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blood of relationships in bhilwara अपनों की जान लेने तक में नहीं चूक रहे

blood of relationships in bhilwara तिलकनगर में ज्योति व्यास की हत्या ने दरकते रिश्तों की पोल खोल दी। लालच, बदला और शक ने रिश्तों में खटास पैदा की। इसका नतीजा यह निकला अपनों को ही मौत के घाट उतार दिया गया।पिछले छह साल में जिले में बाइस रिश्तेदारों की हत्या की गई। किसी में कारण रंजिश रही तो किसी में शक। जमीन, पैसा और लालच भी प्रमुख वजहों में शामिल है

भीलवाड़ा

Updated: May 17, 2022 11:17:46 pm

blood of relationships in bhilwara तिलकनगर में ज्योति व्यास की हत्या ने दरकते रिश्तों की पोल खोल दी। लालच, बदला और शक ने रिश्तों में खटास पैदा की। इसका नतीजा यह निकला अपनों को ही मौत के घाट उतार दिया गया।पिछले छह साल में जिले में बाइस रिश्तेदारों की हत्या की गई। किसी में कारण रंजिश रही तो किसी में शक। जमीन, पैसा और लालच भी प्रमुख वजहों में शामिल है। कई मामलों में अदालत सजा सुना चुकी है।blood of relationships in bhilwara
Do not fail to even take the lives of loved ones
Do not fail to even take the lives of loved ones
गुस्सा हावी हो रहावर्तमान आर्थिक युग में रिश्ते बिगड़ने के पीछे बड़ा कारण टूटता विश्वास है। अपनों पर ही विश्वास नहीं कर पाते से भाई-भाई का दुश्मन हो रहा। बहन-भाई और माता-पिता के साथ पति-पत्नी में विवाद बढ़ रहा। कुछ सालों में जिले में हुई घटनाओं में यही कारण अपने ही खून के हाथों से लाल होते नजर आए। अधिकतर हत्या में कोई खास कारण नहीं है। सभी हत्याएं मामूली विवाद और नशापान के कारण घटी है। नशा और आवेश भी रिश्तों को तोड़ने की बड़ी वजह बन रहा है। नशे के बाद आदि में अपने पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। आवेश में आकर हत्या संगीन अपराध कर देता है। इसकी पश्चात उसे सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद होता है।
सोशल मीडिया ने बढ़ाई आक्रामकताआपस में विश्वास और प्रेम की कमी रिश्तों की डोर तोड़ रही है। परिवार, देश और समाज को एक बनाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत विश्वास होती है। यहीं कायम नहीं रहे तो रिश्ते टूटते है। भले संगीन घटनाओं पर जाकर क्यों ना थमे। सोशल मीडिया भी आक्रामकता बढ़ा रहा है। लगातार सोशल मीडिया पर रहने से बच्चे हो या बड़े, अग्रेसिव हो जाते हैं। शिक्षा केवल कमाने तक सीमित कर रही है। पैसा कमाने के लिए जब घर से बाहर निकलते हैं तो कई बार असफलता भी मिलती है। असफलता को कैसे फेस क्या जाए, यह बात ना शिक्षा सीखाती है और ना ही परिवार। अब बुजुर्ग तक साथ नहीं रहते। ऐसे में व्यवहारिक शिक्षा ना होना भी इसका भी कारण है।
.....केस-01

वर्ष-2021 में हमीरगढ़ क्षेत्र के कीरों की झोपडि़या में भतीजे देवीलाल कीर ने अपने काका नारू कीर और काकी कंकू कीर की धारदार हथियार से वार कर जान ले ली। आरोपी अपने पिता की संदिग्ध मौत का कारण काका और काकी को मानता था। दोनों को शंका के आधार पर मौत के घाट उतार दिया।
केस-02

भीलवाड़ा गायत्रीनगर में पति से मनमुटाव के चलते बड़ी बहन के घर रह रही चंदा की उसके पति गाजूना (करेड़ा) कन्हैयालाल उर्फ किशनलाल बलाई ने चाकू से वार कर हत्या कर दी। बचाने आई मंजू भी घायल हुई। पांच साल पुराने मामले में हाल ही में किशनलाल को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
- सुमन त्रिवेदी, पूर्व अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, सदस्य, स्थाई लोक अदालत

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