मेजा बांध पेटे में तैयार सब्जियों को नहीं मिले खरीदार

हजारों टन टमाटर, खरबूज, तर-ककड़ी हो रही खराब

By: Suresh Jain

Updated: 18 Apr 2020, 08:43 AM IST

भीलवाड़ा।
शहर की लाइफ लाइन रहे मेजा बांध में पेटे में काश्त पर किसानों ने कब्जा कर लिया। यहां सैकड़ों किसानों ने बांध की बंदरबांट कर ली व सब्जियां उगा रहे हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते तैयार सब्जियां मंडी नहीं ला पा रहे हैं। हजारों टन सब्जियां खराब हो गई है। किसान मवेशियों को खिला रहे हैं। किसानों ने बांध के 70 प्रतिशत हिस्से में सब्जियां, तरबूज, खरबूज, तर-ककड़ी लगा रखी है। इधर, किसानों का कहना है कि सब्जी को मंडी नहीं ले जा पा रहे। खेत जाते हैं तो पुलिस डंडे मारती है। नहीं जाए तो मवेश फसल बिगाड़ रहे हैं। हजारों टन टमाटर, तरबूज व तरककड़ी खराब हो गई।

एेसे हुई बंदरबाट
अब क्षेत्र के सात गांवों के एक हजार काश्तकारों ने पूरे बांध की बिलानाम भूमि पर कब्जा कर लिया। जिला प्रशासन, सिंचाई व जलदाय विभाग मूकदर्शक बना है। क्षेत्र के किसानों ने मेजा बांध में बचे पानी के पास धोरे बनाए हैं। इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। पूरे बांध में फसल लहलहा रही है। प्रहलाद कीर ने बताया कि पूरे मेजा काश्त में मात्र पांच-सात किसान ही नजर आते है। वह भी केवल सब्जियों को मवेशियों से बचाने आते हैं। हालांकि तोडऩे वाला कोई नहीं होने से बेल ही खराब हो रही है।

भराव क्षेत्र में काटे खेत
मेजा बांध में मुख्य भराव क्षेत्र में काश्तकारों ने अपने हिसाब से दो से तीन बीघा के टुकड़े कर दिए। निशान लगा दिए कि किस हिस्से में किस काश्तकार की फसल होगी। प्रहलाद कीर ने बताया कि मेजा, किरतपुरा, पीथास, समेलिया आदि गांवों के सैकड़ों काश्तकारों ने सब्जियां व फसलें उगाई है।

प्रशासन करता अनदेखी
दरअसल मेजा बांध से पहले शहर को पानी की आपूर्ति होती थी पर चंबल का पानी आने के बाद इसे भूल गए। यहां पानी खत्म होते ही किसान बांध की बंदरबांट कर लेते हैं। जिसको जहां जगह मिली, बुवाई कर लेते हैं। चोरी-छिपे पानी का अवैध रूप से दोहन होता है। पटवारी व गिरदावर निरीक्षण के नाम पर बांध में जाते हैं। लगभग एक हजार काश्तकार हैं, लेकिन कुछ लोगों के नाम सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का नोटिस जारी होता है। फसल बोने पर पैनल्टी वसूल कर ली जाती है।

Suresh Jain Reporting
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