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भीलवाड़ा

सीबीआई का ड्रोन व डंपी लेवल सर्वे रिपोर्ट बताएंगी अवैध खनन में किनका हाथ

सीबीआई का बनास नदी में सर्वे का काम पूरा, न्यायालय में 2 को पेश करेगी रिपोर्ट

जहाजपुर से जुडे अजमेर व टोंक सीमा तक किया दोपहर तक सर्वे, टीम भीलवाड़ा लौटी

भीलवाड़ाJun 29, 2024 / 11:39 am

Suresh Jain

सीबीआई का बनास नदी में सर्वे का काम पूरा, न्यायालय में 2 को पेश करेगी रिपोर्ट

जहाजपुर से जुडे अजमेर व टोंक सीमा तक किया दोपहर तक सर्वे, टीम भीलवाड़ा लौटी

भीलवाड़ा जहाजपुर क्षेत्र में बनास नदी में ड्रोन व डंपी लेवल सर्वे जयपुर से आई सीबीआई टीम ने पूरा कर लिया। टीम शुक्रवार दोपहर नदी से जुड़े अजमेर व टोंक सीमा तक सर्वे का काम कर भीलवाड़ा लौट आई। यहां खनिज विभाग के अधिकारियों से चर्चा के बाद शनिवार को जयपुर लौटेगी। टीम चार दिन से बनास नदी में ड्रोन सर्वे कर रही थी।
बनास नदी से बजरी का अवैध दोहन व परिवहन होने के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय से मिले आदेश के बाद सीबीआई 22 जून को भीलवाड़ा आई थी। एक दिन की कार्रवाई के बाद टीम पुन: लौट गई थी। लेकिन पिछले चार दिनों से बनास नदी में अवैध खनन कहां-कहां हुआ इसका सर्वे किया। शुक्रवार को सीबीआई, खनिज विभाग व सर्वेयर की टीमों ने जहाजपुर बनास चौराहे से ड्रोन उड़ाया। साथ ही कई जगह पर से जमीन का लेवल करके डंपी लेवल सर्वे किया। टीम ने जालमपुरा, लक्ष्मीपुर, बिंदी, गणेशपुरा, रतनपुरा, मोतीपुरा, गांगीथला, धुंवाला व दूसरे छोर पर केशव विलास, जीरा हथोड़िया, बिहाड़ा आदि गांवों से होकर निकल रही बनास नदी का सर्वे किया।
नदी में लगे बजरी के ढेर

जहाजपुर बनास नदी के मध्य बजरी के जगह-जगह ढेर लगे हैं। इससे लगता है कि बजरी का अवैध परिवहन जारी है। नदी में चार से पांच मीटर तक गहरे व बडे-बड़े गड्ढे बने है। वाहनों के आने-जाने के लिए नदी में ही कई किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बना रखी है। यहीं से ट्रक, डम्पर व ट्रेलर बजरी भरकर जाते है।
यह है डंपी लेवल सर्वे

डंपी लेवल एक ऐसा उपकरण है जिसे बहुत सटीक क्षैतिज तल पर सेट किया जाता है। इसके माध्यम से सटीक ऊंचाई व लेवल का माप लिया जाता है। लेवल को समथल स्थान पर सेट किया जाता है ताकि उससे सटीक माप लिया जा सके। इस उपकरण में एक तिपाई पर लगा दूरबीन, एक स्पिरिट लेवल और कोणों को मापने का काम करता है। डंपी लेवल का इस्तमाल कई अलग-अलग प्रक्रियाओं में किया जाता है। इससे सटीक लेवल की ज़रूरत होती है। वे आम तौर पर निर्माण स्थलों, इंजीनियरिंग परियोजनाओं, पुरातात्विक खुदाई और अन्य जगहों पर किया जाता है।

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