डेंगू पीडि़तों की संख्या में दिल्ली को पीछे छोड़ गया हमारा जिला देश की राजधानी दिल्ली की बराबरी पर पहुंए गए

डेंगू पीडि़तों की संख्या में दिल्ली को पीछे छोड़ गया हमारा जिला देश की राजधानी दिल्ली की बराबरी पर पहुंए गए

Tara Chand Sinha | Publish: Sep, 16 2018 12:18:15 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

हमारी लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के कारण अब हमारा जिला डेंगू प्रभावित रूप में देश में पहले नंबर पर गिना जाएगा। डेंगू पीडि़तों और मौत के मामले में हमने देश की राजधानी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है।

भिलाई. हमारी लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के कारण अब हमारा जिला डेंगू प्रभावित रूप में देश में पहले नंबर पर गिना जाएगा। डेंगू पीडि़तों और मौत के मामले में हमने देश की राजधानी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। 2017 में दिल्ली में महामरी फैली थी। तब डेंगू पीडि़त के 4647 केस सामने आए थे। इसकी तुलना में अब तक दुर्ग जिले में 5215 लोग डेंगू की चपेट में आ चुकी है। पीडि़तों का आंकड़ा देश में सर्वाधिक होने की वजह से हमारे शहर का नाम नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) के रिकॉर्ड में पहले क्रम पर दर्ज होगा।

1 अगस्त से 14 सितंबर की स्थिति में जिले के जिला चिकित्सालय दुर्ग, लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय सुपेला सहित 40 शासकीय स्वास्थ्य केन्द्रों में 30518 लोगों की आरडी किट से स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें 5215 डेंगू पाजीटिव मिले हैं। सेक्टर-9 चिकित्सालय में 1901 डेंगू पाजीटिव केस रजिस्टर्ड हुए। इसी तरह निजी मेडिकल कॉलेज, छह निजी अस्पताल में भी लोगों ने जांच कराई। यह आंकड़े इसमें शामिल नहीं है। इन आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो डेंगू पीडि़तों का आंकड़ा 5215 से बढ़कर 7 हजार से अधिक हो जाएगी।

आबादी के रेशियो कम, पीडि़तों की संख्या अधिक

दिल्ली और दुर्ग जिले की जनसंख्खा की तुलना किया जाए। तो जिले की जनसंख्या 17 लाख है। जो कि दिल्ली की जनसंख्या का 10 फीसदी भी नहीं है। दिल्ली की जनसंख्या लगभग दो करोड़ है। क्षेत्रफल भी बड़ा है। इसके बावजूद महामारी को स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को जल्द कंट्रोल कर लिया।

नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम

नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) के आंकड़ों के मुताबिक 13 सितंबर 2017 में देशभर में डेंगू से पीडि़त की संख्या 22,079 और 45 लोगों की मौत हुई थी। इसमें सबसे अधिक 3576 डेंगू पीडि़त कर्नाटक में सामने आई थी। चार लोगों की मौत हुई थी। दूसरे नंबर पर केरल था। यहां डेंगू से 2985 लोग पीडि़त मिले थे। 19 लोगों की मौत हुई थी। तीसरे नंबर पर तमिलनाडू रहे। यहां डेंगू मरीजों की संख्या 2343 थी। जबकि 13 सितंबर 2017 को दिल्ली में 1872 पीडि़त रजिस्टर्ड हुए थे। पांच लोगों की मौत हो चुकी थी। जबकि अकेले नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में 37लोगोंं की मौत हो चुकी है।

लापरवाही ने फैलाया डेंगू

इतना कुछ होने के बावजूद हमने निगम प्रशासन की अपील को नजर अंदाज किया। पानी डालकर कूलर चला रहे हैं। पिछले 45दिनों से जागरूकता अभियान चल रही है। कूलर की सफाई के साथ बिना पानी के कूलर चलाने की अपील की जा रही है। इसके बावजूद हमारे कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ। प्रदेश के अन्य जिले के गांवों से काम के सिलसिले में जो भी भिलाई से आए। यहां से महामारी की चपेट में आ गए। इसी तरह से जिले के पालिक निगम दुर्ग, चरोदा, जामुल, पाटन, धमधा, अहिवारा आसपास के ग्रामीण भी महामारी की चपेट आते चले गए।

लापरवाही के लिए ये हैं जिम्मेदार

्स्वास्थ्य विभाग- जुलाई में जब डेंगू बुखार से लोगों के पीडि़त होने का मामला सामने आया था। सेक्टर-9 और निजी चिकित्यालयों में खुर्सीपार, छावनी, रुआबांधा सेक्टर और मरोदा सहित ६ वार्ड के लोग प्रभावित होने की बात सामने आई थी। तब स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान नहीं दिया। जब फैल गई। तब स्वास्थ्य व्यवस्था की प्लॉन बनाते रहे।


निगम प्रशासन- निगम प्रशासन ने शुरुआत से लापरवाही बरती। निगम ने पूरे एरिया को घेरकर दवा का छिड़काव नहीं किया। जिस घर में मरीज मिले। उसके आसपास के एरिया में दवा का छिड़काव कर छोड़ दिया। खुर्सीपार, छावनी, कैम्प क्षेत्र में फैल गई। तब कूलर का पानी खाली निकले। लार्वा युक्त पानी को सीधे नालियों में बहा दिया। इससे लार्वा फैल गई। मैलाथियान मच्छर के लार्वा को मारने में नाकाम रहा।

बीएसपी- सबसे बड़ी लापरवाही बीएसपी के लोक स्वास्थ्य विभाग ने बरती। सेक्टर-२ और सेक्टर-४ में डेंगू के केस सामने आए। लोग सेक्टर-९ अस्पताल में भर्ती हुए। इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया। पत्रिका में प्रकाशित समाचार को प्रभारी अधिकारी तो मानने से इनकार करते रहे। उनकी लापरवाही की वजह से आज भी स्थिति कंट्रोल से बाहर है।

जिला प्रशासन- लोगों को अभी भी प्रॉपर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली। शासकीय या निजी चिकित्सालयों से जो केस शहर से बाहर के मेडिकल कॉलेज और निजी चिकित्सालयों में रेफर किए गए। उन मरीजों की स्थिति को फॉलोअप पर ध्यान नहीं दिया गया।

25 हजार की आबादी मेंं 1454पीडि़त
25 हजार की आबादी में 1454 डेंगू पीडि़त मिले। सबसे अधिक मौत इसी जोन क्षेत्र से हुई है। जोन-4 खुर्सीपार क्षेत्र में कुल 11 वार्ड आते हैं। इन वार्डों की कुल आबादी लगभग 25 हजार होगी।

 

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