बाण माता मंदिर पर नहीं होती पशु बलि

मेवाड़ के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक बाण माता शक्तिपीठ गोवटा बांध पर स्थित है। यहां नवरात्रा में मेले का माहौल है। भीलवाड़ा जिला ही नहीं अपितु चित्तौडग़ढ़,बूंदी व कोटा जिले से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है। मान्यता है कि अलौकिक दैवीय चमत्कारों से बाण माता रोगियों के कष्टों का हरण करती है।

By: Narendra Kumar Verma

Updated: 08 Oct 2021, 12:37 PM IST

भीलवाड़ा। मेवाड़ के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक बाण माता शक्तिपीठ गोवटा बांध पर स्थित है। यहां नवरात्रा में मेले का माहौल है। भीलवाड़ा जिला ही नहीं अपितु चित्तौडग़ढ़,बूंदी व कोटा जिले से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है। मान्यता है कि अलौकिक दैवीय चमत्कारों से बाण माता रोगियों के कष्टों का हरण करती है।

माण्डलगढ़ से दक्षिण पश्चिम दिशा में मात्र 7 किमी दूर अरावली पर्वतमाला की सुरम्यघाटी के बीच बाण माता मंदिर है। बाण माता के मन्दिर के पांव पखारता 27 फ ीट ऊंचाई की भराव क्षमता वाला गोवटा बांध आने वालों के मन को आल्हादित किए देता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप कुमार सिंह बताते है कि बाण माता राजपूतों की कुलदेवी है। इन्हें बायण माता के नाम से भी बुलाते है।

बाण माता के यहां दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु प्रत्येक रविवार को आते है। मनोती पूर्ण होने पर श्रद्धालु बाण माता के यहां मुर्गा, बकरा, मेमना आदि छोड़ जाते है जो यहां वहां स्वच्छन्द विचरण करते रहते है। पशु बलि यहां नही होती है। माता के यहां दोनों नवरात्रा में नौ दिवसीय मेला आयोजित होता है। बाण माता शक्ति पीठ के यहां आने जाने के लिए माण्डलगढ़ से जीप, टेम्पो सहित अन्य साधन मिलते है।


बाण माता मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम विक्रम सम्वत 2015 में हुआ । बाण माता के यहां विक्रम सम्वत 2051 में माधव दास व महन्त बनवारी शरण शास्त्री भीलवाड़ा की प्रेरणा से महायज्ञ हुआ। महायज्ञ समिति के अध्यक्ष भंवर लाल जोशी एवं उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह रहे। बाण माता शक्ति पीठ गोवटा बांध के विकास के लिए बाण माता शक्ति पीठ विकास संस्थान कार्य रत है जिसके अध्यक्ष सराणा के अशोक कुमार शर्मा है।


लगभग 63 वर्ष पूर्व जब गोवटा बांध के निर्माण का काम शुरू हुआ तब बांध बनाने वाले ठेकेदार के स्वप्न में बाण माता ने संदेश दिया कि वह बांध बनाने से पूर्व उसका मन्दिर बनवाए। मन्दिर नहीं बनवाने पर प्रतिफ ल भोगना होगा। कारण यह था कि बांध बन्धने से बाण माता का स्थल पानी में डूब रहा था। बाण माता के स्वप्न की बात पर एक बारगी ठेकेदार ने भरोसा नही किया तब दुबारा स्वप्न में आकर माताजी ने बांध बनाने वाले ठेकेदार को चेतावनी दी तब ठेकेदार ने कहा कि में आपको कहां बिठाऊ। मुझे कोई प्रामाणिक सन्देश दें।

थोड़े दिन बाद दिन दहाड़े एक शेर आया और जोर जोर से दहाडऩे लगा और पंजों से पेड़ के समीप जमीन को खुरच दिया। शेर की घटना से ठेकेदार मन ही मन समझ गया कि बाण माता का मन्दिर शेर की ओर से बनाए गए निशान वाली भूमि पर ही बनाना है। ठेकेदार ने बिना समय गंवाए वहां काम शुरू करवा छोटा सा मन्दिर बना दिया। अब वहां सफेद संगमरमर का एक भव्य मन्दिर निर्मित है। मन्दिर की नींव रखने के बाद से ठेकेदार को भी अपने व्यवसाय में उत्तरोत्तर प्रगति होती गई। पहाड़ी पर निर्मित मन्दिर पर पहुंचने के लिए 108 सीढियां बनी हुई है। मन्दिर परिसर के समीप धार्मशालाएं भी बनी हुई है जहां पीडि़त रोगी विश्राम करते है।

Narendra Kumar Verma Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned