इस दुर्गा पंडाल में है अनोखी परंपरा, 37 सालों से रोज बदलता है माता का श्रृंगार, 7 घंटे खड़े रहकर पेंटर बदलता है चुनरी

Navratri 2021: पेंटर हेमंत कुमार मानिकपुरी रोजाना 7 घंटे लगातार खड़े रहकर माता की चुनरी का रंग बदलते हैं। 64 वर्षीय हेमंत की माता के प्रति आस्था और उसकी लगन को देख हर कोई उसकी कला का कायल हो जाता है।

 

By: Dakshi Sahu

Published: 11 Oct 2021, 11:44 AM IST

भिलाई. आमतौर पर दुर्गा पंडालों में माता जगदम्बा की प्रतिमा को लाल, पीली, गुलाबी, काली साड़ी में भक्तों ने देखा होगा, लेकिन दुर्ग के सत्तीचौरा दुर्गा पंडाल में माता की चुनरी का रंग रोज बदलता है। हर दिन माता अलग ही श्रृंगार में नजर आती है। देखने वालों को भी आश्चर्य होता है कि जिस मूर्ति को कल उन्होंने गुलाबी रंग की साड़ी पहने देखा था वह आज जामुनी रंग की साड़ी में नजर आ रही है। माता का श्रृंगार यूं तो हर पंडालों में होता है,लेकिन माता की प्रतिमा का रोजाना रंगरोंगन कर उनकी चुनरी का रंग बदलना हर किसी के वश की नहीं। सत्तीचौरा में करीब 37 सालों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां पेंटर हेमंत कुमार मानिकपुरी रोजाना 7 घंटे लगातार खड़े रहकर माता की चुनरी का रंग बदलते हैं। 64 वर्षीय हेमंत की माता के प्रति आस्था और उसकी लगन को देख हर कोई उसकी कला का कायल हो जाता है।

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लाइट से डार्क कलर का संयोजन
हेमंत ने बताया कि यह इकलौता पंडाल है, जहां माता की 18 भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित की जाती है। वे इस पंडाल से 40 साल पहले जुड़े थे। शुरुआती तीन साल तो वे केवल उस वक्त के कच्चे मंच की रंगाई-पोताई किया करते थे। पहले साल उन्होंने समिति के सामने माता की प्रतिमा की चुनरी का रंग बदलने की इच्छा जताई। शुरुआत में सभी को विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा रोज कैसे संभव होगा, क्योंकि आइल पेंट या दूसरे किसी भी कलर को रोजाना बदलना संभव नहीं है। फिर उन्होंने समिति के सामने प्रस्ताव रखा कि वे रोजाना वाटरकलर से माता की चुनरी का रंग बदल सकते हैं और इसे सूखने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। समिति के लोगों ने भी विश्वास जताया और उन्होंने माता के श्रृंगार को रोज बदलने की जिम्मेदारी संभाली।

कन्याओं को ओढ़ाते हैं 108 फीट लंबी चुनरी
मंदिर समिति के अध्यक्ष बंटी शर्मा ने बताया कि सत्तीचौरा मंदिर में सबसे बड़ा कन्या पूजन होता है। हर वर्ष यहां नवमी के दिन करीब 5 हजार बेटियों का पूजन कर उन्हें भोजन कराया जाता है, लेकिन इस बार कोविड के कारण रोजाना यहां 108 कन्याओं का पूजन किया जा रहा है। रोजाना 108 फीट लंबी चुनरी को ओढ़ाकर पहले कन्याओं की शोभायात्रा निकाली जाती है और फिर मंदिर में पूजन के बाद उन्हें भोजन कराया जाता है।

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