सरकार की जय हो : करंट से मजदूर की मौत, विभागीय जांच में इंजीनियर दोषी, तीन साल बाद भी कार्रवाई नहीं

करंट लगने से श्रमिक लुकेश कुमार सोनी की हुई मौत मामले में दोषी अधिकारी पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्युशन कंपनी कार्रवाही नहीं कर रही है। जबकि विभागीय जांच में सहायक अभियंता एनआर छिपा को श्रमिक की मौत मामले में दोषी ठहराया गया है।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 29 Mar 2019, 12:18 PM IST

दुर्ग@Patrika. करंट लगने से श्रमिक लुकेश कुमार सोनी की हुई मौत मामले में दोषी अधिकारी पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्युशन कंपनी कार्रवाही नहीं कर रही है। जबकि विभागीय जांच में सहायक अभियंता एनआर छिपा को श्रमिक की मौत मामले में दोषी ठहराया गया है। 3 साल बीतने के बाद भी एफआईआर नहीं होने से पीडि़त परिवार और आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एसपी प्रखर पाण्डेय से न्याय की गुहार लगाई है।

सहायक अभियंता एनआर छिपा को श्रमिक की मौत के लिए जिम्मेदार ठहाराया गया
गुरुवार को एसपी ऑफिस पहुंचे ज्ञापनकर्ताओं का कहना था कि विद्युत वितरण कंपनी ने जानबूझकर कनेक्शन देने ऐसे श्रमिक को इलेक्ट्रिक पोल पर चढ़ाया जो चालू लाइन पर काम करने अधिकृत ही नहीं है। इस मामले में पीडि़त परिवार ने जब शिकायत की तो विभागीय जांच के अलावा राज्य विद्युत निरीक्षक ने जांच भी की। @Patrika. जांच में सहायक अभियंता एनआर छिपा को श्रमिक की मौत के लिए जिम्मेदार ठहाराया गया। इसके बाद भी विभाग मामले की लीपापोती करने में लगा है। इस मामलें गैर इरादतन हत्या की धारा के तहत एफआईआर कराने के बजाय दोषी सहायक अभियंता को बचाया जा रहा है।

यह है मामला
२६ मार्च २०१६ को छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी ने मीटर लगाने सहायक अभियंता एनआर छिपा ने पांच मीटर एफओसी कर्मचारी विकास व लुकेश कुमार सोनी को जारी किया था। चार मीटर लगाने के बाद दोनों कर्मचारी शिवाजी नगर खुर्सीपार निवासी सुनील त्यागी के घर पहुंचे थे। मीटर लगाने के बाद कनेक्शन देने सहायक अभियंता ने लुकेश सोनी को इलेक्ट्रिक पोल पर चढ़ाया था। @Patrika. चालू लाइन में बिना सुरक्षा के कनेक्शन करते समय लुकेश सोनी करंट की चपेट में आ गया था। इस घटना में लुकेश सोनी ऊंचाई से गिर गया था। घटना के बाद उसे सेक्टर नौ अस्पताल पहुंचाया गया। आईसीयू में जगह नहीं होने पर उसे स्पर्श अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति में सुधार नहीं होने पर अपोलो बीएसआर ले जाने पर उपचार के दौरान घायल श्रमिक की मौत हो गई।

उप अभियंता आरके देवांगन ने की जांच
सूचना का अधिकार के तहत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मामले की जांच राज्य विद्युत निरीक्षक आरके देवांगन ने जांच की थी। जांच में घटना का उल्लेख करते हुए जांच अधिकारी ने अभिमत दिया है कि मृतक श्रमिक लुकेश कुमार विद्युत खंबे में चढऩे अधिकृत नहीं था। कार्य करते समय उसे किसी तरह का सुरक्षा यंत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। @Patrika. कनिष्ठ यंत्री गुनेश्वर प्रसाद शिवारे ने भी घटना से संबंधित तथ्य को छिपाया है। जांच अधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुसंसा की है।

जवाब आने के बाद ही हम कोई निर्णय ले पाएंगे

अशोक कुमार, कार्यपालन निदेशक ने कहा कि मामले में विभागीय जांच हुई है। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घटना इलेक्ट्रिकल है या मैकेनिकल। 15 दिन पहले हमने जांच अधिकारी को स्थिति को स्पष्ट करने पत्र लिखा है। @Patrika. पोस्ट मार्टम रिपोर्ट और पुलिस विवेचना में श्रमिक की मौत का कारण इलेक्ट्रीक शॉक से नहीं बल्कि ऊंचाई से गिरने से होना बताया है। पत्र का जवाब आने के बाद ही हम कोई निर्णय ले पाएंगे।

दोनों रिपोर्ट में सहायक अभियंता को दोषी बताया गया
मेहरबान सिंह, आप पार्टी कार्यकर्ता ने बताया कि इस मामले में विभागीय जांच के अलावा राज्य विद्युत निरीक्षक ने भी जांच की है। दोनों रिपोर्ट में सहायक अभियंता को दोषी बताया गया है।@Patrika. सूचना का अधिकार के तहत मिली कॉपी से स्पष्ट हुआ है। हमने जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई के लिए एसपी कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया है।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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