कोर्ट का बड़ा फैसला: हवस का शिकार बनी बालिका का हो सकेगा गर्भपात

कोर्ट का बड़ा फैसला: हवस का शिकार बनी बालिका का हो सकेगा गर्भपात
Big decision of court: Girl child victim of lust will get abortion

Narendra Kumar Verma | Updated: 06 Oct 2019, 12:02:38 PM (IST) Bhilwara, Bhilwara, Rajasthan, India

अपने ही रिश्तेदार की हवस का शिकार होने के बाद गर्भवती हुई बालिका के गर्भपात के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भीलवाड़ा में जिला कलक्टर के देखरेख में शनिवार को महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ.अरुण गौड ने पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठित किया। बोर्ड ने शनिवार देर शाम को पीडि़ता बालिका का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर विशेष मेडिकल टीम ने कानूनी रूप से गर्भपात की तैयारी शुरू कर दी है।


भीलवाड़ा। अपने ही रिश्तेदार की हवस का शिकार होने के बाद गर्भवती हुई बालिका के गर्भपात के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भीलवाड़ा में जिला कलक्टर के देखरेख में शनिवार को महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ.अरुण गौड ने पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठित किया। बोर्ड ने शनिवार देर शाम को पीडि़ता बालिका का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर विशेष मेडिकल टीम ने कानूनी रूप से गर्भपात की तैयारी शुरू कर दी है।

यूं बढ़े हाईकोर्ट की मदद के लिए हाथ
बलात्कार के कारण नाबालिग के गर्भवती होने का मामला अधिकारी 10 दिन तक फाइलों में ही चलाते रहे, लेकिन बाल कल्याण समिति भीलवाड़ा को सरकार से आदेश नहीं मिला तो राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया। प्राधिकरण ने बालिका के 20 सप्ताह के गर्भ को गिराने की अनुमति के लिए तत्काल हाईकोर्ट में याचिका दायर कराई और याचिका पेश होने के साढ़े चार घंटे के भीतर कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से बालिका का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की अनुमति दे दी। प्राधिकरण के अनुसार शनिवार को भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के बोर्ड ने बालिका का परीक्षण कर अदालती आदेश की पालना में आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी।

ये था मामला
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. सुमन त्रिवेदी ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से इस मामले में शुक्रवार को याचिका दायर की थी, जिसमें कहा कि 17 वर्षीय बालिका से उसके रिश्ते के भाई ने बलात्कार किया और उससे वह गर्भवती हो गई। कमेटी की ओर से अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह शेखावत ने कोर्ट को बताया कि बालिका की 24 सितम्बर 19 को सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें 18 सप्ताह 2 दिन का भ्रूण होने की जानकारी सामने आई। कमेटी ने बालिका का गर्भपात कराने की अनुमति देने का आग्रह भी किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता विभूति भूषण शर्मा ने कहा कि पहले पीडि़ता की स्थिति का परीक्षण कराया जाए, क्योंकि मामला पीडि़ता के जीवन से जुड़ा हुआ है।

कोर्ट ने दिखाई गंभीरता
न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल के अनुसार 24 सितम्बर 19 को भ्रूण 18 सप्ताह 2 दिन का हो गया था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज बालिका के परीक्षण के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ व फिजिशियन सहित तीन चिकित्सकों का बोर्ड बनाए, जो यह परीक्षण करे कि गर्भपात किया जा सकता है या नहीं? यदि मेडिकल बोर्ड को उचित लगे तो गर्भपात के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाए। भविष्य में किसी अन्य मामले में डीएनए परीक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भ्रूण को सुरक्षित रखने को भी कहा गया है।

कमेटी ने किया स्वास्थ्य परीक्षण
हाईकोर्ट के आदेश की पालना में भीलवाड़ा में एमजीएच के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड ने शनिवार शाम पांच सदस्यीय मेडिकल ज्यूरिष्ट टीम गठित की। टीम ने शाम को पीडि़ता का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद गर्भपात करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पीडि़़ता को प्रतिकर राशि दिलाई जा रही है
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता थी और मुझे खुशी है कि पीडि़ता की मदद करने में सफल रहे। रालसा ऐसे हर बच्चे की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले में पीडि़ता को प्रतिकर राशि भी दी जा रही है।
अशोक कुमार जैन, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
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हाईकोर्ट का एतिहासिक निर्णय
हाईकोर्ट में याचिका पेश होने के महज साढ़े चार घंटे के भीतर निर्णय किया है , ये एक एतिहासिक नजीर है। इससे ये तय है कि न्याय पालिका भी बच्चों के न्यायिक हित को लेकर संवेदनशील है, जोकि भविष्य के लिए अच्छे संकेत है। डॉ.सुमन त्रिवेदी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति भीलवाड़ा

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