क्या हुआ वन नेशन-वन टैक्स पॉलिसी का, दो फीसदी मंडी टैक्स की वजह से फिर बढ़ेगी महंगाई

छत्तीसगढ़ शासन कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने मंडी शुल्क में फिर वृद्धि कर दी है। अब थोक अनाज व्यापारियों को आयातित अधिसूचित कृषि उपजों (आयातित सामग्रियों) पर ०.५० की जगह फिर से २ प्रतिशत की दर से मंडी शुल्क का भुगतान करना होगा।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 29 Mar 2019, 11:31 AM IST

भिलाई@Patrika. छत्तीसगढ़ शासन कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने मंडी शुल्क में फिर वृद्धि कर दी है। अब थोक अनाज व्यापारियों को आयातित अधिसूचित कृषि उपजों (आयातित सामग्रियों) पर 0.50 की जगह फिर से २ प्रतिशत की दर से मंडी शुल्क का भुगतान करना होगा। इससे सभी प्रकार के अनाजों एवं दालों की कीमत में प्रति किलो लगभग तीन रुपए तक की अतिरिक्त वृद्धि हो जाएगी। इसका सीधा भार आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

जीएसटी के बाद मंडी शुल्क लेना अवैधानिक
दुर्ग- भिलाई अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप खंडेलवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने १३ अप्रैल २०१८ को जारी अपने आदेश में राज्य के बाहर से आयातित अनाज एवं दालों चना, उड़द, मूंग, तुअर (अरहर), मसूर, मटर, मक्का, बाजरी, गेहंू आदि पर मंडी शुल्क १०० रुपए की कीमत पर 50 पैसे 31 मार्च २०१९ तक के लिए निर्धारित की थी, जिसकी अवधि समाप्त होने वाली है। @Patrika. अब अप्रैल २०१९ से फिर राज्य के बाहर से आयातित कृषि उपजों की कीमत के प्रत्येक 100 रुपए पर दो रुपए की दर से मंडी शुल्क वसूल करने का फरमान प्रदेश सरकार ने जारी कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि कि जीएसटी के बाद मंडी शुल्क लेना अवैधानिक है। इसे पूर्ण रूप से खत्म किया जाना चाहिए।

मंडी शुल्क वसूलने का यह होगा असर
सभी प्रकार के अनाजों की कीमत में 3 प्रतिशत तक की मूल्य वृद्धि हो जाएगी।
प्रतिस्पर्धा बढऩे से व्यापारियों में मनमुटाव बढ़ेगा।
व्यापारियों का साफ कहना है कि इससे कच्चे में व्यापार अधिक होगा।
भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। यहां मंडी वाले लेन-देन कर कम शुल्क लेकर निपटारा कर देते हैं।

क्या है मंडी शुल्क
राज्य अपने यहां उत्पादित अनाजों के मंडी से बाहर जाने पर शुल्क वसूल करता है। इसमें 2 प्रतिशत मंडी शुल्क और ०.२ प्रतिशत निराश्रित शुल्क कुल २.२ प्रतिशत शुल्क वसूल किया जाता है।

जीएसटी के बाद मंडी शुल्क क्यों
जीएसटी लागू करते समय कहा गया था एक देश, एक शुल्क। जबकि मंडी शुल्क दो बार वसूल किया जा रहा है। पहले जिस प्रांत में अनाज व दलहन का उत्पादन होता है वहां, फिर यहां आने के बाद छत्तीसगढ़ शासन व्यापारियों पर दोबारा शुल्क थोप दे रहा है। @Patrika.व्यापारियों का कहना है जहां उत्पादन हो रहा है वहां शुल्क लेना ठीक है, लेकिन यहां अपने राज्य की मंडी की कोई भूमिका ही नहीं है तो शुल्क किस बात का? वैसे भी आम आदमी की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने नान ब्रांड अनाजों को जीएसटी से मुक्त रखा है। कायदे से तो शुल्क लगना ही नहीं चाहिए।

मंडी शुल्क से छुटकारा चाहते हैं व्यापारी
खंडेलवाल का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अनाज व दाल की खपत का ९० फीसदी दूसरे प्रांतों से आयातित करते हैं। वहां मंडी शुल् वसूल लिया जाता है। हर साल व्यापारी शासन से गुहार लगाते हैं और एक वर्ष तक रियायत दे दी जाती है। @Patrika.बाद में फिर से अधिसूचना जारी कर बढ़ा दिया जाता है। यह छूट एक वर्ष के लिए न होकर हमेशा के लिए हो। वैसे भी यह अवैधानिक है।

सरकार का दोहरा मापदंड
दाल मिलर्स और फ्लोर मिलर्स को बाहर से प्रसंस्करण के लिए आयातित दलहन व गेंहू पर मंडी शुल्क पूर्णत: छूट प्रदान की जाती रही हैं। @Patrika.वहीं ट्रेडर्स जो सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेचते हैं उनसे मंडी शुल्क लिया जाता रहा है।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned