छत्तीसगढ़ में एक जुलाई से बसों के संचालन को लेकर संशय बरकरार, कोरोना लॉकडाउन में तीन महीने से थमे हैं बसों के पहिए

साढ़े तीन माह से खड़ी बसे एक जुलाई से सड़कों पर दौड़ेगी यह अब तक तय नहीं हो पाया है। दरअसल सरकार लॉकडाउन समय अवधि का टैक्स मांग रही है, लेकिन बस मालिकों का कहना है कि बसें खड़ी करने का निर्णय उनका नहीं था। (BUS operator in Chhattisgarh)

By: Dakshi Sahu

Published: 30 Jun 2020, 11:36 AM IST

दुर्ग. साढ़े तीन माह से खड़ी बसे एक जुलाई से सड़कों पर दौड़ेगी यह अब तक तय नहीं हो पाया है। दरअसल सरकार लॉकडाउन समय अवधि का टैक्स मांग रही है, लेकिन बस मालिकों का कहना है कि बसें खड़ी करने का निर्णय उनका नहीं था। फिर टैक्स किस बात की। वे पूरे चार माह का टैक्स माफी की मांग कर रहे है। इसी परिपेक्ष्य में सोमवार को परिवहन आयुक्त कमलप्रीत सिंह के साथ बैठक भी थी, लेकिन अधिकारी के नहीं होने से बस मालिक संघ के प्रदेश प्रतिनिधियों को वापस लौटना पड़़ा। (Coronavirus lockdown in chhattisgarh)

खास बात यह है कि जिस बस स्टैंड से हर रोज 50 हजार से अधिक लोग आवाजाही करते थे, वहां आज सन्नाटा पसरा है। बस मालिकों का कहना है कि शहरी क्षेत्र में जब यह स्थिति है तो कस्बा और ग्रामीण अंचल का अनुमान लगाया जा सकता है। सड़कों पर सवारी नहीं है। तीन माह से बसें खड़ी है। इंजन चालू नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में सरकार उनसे केवल दो माह का छूट दे रही है। जबकि चौपट हुए व्यवसाय को दोबारा खड़ी करने के लिए उन्हें पूरे अवधि का टैक्स माफ करना चाहिए। बस मालिक संघ के पदाधिकारियों की सोमवार को परिवहन आयुक्त कमल प्रीत सिंह से चर्चा होनी थी जो नहीं हुई।

इसलिए किराया बढ़ाने की मांग
बस मालिकों का कहना है कि हाल ही में डीजल के दर में 12 रुपए की वृद्धि हुई है। इसकी भरपाई कोई बस मालिक पुराने किराए दर के हिसाब से नहीं कर सकता है। परिवहन मंत्रालय को डीजल के दर के हिसाब से नया किराया तय करना ही होगा, अन्यथा की स्थिति में बसे खड़ी रहेगीं।

नॉन यूज का आशय
अगर 1 जुलाई से बसे चलती है तो केवल 40 प्रतिशत बसें ही चलेगी। यात्री के अभाव में बस चलाना घाटे का सौदा है। इसलिए बस मालिकों का कहना है कि जब तक व्यापार पटरी पर नहीं आता परिवहन विभाग ऐसे बसों को नॅान यूज की श्रेणी में रखे जो ऑन रोड तो है, लेकिन सवारी के अभाव में चल नहीं रही है। जिससे मालिकों को टैक्स न देना पड़े।
सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि बसों के संचालन में फिजिकल डिस्टेंस का पालन किया जाए। इस आदेश का पालन करने पर 40 सीटर बस में केवल 20 सवारी ही बैठाना होगा।

नहीं हुए बस चलाने तैयार
बस मालिकों का कहना है कि यह घाटे का सौदा है। बस को कर्जा लेकर चलाना होगा। एक तरह से वे यात्रियों को मुफ्त सेवा देंगे। बस मालिकों का कहना है कि उदाहरण के तौर पर जगदलपुर बस रवाना करने में 14000 रुपए खर्च आता है। 15 हजार डीजल खर्चा। बचे 4 हजार उसमें अन्य खर्चा। वह भी सवारी फूल होने पर। अगर आधे सवारी को ढोना है तो खर्चा वहन कौन करेगा। वे फिजिकल डिस्टेसिंग में सवारी ढोने से बजाय खड़ी करना उचित होगा। प्रकाश देशलहरा, प्रदेश अध्यक्ष बस मालिक संघ ने बताया कि सोमवार को परिवहन आयुक्त से मुलाकात करने गए थे, लेकिन अधिकारी से मुलाकात नहीं हो पाई। निर्णायक चर्चा होने के बाद ही बस को चलाएगें। अतुल विश्वकर्मा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दुर्ग ने बताया कि एक जुलाई से बस को चलाने मैने बस मालिकों से चर्चा की थी। वर्तमान परिस्थिति में बस चलाने वे तैयार नहीं है।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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