रेलवे में सफर के दौरान आईडी प्रूफ का नो टेंशन, डीजी लॉकर है न

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रबंधन ने यात्रियों की सुविधा लिए डिजिटल (डीजी)लॉकर में अपलोड सॉफ्ट कापी को पहचान पत्र के लिए स्वीकृति दे दी है।

By: Tara Chand Sinha

Published: 20 Jul 2018, 12:50 PM IST

भिलाई. रेलवे में सफर के दौरान पहचान पत्र को संभाल कर रखने का टेंशन नहीं है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रबंधन ने यात्रियों की सुविधा लिए डिजिटल (डीजी)लॉकर में अपलोड सॉफ्ट कापी को पहचान पत्र के लिए स्वीकृति दे दी है। ट्रेन में सफर के दौरान पहचान पत्र की मांग किए जाने पर यात्री अपने मेल आईडी, डिजीटल लॉकर या फिर विभाग के वेबसाइट से ड्राइविंग लाइसेंस या आधार कार्ड को अपलोड कर पहचान पत्र के रूप में प्रस्तुत कर सकता है।

सफर में ओरिजनल को संभाल कर रखने की दिक्कत

रेलवे में सफर के दौरान कई बार जब ओरिजनल आईडी पु्रफ दिखाने की जरूरत पड़ती है। दिखाने के लिए हमारे पास उस वक्त कुछ भी नहीं होता। ऐसे विषम परिस्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे ने इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए डीजी लॉकर की सुविधा को मान्यता दी है।

कानूनी रूप से दी है मान्यता

अगर कोई यात्री अपने डीजी लाकर खाते में लॉग-इन कर विभाग से जारी मूल आधार या ड्राइविंग लाइसेंस को दिखाता है तो इसे पहचान के वैध प्रमाण पत्र के रूप में माना जाएगा । लेकिन यात्री द्वारा स्वयं के मोबाईल, मेल, लैपटाप में अपलोड साफ्ट कापी को पहचान पत्र के रूप में दिखाता है तो उसे वैध प्रमाण के रूप में नहीं माना जाएगा।

जानिए क्या है डीजी लॉकर

भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को क्लाउड आधारित प्लेट फार्म पर अपने कुछ अति महत्वपूर्ण दस्तावेज को सुरक्षित करने की सुविधा दे रखी है। इसी को डिजिटल लॉकर कहा जाता है। डिजिटल लॉकर सरकार की तरफ से संचालित क्लॉउड स्टोरेज सेवा है। जहां लोग अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकते हैं। रेलवे ने अपने सभी जोनल प्रिंसिपल चीफ कॉमर्शियल मैनेजर को औपचारिक संदेश के जरिए डिजिटल लॉकर से सत्यापित दोनों दस्तावेजों (आधार और ड्राइविंग लाइसेंस) को यात्रियों के मान्य पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।

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