संगठन और आयोग में किसी एक को चुनना होगा तुलसी को, CM के गृह जिले में सत्ता और संगठन के शीर्ष नेताओं में शह-मात का खेल

तुलसी को भिलाई शहर जिला कांग्रेस की अध्यक्ष और महिला आयोग की सदस्य में से किसी एक पद को चुनना होगा।

By: Dakshi Sahu

Published: 01 Aug 2021, 12:35 PM IST

भिलाई. शहर में कांग्रेस का सियासी पारा इन दिनों गर्म है। यहां सत्ता और संगठन के शीर्ष नेताओं में शह-मात का खेल खूब चल रहा है। सियासी तौर पर एक-दूसरे से निपटने-निपटाने की यह आंच अब भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष तुलसी साहू की कुर्सी तक पहुंच चुकी है। तुलसी को भिलाई शहर जिला कांग्रेस की अध्यक्ष और महिला आयोग की सदस्य में से किसी एक पद को चुनना होगा। राजनीतिक जानकारों की मानें तो तुलसी को महिला आयोग की सदस्य बनाने का तात्पर्य ही यही है कि कैसे भी हो, उन्हें संगठन की सक्रिय राजनीति से दूर किया जाए।

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तुलसी को कांग्रेस संगठन में कामकाज का 30 साल का अनुभव है। गुटबाजी से दूर कांग्रेस की जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान है। वे अविभाजित दुर्ग जिले में डौंडी से नवागढ़ तक दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण में महामंत्री जैसे पद पर रहीं। पार्टी प्रवक्ता की भी जिम्मेदारी बखूबी संभाली। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव रहते बेमेतरा क्षेत्र की प्रभारी रहीं। इसके बाद उन्हें दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण का अध्यक्ष और इससे टूटकर बने स्वतंत्र भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी की पहली अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी शीर्ष संगठन ने सौंपी।

पद नहीं, सियासी ठिकाना लगाने की रणनीति
संगठन में वर्चस्व की जंग के चलते ही तुलसी एक साल तक अपनी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं कर पाई थी। आखिर में उन्हें स्थानीय वरिष्ठ नेताओं की ओर से सुझाए गए सभी नाम को अपनी टीम में शामिल करते लगभग 250 पदाधिाकारियों व सदस्यों वाली जंबो कार्यकारिणी की घोषणा करनी पड़ी। लगभग डेढ़ साल से तुलसी भिलाई जिला संगठन की जिम्मेदारी बखूबी निभाती आ रही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महिला आयोग की सदस्य दरअसल पद का पुरस्कार नहीं, सियासी तौर पर उन्हें ठिकाना लगाने की रणनीति है।

वकालत का पेशा भी छोडऩा पड़ जाएगा
तुलसी संगठन और महिला आयोग की सदस्य में से अगर आयोग को चुनती हैं तो उन्हें वकालत से भी तौबा करना होगा। महिला आयोग की सदस्य संवैधानिक पद है। वकालत करते हुए इस पद पर नहीं रहा जा सकता। इसके लिए उन्हेें अपनी वकालत का लाइसेंस सस्पेंड भी कराना होगा। यह तुलसी के लिए व्यक्तिगत तौर पर मुश्किल हो सकता है क्योंकि अकेले रहने वाली तुलसी का जीविकोपार्जन का जरिया यह वकालत ही है। यह उनकी साख व अस्तिमा से भी जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के अविभाजित जिला संगठन में वे पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में वकालत के साथ-साथ पूरी तन्मयता से जुड़ी रहती थीं। तुलसी साहू, अध्यक्ष भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने कहा कि मुख्यमंत्री और पार्टी संगठन के सभी वरिष्ठ नेताओं का मैं हृदय से आभार मानती हैं जिन्होंने मुझे महिला आयोग की सदस्य केकाबिल समझा और यह सम्मान दिया। मैंने अपनी भावनाओं से संगठन को अवगत करा दिया है। मैं कांग्रेस की सच्ची सिपाही हंू। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी पूरी निष्ठा से निर्वाह करती रहंूगी।

Dakshi Sahu
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