शिवनाथ नदी का पानी रेडियस वॉटर को मुफ्त में बेचा, सीएम से की पूर्व आइएएस के खिलाफ कार्रवाई की मांग

शिवनाथ नदी का पानी रेडियस वॉटर को मुफ्त में बेचा, सीएम से की पूर्व आइएएस के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Tara Chand Sinha | Publish: Jul, 26 2019 12:14:01 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

विधायक देवेंद्र ने पत्र में लिखा है कि रेडियस वाटर की अनुबंध शर्तों में कई प्रकार की गड़बडिय़ां हैं। शिकायत पर विधानसभा की सदन में जांच के लिए लोक लेखा समिति भी गठित की गई थी। समिति ने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया है लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

भिलाई.शिवनाथ नदी का पानी मुफ्त में रेडियस वॉटर प्राइवेट लिमिटेड को बेचने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। रेडियस वॉटर को जिन अनुबंध शर्तों पर नदी का पानी दिया गया, वह ऐसी हैं कि भले ही सूखे के हालात में सिंचाई और पीने के लिए पानी न मिले, लेकिन उसको पानी देना पड़ेगा, वरना कंपनी सरकार से 56 करोड़ रुपए वसूलने की हकदार रहेगी।

शिवनाथ नदी के पानी को औद्योगिक क्षेत्र बोरई में सप्लाई के लिए रेडियस वॉटर को देने का अनुबंध किया गया है। जल संसाधान विभाग के तत्कालीन अफसर ने बोरई जल प्रदाय योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्र बोरई के उद्योगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए रेडियस वाटर के साथ ऐसी शर्तों के साथ अनुबंध किया है कि जिससे शासन के लिए गले की फांस बन गई है। इस मामले में महापौर व विधायक देवेन्द्र यादव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चि_ी लिखी है। इसमें कंपनी के हित में अनुबंध शर्त तैयार कराने का आरोप लगाते हुए पूर्व आइएएस गणेश शंकर मिश्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

सरकार पर निशाना...
विधानसभा की लोक लेखा समिति की अनुशंसा पर भी कार्रवाई नहीं


देवेंद्र ने पत्र में लिखा है कि रेडियस वाटर घोटाले के संबंध में विधानसभा की ओर से गठित लोक लेखा समिति की अनुशंसा के बावजूद रेडियस वाटर घोटाले के दोषी पूर्व आइएएस गणेश शंकरा मिश्रा के विरुद्ध कोई संवैधानिक कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व की सरकार ने संबंधित अधिकारी को संरक्षण देते हुए किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। रेडियस वाटर की अनुबंध शर्तों में कई प्रकार की गड़बडिय़ां हैं। शिकायत पर विधानसभा की सदन में जांच के लिए लोक लेखा समिति भी गठित की गई थी। समिति ने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया है लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तब भाजपा की सरकार थी, अब अधिकारी पर उठा रहे हैं सवाल

जब शिवनाथ नदी के 23.6 किलोमीटर एरिया को निजी कंपनी रेडियस वाटर को मुफ्त में दिया गया तब अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार थी।तब पूर्व आइएस गणेश शंकर मिश्रा तत्कालीन मध्यप्रदेश के औद्योगिक केन्द्र विकास निगम रायपुर के प्रबंध संचालक थे। मिश्रा ने उन्होंने शिवनाथ नदी पर बोरई जल प्रदाय योजना के तहत उद्योगों को पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। शासन के नियम शर्तों की अवहेलना कर निजी कंपनी रेडियस वाटर को लाभ पहुंचाने ऐसी शर्तें तय की गईं जिससे आज शासन के साथ नदी किनारे बसे किसान और उद्योगपतियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनी शिवनाथ नदी के मुफ्त के पानी को उद्योगों को बेचकर कमाई कर रहा है। सरकार चुपचाप बैठी है।

पानी के लिए तरस गए थे किसान...तब आंदोलन करने आए थे
राजेंद्र सिंह व मेधा पाटकर

2003-04 में नदी किनारे के बसे गांव मोहलाई के लोग पानी के लिए तरस गए थे। किसानों को निस्तारी के लिए शिवनाथ का पानी नहीं ले पा रहे थे। कोई किसाने पंप लगाकर पानी खींचने का प्रयास करता था तो उसके मोटर पंप को जब्त कर लेता था। इसके लिए कंपनी सुरक्षा गार्ड और मोटर बोट रखे थे। इसके खिलाफ पहली बार आल इंडिया यूथ फेडरेशन के कॉमरेड चितरंजन बख्शी, शमीम कुरैशी सहित अन्य ने आवाज उठाई। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और राजस्थान के पानी वाले बाबा के नाम से प्रख्यात राजेन्द्र सिंह शिवनाथ बचाओ आंदोलन में शामिल हुए। मामला विधानसभा तक पहुंचा, तब लोक लेखा समिति के सदस्य आए थे। उन्होंने अनुबंध शर्तों को गलत ठहराया था।

ऐसी है शर्तें-

-23.6 किलोमीटर शिवनाथ नदी रेडियस वाटर के अधीन होगा। 10 साल तक कंपनी वाटर मीटर के अनुसार बिल लेगा। बाद में अनुबंध की अवधि में 2020 तक के लिए वृद्धि की गई।

- कंपनी की मांग पर शासन को मोंगरा बैराज राजनांदगांव का पानी शिवनाथ नदी के माध्यम से उपलब्ध कराना होगा। पानी उपलब्ध कराने पर ही कंपनी विभाग को बिल का भुगतान करेगा।

- नदी किनारे के कोई भी उद्योग या किसान सीधे नदी का पानी को पंप से पानी नहीं ले सकता। पानी लेने पर भी 22 रुपए प्रति एक हजार लीटर के हिसाब से बिल भुगतान करना पड़ेगा।
- नदी किनारे के कोई भी उनकी अनुमति के पानी को सिंचाई के लिए उपयोग नहीं कर सकता। पानी का इस्तेमाल करने पर पैसे देने पड़ेंगे।

- बीच में अनुबंध तोडऩे पर राज्य शासन को रेडियस वॉटर प्राइवेट लिमिटेड को 56 करोड़ रुपए देना पड़ेंगे।

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