के मुताबिक इंजीनियरिंग के छात्रों को चार साल के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में कुल 150-160 क्रेडिट प्वॉइंट में से कम से कम 12 क्रेडिट प्वॉइंट ह्यूमेनिटीज, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में अर्जित करने होंगे। इसके अलावा सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को अनिवार्य रूप से पर्यावरण पर एक कोर्स संचालित करना होगा। एन्वॉयरमेंटल साइंस के पेपर में ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण जैसे टॉपिक शामिल होंगे। साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेजों को भारतीय संविधान और भारतीय पारंपरिक ज्ञान की जरूरत विषय में से एक पेपर पढ़ाना होगा। हालांकि यह पेपर अनिवार्य होंगे, लेकिन इसके लिए छात्रों को क्रेडिट प्वॉइंट नहीं मिलेंगे।

30 के बदले हर हफ्ते 20 घंटे थ्योरी क्लास
एआईसीटीई ने फिलहाल इस व्यवस्था को पूरी तरह से लागू तो नहीं किया है, लेकिन बताया जा रहा है कि नए करिकुलम में हर हफ्ते होने वाली थ्योरी क्लास के समय को कम किया गया है। अब 30 घंटे के बदले हर हफ्ते 20 घंटे थ्योरी क्लास होगी। अधिक समय प्रैक्टिकल क्लास पर दिया जाएगा। फाइनल सेमेस्टर के छात्र क्लास करने की अनिवार्यता से मुक्त होंगे और इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से उनसे प्रोजेक्ट वर्क कराया जाएगा।

इसमें समय लगेगा
सीएसवीटीयू के कुलपति डॉ. एमके वर्मा ने बताया कि इस नई व्यवस्था की जानकारी तो मिली है, लेकिन फिलहाल एआईसीटीई ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। क्रेडिट सिस्टम के साथ-साथ ह्यूमेनिटीज की पढ़ाई कराने के पहले विश्वविद्यालय को अध्यादेश में संशोधन करना होगा। इसमें समय लगेगा।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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