परिजनों को नहीं दी जा रही केस फाइल

कहीं कोरोना मृतकों का आंकड़ा छुपाने का खेल तो नहीं...
सरकारी अस्पताल दे रहे केवल डिस्चार्ज व डेथ कार्ड
मोर्बिड-कोमोर्बिड की आड़ में मौत के आंकड़े कम बताने का प्रयास कर रही सरकार

By: Suresh Jain

Published: 11 Jun 2021, 08:35 AM IST

भीलवाड़ा .
सरकारी अस्पताल अपने यहां दम तोडऩे वाले मरीजों के परिजनों को इलाज की केस फाइल नहीं दे रहे हैं। इसके अभाव में परिजन यह नहीं जान पाते कि आखिर कौनसी दवा दी गई थी और अचानक तबीयत कैसे बिगड़ी। हालांकि नियम कहता है कि परिजनों को यह जानने का पूरा हक है कि उसके अपने को हुआ क्या था। माना जा रहा है कि केस फाइल नहीं देने के पीछे असली वजह कोरोना से मौत के आंकड़ों की असलियत छुपाना है। फिलहाल परिजनों को केस पेपर के बदले डिस्चार्ज या डेथ कार्ड ही दिया जाता है।
सरकार मोर्बिड-कोमोर्बिड की आड़ में मौत के आंकड़ों को कम बताने का प्रयास कर रही है। कोरोना मरीजों को कोमोर्बिड यानी ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय, किडनी, कैंसर की बीमारी पहले से हो और मौत हो जाए तो उसे कोरोना से हुई मौत नहीं गिना जाता है। मरीजों के परिजनों को केस फाइल देने से मोर्बिड-कोमोर्बिड की पोल खुलने का खतरा रहता है। एक डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मरीज को केस पेपर नहीं देने के आदेश हैं। पॉलिसी के अनुसार मरीज को डिस्चार्ज के समय केस फाइल नहीं दी जाती है। केवल डिस्चार्ज समरी देते हैं। इसमें इलाज की संक्षिप्त जानकारी होती है। केस पेपर हॉस्पिटल के रिकॉर्ड के लिए रखा जाता है। हालांकि निजी अस्पताल मरीजों को फाइल दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों का कहना है कि केस फाइल चाहिए तो आवदेन करो।
मुआवजे से बचने की मंशा
असल में केंद्र व राज्य सरका ने कोरोना फ्रंटलाइन या हेल्थकेयर वर्कर के लिए मौत होने पर मुआवजे की घोषणा कर रखी है। ऐसी स्थिति में मृतक के केस पेपर या डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण कोरोना बताए तो मुआवजे की मांग होगी। यही कारण है कि कोरोना से मृतक संख्या नहीं बढ़े इसलिए एेसे प्रयास किए जा रहे हैं।
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केस फाइल बड़ा सबूत
अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों के लिए केस पेपर बड़ा सबूत है। मरीज के अस्पताल में भर्ती होते ही इंडोर केस पेपर निकालता है। इसके बाद मरीज जब तक भर्ती रहे तब तक इलाज की जानकारी, डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन दर्ज होते हैं। मरीज डिस्चार्ज होता है तब रेफरंस के लिए रिपोर्ट समेत केस पेपर सुपुर्द कर दिया जाता है।
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अब तक ८०१ की मौत
कोरोना संक्रमण १९ मार्च २०२० से फैलने लगा। तब से अब तक ८०१ लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें डॉक्टर, अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, नर्सिंगकर्मी, उद्योगपति, राजनेता तक की मौत हो चुकी है। भीलवाड़ा के एमजीएच अस्पताल में अभी तक ४०० से अधिक की मौत हो चुकी है। सरकारी रिकार्ड में केवल १५३ बता रखा है।
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केस रिपोर्ट का प्रावधान नहीं
किसी भी व्यक्ति की मौत के बाद केवल डिस्चार्ज या डेथ कार्ड जारी किया जाता है। केस फाइल देने का प्रावधान नहीं है। फिर भी किसी को चाहिए तो उसे आवेदन करना होगा। मेडिकल रिकॉर्ड पर्सनल मामला नहीं है। वह सरकार का है।
डॉ. अरुण गौड़, अधीक्षक एमजीएच

Suresh Jain Reporting
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