रक्षाबंधन में इस बार नहीं पड़ेगा भद्राकाल, किसी भी समय भाई के कलाई पर राखी बांध सकती है बहनें, बन रहें कई शुभ संयोग

Raksha bandhan 2021: रक्षाबंधन को लेकर भद्राकाल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखा जाता है। भद्राकाल और राहुकाल में राखी नहीं बांधी जाती है क्योंकि इन काल में शुभ कार्य वर्जित है।

By: Dakshi Sahu

Updated: 21 Aug 2021, 06:01 PM IST

भिलाई. रक्षाबंधन को लेकर भद्राकाल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखा जाता है। भद्राकाल और राहुकाल में राखी नहीं बांधी जाती है क्योंकि इन काल में शुभ कार्य वर्जित है। इस साल बहुत हर्षोल्लास की बात है कि रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं रहेगी। भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन दिनभर मनाया जाएगा। बहनें किसी भी वक्त भाई की कलाई में राखी बांध सकती है। इस वर्ष रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन संयोग को बेहद शुभ माना गया है। ये संयोग भाई-बहन के लिए बहुत शुभ साबित होंगे। इस साल रक्षाबंधन 22 अगस्त दिन रविवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर शोभन योग बन रहा है। 22 अगस्त की सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक शोभन योग रहेगा। ये योग मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस योग के दौरान की गई यात्रा बहुत कल्याणकारी साबित होती है। इस बार भद्राकाल न होने की वजह से दिनभर में किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है।

माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी थी राखी
शास्त्रों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई कथाओं का वर्णन है, पर इनमें से राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पाताल लोक में राजा बलि के यहां बंदी बने हुए देवताओं की मुक्ति के लिए माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधी थी। राजा बलि ने अपनी बहन माता लक्ष्मी को भेंट स्वरूप देवताओं को मुक्त करने का वचन दिया था। हालांकि, राजा बलि ने देवताओं को मुक्त करने के लिए ये शर्त भी रखी थी कि देवताओं को साल के चार महीने इसी तरह कैद में रहना होगा। इसलिए सभी देवता आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी यानी चार महीने तक पाताल लोक में निवास करते हैं। इस दौरान मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है।

भगवान को बांधी जाती है पहली राखी
आज भी हिंदू परिवार में रक्षाबंधन के दिन पहली राखी अपने इष्ट देव को बांधने की परंपरा है। रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के लिए एक थाली में रोली, चन्दन, अक्षत, दही, राखी, मिठाई और घी का एक दीपक रखकर पूजा की थाली को सबसे पहले भगवान को समर्पित किया जाता है। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाया जाता है। पहले भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है फिर रक्षासूत्र बांधकर आरती करते हैं। इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की लंबी आयु की मंगल कामना बहनें करती है।

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