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जुगाड़ के सहारे भीलवाड़ा सुपर मंडी

Bhilwara Super Mandi with the help of Jugaad जुगाड़ के सचिवों के जरिए चल रही महात्मा ज्योतिबा फूले भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी समिति परिसर के हालात खराब है। यहां गत एक दशक में 17 सचिवों ने काम संभाला, लेकिन इनमें सिर्फ सात की ही स्थाई नियुक्ति हुई, इसमें भी सिर्फ दो ही सचिव एक साल से अधिक समय तक यहां टिक सके। स्थाई प्रशासकीय पकड़ नहीं होने से यहां मंडी के राजस्व का ग्राफ नीचे लुढ़का है तो अवैध कब्जों का ग्राफ लगातार चढ़ा ही है।

भीलवाड़ा

Published: December 31, 2021 07:28:25 pm

Bhilwara Super Mandi with the help of Jugaad भीलवाड़ा। जुगाड़ के सचिवों के जरिए चल रही महात्मा ज्योतिबा फूले भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी समिति परिसर के हालात खराब है। यहां गत एक दशक में 17 सचिवों ने काम संभाला, लेकिन इनमें सिर्फ सात की ही स्थाई नियुक्ति हुई, इसमें भी सिर्फ दो ही सचिव एक साल से अधिक समय तक यहां टिक सके। स्थाई प्रशासकीय पकड़ नहीं होने से यहां मंडी के राजस्व का ग्राफ नीचे लुढ़का है तो अवैध कब्जों का ग्राफ लगातार चढ़ा ही है।
Bhilwara Super Mandi with the help of Jugaad
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प्रदेश की सुपर 27 कृषि उपज मंडियों में भीलवाड़ा कृषि उपज मण्डी समिति 20 मई 2016 से शामिल है। मण्डी की आय के आधार पर भीलवाड़ा मण्डी को ए श्रेणी से क्रमोन्नत करते हुए सुपर ए श्रेणी में शामिल किया है। मंडी में चुनाव प्रस्तावित होने से सरकार ने यहां बोर्ड भंग करते हुए प्रशासक की नियुक्ति कर रखी है। यहां 25 सितम्बर २०१९ से प्रशासक नियुक्त है, लेकिन यह नियुक्ति भी कागजी है। मंडी में सचिव भी यहां जुगाड़ के जरिए लगा रखा है।
एक जना ही दो साल टिक सका
जानकारी के अनुसार ५ जून २०१२ से मंडी में अतिरिक्त चार्ज के जरिए अन्य मंडियों के सचिवों को यहां लगाने और भीलवाड़ा मंडी का कार्य शुरू कराने की जो परम्परा शुरू हुई है, वह अभी तक जारी है। गत एक दशक में यहां सिर्फ दो साल के लिए स्थाई सचिव की नियुक्ति एक बार ही एक अक्टूबर २०१९ से ३० अप्रेल २०२० तक हुई है। इसके बाद अधिकांश समय यहां मंडी सचिव का कार्य भार पड़ोसी जिलों के मंडी सचिवों के पास ही रहा है। मंडी के रिकार्ड के अनुसार दो अगस्त २०२० से १८ अक्टूबर २०२० तक चित्तौड़ मंडी के सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज रहा। इसके बाद अब ब्यावर मंडी के सचिव महेश शर्मा यहां का अतिरिक्त कार्य संभाले है।
क्लीनिंग एंड ग्रेडिग मशीनें कबाड़
एेसे हालातों में मंडी की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ मंडी की विपणन व्यवस्था भी डांवाडोल है। यहां गेहूं व मक्का की सफाई के लिए हजारों की लागत से खरीदी गई क्लीनिंग एंड ग्रेडिग मशीन उपयोग के अभाव में कबाड़ हो रही है। मुख्य परिसर में लगा इलेक्ट्रोनिक सूचना पट्ट खराब है। डिस्पले खराब होने से किसानों को रोजाना मंडी के भाव नहीं मिल पा रहे है। मंडी का उद्यान बदहाल है। मंडी प्रशासन ने दो और नए प्रवेश द्वार बनवाए, लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। कोल्ड स्टोरेज व पुरानी दुकानों को लेकर कोई ठोस योजना अभी तक नहीं बन सकी।
नीलामी चबूतरों पर अवैध कब्जे
जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले काश्तकारों का कृषि जिंस सुरक्षित रह सके और उनकी नीलामी हो सके, इसके लिए मंडी परिसर में हजारों रुपए खर्च कर सा चबूतरे बना रखे है। यहां काश्तकारों की कृषि जिंस रखने की सुविधा जुटाई गई, लेकिन मंडी प्रशासन की अनदेखी एवं कर्मचारियों की मिली भगत से यहां कुछेक मंडी व्यवसाइाों ने अवैध कब्जे कर लिए है। स्थिति ये है कि ये चबूतरे नीलामी के बजाए मंडी व्यवसायी के गोदाम बन चुके है।
नए प्रवेशद्वार है बंद
मंडी परिसर की तरफ दोनों तरफ खुले प्रवेश द्वारों पर अलग से चेकपोस्ट स्थापित नहीं है। किसान केलवा योजना भी जैसे तैस चल रही है। किसानों के लिए कैंटीन व्यवस्था प्रभावी नहीं है। आग से निपटने के पुख्ता बंदोबस्त नहीं है।
मंड़ी की कमाई का गिर रहा ग्राफ
मंडी के राजस्व आंकड़े बताते है वर्ष २०१७-१८ से मंडी की आय में लगातार गिरवट आ रही है। वर्ष २०१७-१८ में मंडी ने ४४१.२९ लाख रुपए की कमाई की, इसके बाद कमाई का आंकडा घटकर वर्ष २०१८ में ४०४.०३, वर्ष २०१९ में ३६२.१४ व वर्ष २० में १५२.७८ लाख रुपए रह गई। वर्ष २०२१-२२ में नवम्बर तक कमाई का आंकड़ा केवल ४६.८९ लाख रुपए था।
नहीं हटे तो होंगे लाइसेंस निरस्त
मंडी के सर्वांगीण विकास एवं राजस्व आय में बढ़ोत्तरी के लिए कार्य ययोजना बनाई जा रही है। यहां नीलामी चबूतरों व प्लेटफार्म से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। इस बारे में व्यापारियों को जल्द नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि फिर भी अवैध कब्जे नहीं हटे तो संबंधित दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। क्लीनिंग एंड ग्रेडिग मशीनें भी जल्द शुरू की जाएगी।
- डॉ. राजेश गोयल, मंडी प्रशासक एवं एडीएम प्रशासन भीलवाड़ा

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