scriptWhere will 7 billion rupees come from in Bhilai Municipal Corporation | महापौर जी आपकी सोच अच्छी, नीयत में भी शक नहीं, मगर कहां से लाएंगे 7 अरब रुपए | Patrika News

महापौर जी आपकी सोच अच्छी, नीयत में भी शक नहीं, मगर कहां से लाएंगे 7 अरब रुपए

66 करोड़ की देनदारी, खजाने में कुल जमा 25 लाख
फिर भी ख्वाब पूरे भिलाई को चमन बना देने का

भिलाई

Updated: April 01, 2022 03:24:19 pm

निर्मल साहू
Bhilai News भिलाई. नगर पालिक निगम भिलाई के महापौर नीरज पाल ने बुधवार को 7 अरब 12 करोड़ 81 लाख 48 हजार रुपए व्यय का बजट पेश किया। 7 अरब 22 करोड़ 76 लाख 36 हजार रुपए आय का अनुमान लगाया गया है। अपने 25 मिनट के बजट अभिभाषण में शहरवासियों को कई बड़े ख्वाब दिखाए। मसलन भिलाई को कॉमर्शियल हब के रूप में विकसित करने, प्रदूषणमुक्त शहर और सिविक सेंटर को नया लुक देने का वादा किया है। महापौर की सोच अच्छी है, नीयत में भी शक नहीं, मगर नगर निगम की अब तक की वित्तीय स्थितियों और पिछले पांच साल के बजट के आंकड़ों से शहरवासियों के जेहन में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर महापौर 7 अरब रुपए लाएंगे कहां से? जबकि निगम के खजाने में अभी वर्तमान में कुल जमा 25 लाख रुपए (15 करोड़ संचित निधि को छोड़कर) है और लगभग 66 करोड़ की देनदारी है।
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं---
1. शासन से मिले अनुदान का 33 फीसदी भी खर्च नहीं कर पाए
1 अप्रैल 2021 को प्रारंभिक अवेशष के रूप में 150 करोड़ 10 लाख 46 हजार रुपए शेष थे। वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रतिवेदन माह यानि जनवरी 2022 तक 118 करोड़ 89 लाख 38 हजार यानि कुल 268 करोड़ 93 लाख 53 हजार रुपए निगम के पास थे। इनमें से 98 करोड़ 83 लाख 55 हजार ही खर्च कर पाए। 172 करोड़ 67 लाख 60 हजार रुपए बच गए। जबकि शहर में कई विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की दरकार थी।
2. निकाय मद में मात्र 25 लाख रुपए जमा है
निगम ने बीते वित्तीय वर्ष 2021-22 में 48 करोड ़51 लाख 8 हजार स्वयं का राजस्व जुटाया। 7 करोड़ 96 लाख 51 हजार रुपए वर्ष 2020-21 के बचे थे। कुल 56 करोड़ 47 लाख 59 हजार रुपए थे। इनमें 56 करोड़ 22 लाख 9 हजार रुपए खर्च किए। अब खाते में 25 लाख 50 हजार रुपए ही बचे हैं। यही निगम की मूल निधि है, जिसे वे मनमाफिक खर्च कर सकते हैं। शासन से ऋण स्वरूप अनुदान और ब्याज मद में तो एक पाई भी नहीं मिला।
3. वेतन के लिए भी पैसे नहीं, संचित निधि से बांट रहे
निगम अपने कर्मियों को वेतन भी नहीं दे पा रहा है। प्लेसमेंट के कर्मियों को तनख्वाह संचित निधि से बांट रहा है। 2021 और 2022 को मिलाकर संचित निधि में 23.34 करोड़ रुपए जमा थे। इनमें से 9.69 करोड़ खर्च कर चुके हैं। अब 14.84 करोड़ रुपए शेष है। यह राशि सदन की अनुमति से केवल कर्मियों की तनख्वाह आदि अनिवार्य जरूरतों पर ही खर्च की जा सकती है। विकास कार्यों में इस पैसे का उपयोग नहीं कर सकते।
4. 66 करोड़ लंबित देनदारियां है
तीन महीने पहले यानि 31 जनवरी 2022 की स्थिति में निगम पर 65.76 करोड़ की देनदारियां बकाया हैं। नियमित कर्मियों को जीपीएफ व सीपीएफ का भुगतान निगम नहीं कर पाया है। करीब 44 लाख रुपए देना है। प्लेसमेंट कर्मियोंं का वेतन 2 करोड़ रुपए भी लंबित है। 48 करोड़ रुपए बिजली बिल का भुगतान निगम ने नहीं किया है। और 14 करोड़ रुपए ठेकेदारों को भुगतान किया जाना है।
महापौर जी आपकी सोच अच्छी, नीयत में भी शक नहीं, मगर कहां से लाएंगे 7 अरब रुपए
महापौर जी आपकी सोच अच्छी, नीयत में भी शक नहीं, मगर कहां से लाएंगे 7 अरब रुपए
सबसे बड़ा सवाल: निगम की आय अचानक ढाई गुना कैसे बढ़ जाएगी
निगम के पांच साल के आय और व्यय के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2019-20 में 3.97 अरब रुपए अधिक आय और सबसे अधिक व्यय भी 3.60 अरब रुपए हुए हैं। 2022-23 में ऐसा क्या चमत्कार हो जाएगा कि निगम की आय बीते वर्ष 2021-22 की आय 2.77 अरब से ढाई गुना से भी अधिक एकमुश्त 7.22 अरब रुपए की वृद्धि हो जाएगी।
जरा इन आंकड़ों पर गौर कर सपने और हकीकत में अंतर को समझें
वर्ष- आय - व्यय
अनुमानित/ संशोधित अनुमानित/ संशोधित
2017-18= 3.14/3.39 5.67/3.02
2018-19- 4.62/3.37 5.21/3.24
2019-20- 4.73/3.97 5.43/3.60
2020-21- 5.32/2.73 3.64/3.26
2021-22- 3.62/2.77 5.67/3.02
2022-23- 7.22 7.12
(राशि करोड़ में )
आय के अनुमानित स्रोत
चुंगी क्षतिपूर्ति, वाणिज्य कर, मुद्रांक शुल्क, उत्पाद शुल्क आदि- 24.45 करोड़ (6 प्रतिशत)
संपत्ति का प्राप्त भाड़ा- 38 करोड़ (9 प्रतिशत)
विभिन्न टैक्स- 55 करोड़ (13 प्रतिशत)
शुल्क- 22 करोड़ (5 प्रतिशत)
जुर्माना- 2.25 करोड़ (1 प्रतिशत)
क्षतिपूर्ति- 2.15 करोड़ (1 प्रतिशत)
शासन से अनुदान 251 करोड़ (61 प्रतिशत)
जमा राशि पर ब्याज- 3 करोड़ (1 प्रतिशत)
अन्य प्राप्तियां- 13 करोड़ (3 प्रतिशत)
शहर के विकास के लिए झोली फैलाना पड़े तो भी संकोच नहीं करूंगा
निगम के स्वयं के आय का स्रोत और संसाधन सीमित होते हैं। शासन के अनुदान से ही विकास कार्य होते हैं। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो पूरे देश में हर नगरीय निकाय की यही स्थिति है। राज्य व केंद्र सरकार हमारा पालक है। पैसे नहीं है, तो अपने पालक से मांगने में झिझक क्यों?अगर मेरे शहर के विकास और जनता की बेहतरी के लिए शासन के समक्ष झोली भी फैलाना पड़े तो संकोच नहीं करूंगा। जनता ने हमें उम्मीदों के साथ इसीलिए चुना है। अगर हम सोचेंगे नहीं, प्रस्ताव नहीं बनाएंगे तो पैसा कैसे मिलेगा। आयुक्त ने तो 5.33 अरब आय और 5.23 अरब व्यय का बजट प्रस्तुत किया था। सभी 70 वार्ड पार्षदों की मांगें और सुझाव को ज्यों की त्यों स्वीकाार करते हुए हमने 7 अरब का बजट बनाया। शासन से हर काम के लिए पैसा मांगेंगे जितना मिलेगा उससे काम करेंगे।
नीरज पाल, महापौर नगर निगम भिलाई

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