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Durg छात्रावास में जब नहीं थे बच्चे, तब कहां खर्च हुई खाद्य सामाग्री

जांच करने में टीम को लगा दो दिन.

भिलाई

Updated: January 12, 2022 10:08:21 pm

भिलाई. फरीद नगर के छात्रावास में मार्च 2020 के दौरान जब लॉकडाउन लगा था, तब खर्च का ब्योरा पर नजर डालें तो साफ होता है कि जिस वक्त एक भी छात्र नहीं थे, तब हर दिन एक पैकेट नमक खर्च हो रहा था। नमक के साथ-साथ पांच हजार रुपए की दाल और 1441 रुपए के बिस्किट भी चट हो गए। इसकी खबर पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तब जिला प्रशासन ने तीन सदस्यों की जांच टीम गठित कर भेजा। दो दिन जांच करने के बाद टीम लौट गई है। जांच टीम में प्रभारी डीएमसी सुरेंद्र पाण्डेय, डीपीओ अभय जयसवाल एवं एक अन्य शामिल थे, उन्होने अब तक प्रतिवेदन में क्या लिखा है उसका खुलासा नहीं किया है।

Durg छात्रावास में जब नहीं थे बच्चे, तब कहां खर्च हुई खाद्य सामाग्री
Durg छात्रावास में जब नहीं थे बच्चे, तब कहां खर्च हुई खाद्य सामाग्री

कौन उड़ा रहा बिन मां-बाप के बच्चों का राशन
छात्रावास में कोरोनाकाल के समय मार्च 2020 में जब कोई नहीं था, उस दौरान एक माह में करीब 30 हजार रुपए से अधिक के सामान खरीदे गए। इतना ही नहीं इस दौरान कई सिलेंडर भी भराए गए। जब बच्चे थे ही नहीं तब एक माह में इतने सिलेंडर कैसे खत्म हो रहे थे। यह सवाल उठना लाजमी है। जांच कमेटी ने सबकुछ देख लिया है। बावजूद इसके अब उनके सामने बड़ा सवाल यह है कि यह किसने किया और किसके कहने पर।

दोनों छात्रावास में जांच करने की जरूरत
जिला में दो छात्रावास है। एक का संचालन करने के लिए शासन से करीब 20 लाख रुपए आता है। पिछले दस साल में कितने बच्चे रह रहे थे और उनकी उम्र क्या थी। बच्चे जो रह रहे थे उस उम्र के बच्चों को रखने की अनुमति है क्या। जिनको जरूरत है उनको छोड़ किस तरह से अधिक उम्र के बच्चों को छात्रावास में रखा जा रहा था। इसके एवज में क्या पालकों से किसी तरह से लाभ लिया गया। यह जांच का विषय है। विभाग ने अब तक एक छात्रावास में जांच किया है तब यह खामियां सामने आ रही है। जब दोनों का जांच करेंगे, तब और नई बातें सुनने को मिल सकती है।

कम्प्यूटर दोनों ही जगह से है गायब
संजीवनी बालिका आवासीय छात्रावास, दुर्ग में शिक्षा हांसिल कर रहे बच्चों की कम्प्यूटर से संबंधित शिक्षा के लिए केंद्रीय सरकार के उपक्रम एफएसएनएल, भिलाई ने चार-चार कम्प्यूटर सेट उपलब्ध करवाया था। यह सारे कम्प्यूटर कहां है इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल रह है। जिससे बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

रिकवरी को लेकर उठ रहे सवाल
अब सवाल उठ रहा है कि अगर जांच में खामियां पकड़ी जाती है, तब रिकवरी किससे की जाएगी। सामग्री खरीदी करने के बाद बिल कहां भेजा जाता है। बिल को पास करने के दौरान देखा नहीं जाता या नजर अंदाज किया जा रहा है। खरीदी करने वाले से पूछ-ताछ होने से साफ हो जाएगा कि कौन-कौन इसमें शामिल हैं। इससे बच्चों का राशन हजम करने वालों से रिकवरी आराम से की जा सकेगी। छात्रावास का जायजा लेने के लिए जिसकी जिम्मेदारी तय की गई है, वे आते हैं तो उनको यह खामियां क्यों नजर नहीं आ रही थी।

जांच प्रतिवेदन का अभी नहीं किए हैं खुलासा
सुरेंद्र पाण्डेय, प्रभारी डीएमसी, दुर्ग ने बताया कि छात्रावास का जांच करके टीम लौट चुकी है। अभी जांच प्रतिवेदन का खुलासा नहीं किए हैं। खुलासा करने पर जानकारी दी जाएगी।

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