कई सालों बाद इस साल 5 माह का चातुर्मास

17 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास

By: Suresh Jain

Published: 07 Jul 2020, 03:03 AM IST

भीलवाड़ा .

इस साल पांच माह का चातुर्मास रहेगा। क्योंकि 17 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास है। देवशयनी एकादशी 1 जुलाई बुधवार को रही। इसी दिन से चातुर्मास शुरू हो गए। पांच महीने शुभ काम वर्जित रहेंगे। देवशयनी से देवप्रबोधिनी एकादशी के बीच के समय को चातुर्मास कहा जाता है।
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि इस बार अधिक मास के कारण चातुर्मास पांच महीने का होगा। श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सभी त्योहार लगभग 20 से 25 दिन देरी से आएंगे। लगभग 160 साल बाद ऐसा योग बन रहा।
इस बार आश्विन माह का अधिक मास है। मतलब दो आश्विन मास होंगे। उसी महीने में श्राद्ध और नवरात्र, दशहरा जैसे त्योहार पड़ते हैं। आमतौर पर श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्र शुरू हो जाते हैं, पर इस बार ऐसा नहीं होगा।
17 सितंबर को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिक मास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। पंडित व्यास के अनुसार इस तरह श्राद्ध और नवरात्र के बीच इस साल एक महीने का समय रहेगा। दशहरा 26 अक्टूबर को और दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी रहेगी और इस दिन चातुर्मास खत्म हो जाएगा।
अधिकमास को कहा जाता है मलमास
अधिक मास में सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। इस माह में सूर्य संक्राति नहीं रहती है। इस वजह से ये माह मलिन हो जाता है। इसलिए इसे मलमास कहते हैं। चार्तुमास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। मान्यता है कि इस समय में विहार करने से छोटे-छोटे कीटों को नुकसान होने की आशंका रहती है। धर्म ग्रंथों मे चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं।
अधिक मास एक ही साल में
व्यास के अनुसार 19 वर्ष पूर्व 2001 में आश्विन माह का अधिक मास आया था। अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन माह के अधिक मास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिक मास आया था। जब उसी साल लीप ईयर भी था। एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर रहता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है। जिसे अधिक मास कहते हैं।

Suresh Jain Reporting
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