भिलाई में लॉकडाउन के दौरान दो दिवसीय भूख हड़ताल

पुलिसिया बर्बरा की कड़ी निंदा.

By: Abdul Salam

Published: 18 Apr 2020, 09:27 PM IST

भिलाई. प्रवासी श्रमिकों की बदहाली और भूख से हो रही मौतों के मद्देनजर भाकपा, माले, एक्टू ने राष्ट्र व्यापी आह्वान पर शनिवार व रविवार को भूख हड़ताल करने का फैसला किया। पूर्ण लॉकडाउन में वे अपने-अपने घर पर ही प्रदर्शन किए। बीएसपी में एक्टू के नेता श्याम लाल साहू ने बताया कि इस भूख हड़ताल का मकसद केंद्र व राज्य सरकारों से प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण करने मांग करना है। उन्होंने कहा कि ऐक्टू नेताओं ने भी अपने घरों में ही दो दिवसीय भूख हड़ताल जारी रखी है। माले व ऐक्टू नेताओं ने प्रवासी श्रमिकों की इस हालत के लिए सीधे केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

पुलिसिया बर्बरा की कड़ी निंदा

वहीं राज्य सरकारों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रवासी श्रमिकों के गुस्से को वास्तविक और जायज बताया। सरकार की बदइंतजामी के चलते भूख व बदहाली से व्यथित प्रवासी श्रमिकों पर पुलिसिया बर्बरा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जा रहा है। वह भूखे ही अपने गांव के लिए पैदल निकल पड़ा है। इसमें उसकी गलती क्या है। न उसे दो वक्त की रोटी मिल रही है न रोजगार.

यह की मांग
एक्टू ने प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष कार्ययोजना घोषित करें। उनके घर वापसी के लिए मुफ्त विशेष परिवहन की व्यवस्था करें। प्रवासी मजदूरों को दस हजार रुपए का लॉकडाउन भत्ते का भुगतान किया जाए। प्रवासी मजदूरों की नौकरी व वेतन की गारंटी करें। मजदूरों के वेतन में कटौती व छटनी न हो। उनके लिए घर वापसी तक राशन, भोजन की होम डिलीवरी और स्वच्छ आश्रय की व्यवस्था करें।

बदइंतज़ामी के चलते देश भर के असहाय प्रवासी

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन व बदइंतज़ामी के चलते आज देश भर के असहाय प्रवासी श्रमिकों के दुखों का कोई अंत नहीं है। इस दुख को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को 3 मई 2020 तक बढ़ाकर और भी बढ़ा दिया है। इसने गरीब मजदूरों को उचित आश्रयों व स्वच्छता के बिना दयनीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर कर दिया है।

भूखमरी की कग़ार पर

यही नहीं, केंद्र व राज्य सरकारों की आपराधिक उदासीनता के कारण आज वे भूखमरी की कग़ार पर हैं। इन प्रवासी मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर स्वतः फैल रहा है. जिसे पुलिस की क्रूरता से दबाया जा रहा है। न्यायसंगत असंतोष के लिए कोरोना महामारी के भयावह समय में सहानुभूतिपूर्वक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जगह राज्यतंत्र के दमनकारी रवैय्ये से इसे दबाया जा रहा है।

नियमों का कहीं पालन नहीं

जबकि सरकार की श्रमिकों के लिए घोषणाओं– वैतनिक अवकाश, कोई छxटनी नहीं करने व मजदूरी में कोई कटौती नहीं करने आदि नियमों का कहीं पालन नहीं हो रहा है। उल्टे सरकार श्रमिकों के अधिकारों को छीनने के लिए महामारी के संकट का भी उपयोग करने की कोशिश कर रही है, जो 12 घंटे काम के प्रस्ताव में देखा जा सकता है।

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Abdul Salam Reporting
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