पहली बार फल और सब्जियों के बीज से महिलाओं ने तैयार किया स्पेशल राखी, कलाई से गिरी तो जमीन में उगेंगे पौधे

Eco Friendly Rakhi: चाइनीज राखियों को अलविदा कह अब शहर के लोगों को इको फ्रेंडली और स्थानीय महिलाओं की बनाई राखियां भा रही है।

By: Dakshi Sahu

Published: 12 Jul 2021, 01:39 PM IST

भिलाई. चाइनीज राखियों को अलविदा कह अब शहर के लोगों को इको फ्रेंडली और स्थानीय महिलाओं की बनाई राखियां भा रही है। भिलाई शहर में इन दिनों कई स्वसहायता समूह राखियां बना रहे हैं। पर रिसाली के एकता समूह की महिलाओं की बनाई राखी अपने आप में अलग है। इस बार महिलाओं ने मांगलिक राखियों के साथ ही फलों और सब्जियों के बीज से राखियां तैयार की है। रक्षाबंधन के बाद यदि कोई इन राखियों को मिट्टी में दबा दे या फिर यह राखी मिट्टी में गिर जाए तो इससे पौधे उग आएंगे। समूह की संरक्षक ललिता सिंह ने बताया कि इनमें छोटे-छोटे बीजों का उपयोग किया गया है, ताकि लोग इसे गमले या गार्डन में भी दबा दें तो वह राखी पौधे के रूप में बाहर आएगी।

हल्दी और गोबर के बनाए मोती
मांगलिक राखियों में भी महिलाएं गोबर, हल्दी, सुपारी, अक्षत और जौ का इस्तेमाल कर रही हैं। हल्दी की गांठ को काटकर उसे मोती का रूप दिया गया है। जबकि गोबर को भी सूखाकर राखी का बेस बनाया गया है। समूह की महिलाएं दीप्ति राय, वी ईश्वरी, सुषमा सिंह, बबीता मिश्रा, लता ठाकुर, सविता साहू ने बताया कि उनके पास फिलहाल 1 हजार राखियों का आर्डर है। जबकि दिल्ली और भोपाल की संस्थाओं को उन्होंने सैंपल भेजे हैं। हालांकि रक्षाबंधन को अभी डेढ़ महीने का वक्त है और उन्हें उम्मीद है कि राखियों का ऑर्डर मिल जाएगा।

पहली बार फल और सब्जियों के बीज से महिलाओं ने तैयार किया स्पेशल राखी, कलाई से गिरी तो जमीन में उगेंगे पौधे

इन बीजों का किया राखियों में इस्तेमाल
समूह की अध्यक्ष ललिता सिंह ने बताया कि राखियों को तैयार करने में पपीता, सीताफल जैसे फलों के बीज एवं सब्जियों में बरबट्टी, गंवारफल्ली, लौकी के बीज शामिल है। यह काफी छोटे बीज है जो राखियों के बीच सुंदर भी लगते हैं और आसानी से चिपक भी जाते हैं। राखी को यदि जमीन पर रख दिया जाए तो इन बीजों से जल्द पौधे भी निकल आएंगे।

Dakshi Sahu
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