scriptSupply of dirty water again in BSP township | BSP टाउनशिप में फिर गंदे पानी की सप्लाई, नल से आया मटमैला, दूषित पानी लेकर नगर सेवा विभाग पहुंचे लोग | Patrika News

BSP टाउनशिप में फिर गंदे पानी की सप्लाई, नल से आया मटमैला, दूषित पानी लेकर नगर सेवा विभाग पहुंचे लोग

दो-ढाई महीने के बाद बमुश्किल 20-15 दिन ही टाउनशिप में साफ पानी की आपूर्ति हुई थी कि अब फिर पानी गंदा हो गया है। शनिवार को सभी सेक्टर के नलों में मटमैले और दूषित पानी आया।

भिलाई

Updated: July 18, 2021 05:06:55 pm

भिलाई. दो-ढाई महीने के बाद बमुश्किल 20-15 दिन ही टाउनशिप में साफ पानी की आपूर्ति हुई थी कि अब फिर पानी गंदा हो गया है। शनिवार को सभी सेक्टर के नलों में मटमैले और दूषित पानी आया। इससे नाराज लोग बड़ी संख्या में बीएसपी के नगर सेवाएं विभाग भी पहुंच गए थे। अधिकारयों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इधर बीएसपी प्रबंधन ने नालको के बाद मेसर्स केमबांड को दिए गए जलशोधन की प्रक्रिया का ठेका अब बंद कर दिया है। बीएसपी ने पहले मेसर्स नाल्को वाटर इंडिया लिमिटेड को पानी साफ करने का ठेका दिया। एक महीने में एक करोड़ खर्च किया। वांछित नतीजा नहीं मिला तो जिला प्रशासन एवं भिलाई नगर निगम की अनुशंसा पर मेसर्स केमबांड को जलशोधन की प्रक्रिया का ठेका दिया था। केमबांड ने बायोलॉजिकल डि कोलाइजेशन ओर रिमूव ऑफ आर्गेनिक कंपाउंड के जरिए पानी को सभी मानकों में अंडर लिमिट कर साफ व पीने योग्य कर दिया था। केमबांड का 30 दिन का प्रारंभिक टेन्योर समाप्त होने के बाद प्रबंधन ने ठेका समाप्त कर दिया है।
BSP टाउनशिप में फिर गंदे पानी की सप्लाई, नल से आया मटमैले, दूषित पानी लेकर नगर सेवा विभाग पहुंचे लोग
BSP टाउनशिप में फिर गंदे पानी की सप्लाई, नल से आया मटमैले, दूषित पानी लेकर नगर सेवा विभाग पहुंचे लोग
लोगों की सेहत की परवाह छोड़ टेंडर प्रक्रिया पर ध्यान
बताया जाता है कि बीएसपी प्रबंधन अब तीन एजेंसियों के बीच लिमिट टेंडर की तैयारी कर रहा है। शार्ट टेंडर होगा तब भी इसमें महीनेभर लग जाएगा। टेंडर प्रकाशन के बाद सप्ताहभर समय दिया जाएगा। इच्छुक एजेंसियों से पहले टेक्नीकल ऑफर मांगा जाएगा। प्रतिभागी एजेंसियों के एक्सपर्ट इसके लिए पहले बीएसपी के जलशोधन संयंत्र से लेकर रॉ वाटर की पूरी व्यवस्था का अवलोकन करेंगे। टेक्नीकल ऑफर सबमिट होने के बाद फिर कॉमर्शियल ऑफर मंगाएंगे। इसके बाद ही किसी एक एजेंसी को ठेका दिया जाएगा। जब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती प्रबंधन को पानी उपचारित करने की अस्थाई व्यवस्था को जारी रखना था।
गंगरेल से 400 क्यूसेक ही पानी छोड़ा जा रहा
112 किमी दूरी तय कर पहुंचते रहा जाता है 200 क्यूसेक
जल संसाधन विभाग के ईई सुरेश पांडेय ने बताया कि गंगरेल से पूरी क्षमता लगभग 400-500 क्यूसेक ही पानी छोड़ा जा रहा है मगर 112 किमी लंबी नहर का सफर तय करते हुए मरोदा जलाशय में पानी पहुंचते तक यह लगभग 200 क्यूसेक ही रह जाता है। जहां तक कम पानी आपूर्ति की बात है तो पिछले दिनों कुछ एक स्थानों पर नहर में दिक्कत थी। इसकी वजह से 120-125 क्यूसेक ही पानी यहां पहुंच पा रहा था। पांडेय के मुताबिक दो-तीन दिन में 200 क्यूसेक पानी मिलने लगेगा। तांदुंला और खरखरा डेम खाली है इसलिए अभी वहां से पानी नहीं मिल सकेगा।
इन आंकड़ों से समझिए पानी की कहानी
500 क्यूसेक पानी गंगरेल से रोज मांग रहा बीएसपी प्रबंधन।
400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा गंगरेल से जल संसाधन विभाग के मुताबिक।
112 किमी की दूरी गंगरेल से मरोदा तक तय करके यहां पहुंचता है 200 क्यूसेक पानी।
1-1 करोड़ रुपए दो महीने अतिरिक्त खर्च किया बीएसपी प्रबंधन ने।
1.75 लाख आबादी की सेहत पर असर डाल सकता है गंदा पानी।
बड़ा सवाल....
हजारों करोड़ रुपए मुनाफा कमाने वाले सेल व बीएसपी के लिए क्या पौने दो लाख लोगों की जान कोई मायने नहीं रखती। प्रबंधन ने निजी एजेंसी से पानी उपचारित बंद करवा दिया जबकि टेंडर की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है।
बीएसपी प्रबंधन और जिला प्रशासन मेंं तनातनी
टाउनशिप में साफ पानी आपूर्ति को लेकर बीएसपी प्रबंधन और जिला प्रशासन मेंं तनातनी चल रही है। प्रबंधन गंदे पानी के लिए जल संसाधन विभाग पर सारा दोष मढता़ रहा है। पहले कहा कि तांदुला डैम से छोड़ा गया पानी बेहद गंदा, रंगीन और सड़ा हुआ था। सम्पूर्ण रॉ-वाटर गंदा होने के कारण मरोदा जलाशय का पानी गंदा हो गया। उसमें एमएलसीफाइड आर्गेनिक मैटर शामिल था। इसके बाद शासन-प्रशासन से गंगरेल डेम से पानी आपूर्ति करने का आग्रह किया। अब गंगरेल से मिले रहे पानी को अपर्याप्त बताते हुए मरोदा जलाशय में जलस्तर घटने की बात कर रहा है। बीएसपी गंगरेल से रोज 500 क्यूसेक पानी की डिमांड कर रहा है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन कह रहा है कि गंगरेल की नहर पूरी क्षमता के साथ मरोदा टैंक को पानी सप्लाई कर रही है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक मरोदा जलाशय पूर्ण भराव क्षमता का 47 प्रतिशत भरा हुआ है। बीएसपी का जलशोधन संयंत्र ही शुद्ध जल के मानकों में पूरी तरह खरा नहीं उतर रहा है। आधुनिक पैमानों के मुताबिक अपडेट नहीं और काफी पुराना होने की वजह से पानी प्रॉपर उपचारित नहीं हो पा रहा है।

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