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Child labor पढऩे की उम्र में कर रहे हाड़ तोड़ मेहनत

बाल श्रम तोड़ रहा बचपन, विभाग की कार्रवाई नाकाफी
जिले में दो साल में आए 70 बाल श्रमिक सामने

भीलवाड़ा

Published: November 29, 2021 09:01:31 pm

भीलवाड़ा।
पढऩे की उम्र में बच्चे हाड़ तोड़ मेहनत कर रहे है। इसके पीछे कई कारण भी सामने आए है। ये एेसा नासूर है जो बच्चों से बचपन ही छीन रहा है। किसी के कांधों पर परिवार पालने की मजबूरी है तो कोई माता-पिता के दबाव में बचपन खोकर हाड़ तोड़ मेहनत में लग गया है। एेसे बाल श्रम के दलदल में फंसकर रह गए हैं, जहां से निकलना इनके लिए आसान नहीं है। हालात ये है कि सरकार के निर्देश पर विभाग खानापूर्ति की तरह कार्रवाई करता है, लेकिन ये भी एेसी कार्रवाई है जिसका असर लम्बे समय तक नहीं रहता। कुछ बच्चे जरूर एक बार फिर शिक्षा द्वार की ओर बढ़ जाते हैं, लेकिन अधिकांश बच्चों की तकदीर नहीं बदलती।
प्रदेश में दिसम्बर, 2018 से जनवरी 2021, तक एक भी जिला एेसा नहीं है जहां बाल श्रमिक सामने नहीं आए हो। विभिन्न उद्योगों, फैक्ट्रियों, दुकानों, राजमार्गों पर बने ढाबों, घरों में चलने वाले लघु एवं कुटीर उद्योग व्यवसाय में नाबालिग बच्चों से बाल श्रम कराने के 1713 प्रकरण दर्ज हुए है। 4399 बाल श्रमिकों को मुक्त करवाया गया है।
केवल कागजी काम
राज्य सरकार की ओर से बाल श्रम की रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित कर विभिन्न विभागों की भूमिकां तय की गई है। इसे लेकर श्रम विभाग की ओर से राज्य के समस्त जिलों में कलक्टर की अध्यक्षता में जिला बाल श्रम टास्क फ ोर्स का गठन कराया जा चुका है। लेकिन इसकी नियमित बैठकें भी नहीं होती तो कई बार केवल खानापूर्ति से ही काम चलाया जाता है।
कारवाई का प्रावधान
बालश्रम संबंधी शिकायत मिलने पर संबंधित विभागों यथा बाल अधिकारिता, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, पुलिस, श्रम, व बाल कल्याण समिति सदस्य, चाइल्ड लाइन 1098 प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्था प्रतिनिधि संयुक्त दल द्वारा मौके पर जाकर बाल श्रमिक को मुक्त कराकर जिले की बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करते हंै। इन प्रकरणों में पुलिस की ओर से किशोर न्याय अधिनियम, 2015 व बाल एवं कुमार प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम,1986 के तहत वाद दायर किया जाता है। श्रम विभाग की ओर से प्रकरणों के संबंध में न्यूनतम वेतन एवं वेतन भुगतान संबंधी प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करते हैं। हालांकि कई बार बच्चे बाल श्रम के पाश से छुड़ाने के बाद कुछ समय में ही फिर से इसी काम मंे लग जाते है।
विभाग ने किए ये जतन
- विभाग ने बाल श्रम रोकने के कई जतन किए हैं, लेकिन ये नाकाफी है, इसमें विभाग की ओर से दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान अधिनियम के तहत जारी पंजीयन प्रमाण पत्र पर 'बाल श्रमिक रखना अपराध हैÓ संबंधी स्लोगन ऑनलाइन अंकित करवाए गए है। साथ ही समय-समय पर अभियान चलाए। इसमें ऑपरेशन खुशी, ऑपरेशन आशा शामिल है।
- विभाग की ओर से बालश्रम की रोकथाम के लिए सघन अभियान चलाया गया, इसमें माह जून से नवम्बर, 2020 तक 5629 संस्थानों का सर्वे निरीक्षण कर 5089 नियोक्ताओं से बाल श्रम नहीं करवाने के वचन पत्र भरवाए गए।
- विभाग की ओर से कोविड-19 महामारी के परिप्रेक्ष्य में बालश्रम के उद्देश्य से हो रही बाल तस्करी को रोकने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए राज्य के सभी जिला कलक्टर, महानिदेशक रेलवे सुरक्षा बल, नई दिल्ली एवं बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा राज्य के श्रम सचिवों को 1 जुलाई, 20 को पत्र जारी किया।
- 4 नवम्बर, 20 को सभी जिला कलक्टर को राज्य में बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए बाल श्रम से जुडे कानूनों की सख्ती से पालना के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
- प्रदेश में दिसम्बर, 2018 से जनवरी, 2021 तक 4399 बाल श्रमिकों को मुक्त करवाया गया। 1713 एफआर दर्ज करवाई गई।
- भीलवाड़ा जिले में किए गए सर्वे 32 प्रकरण बनाए गए है। जबकि 70 बाल श्रमिक सामने आए तथा 32 मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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