टमाटर की खातिर छोड़ी 40 लाख की नौकरी

40 lakh ki job left for the sake of tomato in bhilwara बिना जमीन और मिट्टी के टमाटर की खेती। सुनने में अजीब लग रहा होगा। लेकिन चित्तौडग़ढ़ रोड पर मण्डपिया के निकट व्यवसायी विनोद गग्गड़ और उनके बेटे शुभम ने यह कर दिखाया। यह सम्भव हुआ है हाइड्रोपोनिक सिस्टम से।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 11 Jun 2021, 10:36 AM IST

भीलवाड़ा। बिना जमीन और मिट्टी के टमाटर की खेती। सुनने में अजीब लग रहा होगा। लेकिन चित्तौडग़ढ़ रोड पर मण्डपिया के निकट व्यवसायी विनोद गग्गड़ और उनके बेटे शुभम ने यह कर दिखाया। यह सम्भव हुआ है हाइड्रोपोनिक सिस्टम से।

देश के कई हिस्सों में इस तकनीक से खेती की जा रही है। राज्य में कोटा के बाद भीलवाड़ा दूसरा शहर है, जहां एेसे ढंग से टमाटर पैदा किए जा रहे हैं। एमबीए कर चुके शुभम ने मुम्बई में 40 लाख का सालाना पैकेज छोड़कर पिता के साथ खेती की सोची। इसमें पेस्टीसाइड और केमिकल इस्तेमाल नहीं करते। ऑर्गेनिक फार्मिंग में दो दिन में चार सौ किलो टमाटर बिकने लायक हो जाते हैं। पिता-पुत्र आधा बीघा में इस तकनीक से टमाटर उगा रहे हैं। अन्य सब्जियां भी इस तकनीक से उगाई जा रही है।

क्या है हाइड्रोपोनिक सिस्टम

हाइड्रोपोनिक सिस्टम खेती का एेसा तरीका है जिसमें जमीन और मिट्टी का उपयोग नहीं होता है। इसके लिए प्लांट तैयार किया जाता है। वातानुकूलित पॉली हाउस बनाया। गोइंग चैम्बर (जिसमें पौधा विकसित होता) बनाया गया। इसमें कोकोपीट यानि नारियल के वेस्ट से तैयार नेचुरल फाइबर का उपयोग मिट्टी की जगह किया जाता है। कंकण और पत्थर का भी इस्तमाल किया जाता है।

आरओ का पानी, सत्तर प्रतिशत तक बचत

इस तकनीकी से खेती में सत्तर प्रतिशत पानी बचता है। आरओ का पानी ही खेती में उपयोग में लिया जाता है। गर्मी जैसे समय में रोजाना बीस हजार लीटर पानी चाहिए। टमाटर की खेती के लिए पॉली हाउस का तापमान अधिकतम 35 व न्यूनतम 20 डिग्री होना चाहिए। गर्मी बढऩे के लिए कूलर की तरह यहां पॉली बैग के चारों ओर पानी का छिड़काव करके तापमान को सामान्य किया जाता है। सिंचाई के लिए ऑटोमेटिक कंट्रोल सिस्टम है।

सात से आठ माह में उत्पादन

भीलवाड़ा के आजाद मोहल्ला निवासी विनोद गग्गड़ ट्रांसफार्मर निर्माण का कारोबार करते है। मण्डपिया के निकट फैक्ट्री है। फैक्ट्री परिसर में नई तकनीक से खेती की गई। बीज रोपने के बाद सात से आठ माह में उत्पादन शुरू हो जाता है। इस समय यहां पर दो तरह के टमाटर का उत्पादन हो रहा है। इनमें छोटी साइज में चैरी टमाटर और एक सामान्य टमाटर। इनकी सर्वाधिक नीमच में मांग है।

Narendra Kumar Verma Reporting
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