काले सोने में नहीं हो मनमानी, इस लिए बदल दिए लम्बरदार

काले सोने में नहीं हो मनमानी, इस लिए बदल दिए लम्बरदार
Black gold should not be arbitrary, so changed lumber

Narendra Kumar Verma | Publish: Oct, 21 2019 12:25:42 PM (IST) Bhilwara, Bhilwara, Rajasthan, India

प्रदेश के कुछ जिलों में पट्टा वितरण, अफीम बुवाई क्षेत्र व अफीम तोल के दौरान गड़बड़ी तथा डोडा चूरा नष्ट करने को लेकर हुए घपलों के खेल उजागर होने के बाद लम्बे समय से जमे कई गांवों के मुखियाओं (लम्बरदार) को केन्द्रीय नारकोटिक्स विभाग ने बदल दिए हैं। दूसरी ओर विभाग ने पट्टे दिलवाने के नाम पर कहीं घपलों का खेल ना हो जाए, इसके लिए किसानों को अलर्ट कर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सावचेत किया है।

नरेन्द्र वर्मा
भीलवाड़ा। प्रदेश के कुछ जिलों में पट्टा वितरण, अफीम बुवाई क्षेत्र व अफीम तोल के दौरान गड़बड़ी तथा डोडा चूरा नष्ट करने को लेकर हुए घपलों के खेल उजागर होने के बाद लम्बे समय से जमे कई गांवों के मुखियाओं (लम्बरदार) को केन्द्रीय नारकोटिक्स विभाग ने बदल दिए हैं। दूसरी ओर विभाग ने पट्टे दिलवाने के नाम पर कहीं घपलों का खेल ना हो जाए, इसके लिए किसानों को अलर्ट कर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सावचेत किया है।

भीलवाड़ा अफीम संभाग में फसल वर्ष २०१९-२० के लिए अफीम पट्टे वितरण का कार्य जारी है। केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो आरके कॉलोनी स्थित कार्यालय में पात्र किसानों को अफीम के पट्टे जारी कर रही है। पट्टा वितरण के दौरान ही अफीम उपज के गांवों में मुखियाओं की नियुक्ति कर गांव के पट्टेधारक किसानों की उपज पर निगरानी रखने के साथ ही उसका खरीद मूल्य दिलवाने तक की जिम्मेदारी दी जा रही है। संभाग कार्यालय में अभी तक १८८ गांवों के पात्र ३६१३ किसानों को पट्टे दिए जा चुके हैं। साथ ही श्रेष्ठ अफीम की औसत देने वाले किसानों को उसकी पात्रता के आधार पर ही मुखिया की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है।

१०० से अधिक बदले मुखिया

अफीम संभाग के २५८ गांवों में से १०० गांवों के मुखियाओं को इस बार हटा दिया गया है। इनमें अधिकांश दो वर्ष से अधिक की अवधि से जुड़े हुए थे। कई को लेकर शिकायतें भी थी। माना जा रहा है कि इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण गत दो वर्ष के दौरान प्रदेश के कुछ जिलों में पट्टा वितरण, अफीम बुवाई क्षेत्र में गड़बड़ी तथा अफीम तोल व डोडा नष्टीकरण के दौरान घपले के मामले उजागर होने तथा इनमें दोषी पाए गए पुलिस व केन्द्रीय नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों व कर्मियों के साथ मुखियाओं की साठगांठ होना है। कई का औसत बेहतर नहीं होने या उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायतें होने पर हटाया गया है।

नहीं चाहते कोई दाग
प्रदेश में अफीम की खेती के मामलों में घपले उजागर होने तथा अफीम खेती के कायदे कानून और कड़े होने से फसल वर्ष २०१९-२० के लिए कई किसान मुखिया बनने को तैयार नहीं है। कोटड़ी तहसील के सोपुरा में पांच काश्तकार हैं, लेकिन कोई काश्तकार मुखिया बनने को तैयार नहीं है। विभागीय अधिकारी किसानों से समझाइश कर रहे हैं। इसी प्रकार बिजौलियां, जहाजपुर, मांडलगढ़ व कोटड़ी तहसील के ३२ गांव एेसे हैं, जहां भी किसान मुखिया बनने को तैयार नहीं हैं। यहां पट्टा वितरण शिविर में आए मुखिया किसानों से बातचीत में ये पहलु उजागर हुआ। किसानों का कहना था कि हाल ही घटना से मुखियाओं की कार्यर्शली पर सवाल उठे हैं। प्रत्येक किसान की उपज पर नजर रखना भी संभव नहीं है। इस लिए वे यह जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे हैं।

पट्टा वितरण में पारदर्शिता

अफीम पट्टा वितरण में पूरी पादर्शिता बरती जा रही है। पट्टे जारी करने से पहले पात्रता की जांच की जा रही है। किसानों को कहा गया है कि वो किसी भी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में नहीं आएं और न ही किसी को पट्टे वितरण के नाम पर राशि या कुछ दें। विभागीय कर्मचारी भी लालच देता है, तो शिकायत करें। मुखियाओं में भी व्यापक बदलाव किया गया है। कुछ गांवों में किसान मुखिया बनने को तैयार नहीं हैं। इसके लिए किसानों को राजी किया जा रहा है।

एसके सिंह, जिला अफीम अधिकारी, भीलवाड़ा

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned