OMG मां को लेकर 6 घंटे भटकते रहा, नहीं मिला किसी अस्पताल में दाखिला, एम्स से लौटते समय टूटी जीवन की डोर

आधा दर्जन अस्पताल का लगाए चक्कर.

By: Abdul Salam

Published: 10 Apr 2021, 11:31 PM IST

भिलाई. डबरापार, भिलाई-तीन में रहने वाले मोतीलाल देवांगन ने अपनी मां गीता देवांगन 60 साल को गुरुवार की दोपहर ४ बजे निजी वाहन कर अस्पताल में दाखिल करने लेकर निकले। तब उनको इस बात का अंदेशा नहीं था कि किसी अस्पताल में दाखिला नहीं मिलेगा और वापस मां की लाश लेकर उनको घर जाना पड़ेगा। वे करीब 6 घंटे तक दुर्ग से लेकर राजधानी तक चक्कर काटे, किसी अस्पताल ने मरीज को दाखिल नहीं किया। अंत में एम्स, रायपुर से जब उनको लौटा दिए तो रास्ते में बुजुर्ग मां ने दम तोड़ दिया।

आधा दर्जन अस्पताल का लगाए चक्कर
मरीज को लेकर परिवार के सदस्य चार बजे घर से निकले। मोती लाल देवांगन ने बताया कि वे सबसे पहले खुर्सीपार के गिदोड़ी देवी अस्पताल गए। वहां मरीज की जांच कर बताया गया कि बीपी लो है उनके पास आईसीयू वगैरह की व्यवस्था नहीं है। दूसरे अस्पताल लेकर चले जाओ। वहां से वे सीधे शंकराचार्य अस्पताल, जुनवानी पहुंचे। जहां पर्ची बनाए तो बीपी चेक किया डॉक्टर ने बोला कि बेड खाली नहीं है। तब वहां से निकलकर महिमा अस्पताल गए। वहां बताए कि कोविड सेंटर नहीं है लक्षण कोरोना जैसे हैं। इस लिए दाखिल नहीं कर सकते। एसआर अस्पताल, चिखली ले जाओ वहां जांच भी हो जाएगा और कोरोना अस्पताल भी है। एसआर अस्पताल लेकर गए तो वहां काउंटर में बताया कि कोविड जांच नहीं होगा। बिना जांच वाले मरीज को नहीं ले सकते। इस तरह से वहां से भी लौटना पड़ा।

आखिरी सफर के लिए निकले
बेटा ने बताया कि इसके बाद संजीवनी अस्पताल, सिरसा गेट, भिलाई-तीन पहुंचे। जहां डॉक्टर ने देखकर कहा कि मरीज की हालत खराब होते जा रही है। इसे जल्द बड़े अस्पताल लेकर जाओ। तब सन एण्ड साइन अस्पताल, पदुम नगर लेकर गए। वहां बोला कि बेड नहीं है। भिलाई तीन के सरकारी अस्पताल गए तो पता चला कि रात 8.30 बजे कोई नहीं है। वहां डॉक्टर नहीं मिला। तब वहां से एम्स, रायपुर के लिए रवाना हुए। रात करीब 9.30 बजे एम्स, रायपुर पहुंचे। वहां मरीज को देखकर बाहर काउंटर में मौजूद ने कहा कि मरीज का हालत खराब है बेड और ऑक्सीजन नहीं है। मेकाहारा लेकर जाओ। यह सुनकर परिवार निराश हो गया और घर की ओर लौट गए रास्ते में टाटीबंद के पास रात करीब 10 बजे मां ने दम तोड़ दिया। परिवार इस बात से बेहद दुखी है कि कम से कम इलाज कराते हुए उनकी मौत होती। बिना इलाज के आंख के सामने तमाम अस्पताल घूमने के बाद भी मां का इलाज नहीं करवा पाए।

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