कोर्ट की डीएसपी पर नाराजगी के बाद रीडर पर भी आई आंच

एक के बाद एक मामले में दूषित अनुसंधान और जांच में लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन सदर डीएसपी राजेश आर्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट की तल्खी के बाद उनके कार्यालय में लगे रीडर समीर सेन पर भी गाज गिरी।

भीलवाड़ा. एक के बाद एक मामले में दूषित अनुसंधान और जांच में लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन सदर डीएसपी राजेश आर्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट की तल्खी के बाद उनके कार्यालय में लगे रीडर समीर सेन पर भी गाज गिरी। हैड कांस्टेबल सेन को डीएसपी कार्यालय से हटा दिया गया। उनको पुलिस अधीक्षक कार्यालय के एमओबी शाखा में लगाया गया। भीलवाड़ा रहते हुए डीएसपी आर्य की कार्यप्रणाली के कारण भीलवाड़ा पुलिस पर सवाल खड़े हुए थे। डीएसपी द्वारा की गई जांच के समय हैड कांस्टेबल सेन उनके रीडर थे।


पति को फंसा दिया, जांच में खुली डीएसपी की पोल
कांदा निवासी रामलाल बलाई तीन महीने तक बिना जुर्म के जेल में रहा। 13 मई को रूपाहेली के श्यामलाल बलाई की पुत्री ने पीहर में फंदा लगाकर जान दे दी थी। मृतका के पिता ने सदर थाने में पति रामलाल के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था। जांच अधिकारी डीएसपी आर्य ने बिना जांच के बाद अगले दिन रामलाल को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। डीएसपी की गलती सामने आने के बाद एएसपी ने मामले को झूठा मानते हुए रामलाल को क्लीन चिट दी। मामले में एफआर लगाई और पति को जेल से छुड़ाया।


निर्दोष छह माह जेल में रह गया
किशोरी का अपहरण कर बलात्कार के पॉक्सो एक्ट के मामले में निर्दोष छह माह जेल में रहा। इस मामले में भी डीएसपी आर्य ने जांच की थी। उस समय भी उनका रीडर सेन था। ४ जनवरी को विशिष्ट न्यायाधीश संख्या दो (पॉक्सो मामलात) ने अनुसंधान में लापरवाही बरतने पर नाराजगी जाहिर कर डीजीपी और गृह सचिव को जांच एवं अनुशासत्मक कार्रवाई के लिए लिखा था। कोर्ट ने दो जनों को पोक्सो के आरोप से दोषमुक्त किया।

Akash Mathur Reporting
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