रीति-रिवाज ऐसे कि बाल विवाह बन गए मजबूरी

रीति-रिवाज ऐसे कि बाल विवाह बन गए मजबूरी

Mahesh Kumar Ojha | Publish: May, 18 2019 06:14:13 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 06:58:08 PM (IST) Bhilwara, Bhilwara, Rajasthan, India

-प्रदेश की सबसे बड़ी सामाजिक बुराई

भीलवाड़ा।

प्रदेश में बाल विवाह में अव्वल भीलवाड़ा में कुछ नातायत कौम ऐसी है जिनमें ही बाल विवाह ज्यादा है। ये लोग जानते हैं कि बाल विवाह अपराध है फिर भी एेसी मजबूरियां है कि इन्हें ऐसा करना ही पड़ता है। वर्ष 2006 में बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून में संशोधन हुआ। इसके बाद साल बाद प्रदेश में पहला मुकदमा भीलवाड़ा जिले में वर्ष 2016 में दर्ज हुआ। इस मामले में बाल कल्याण समिति ने परिजनों से पूछताछ की। इसमें भी परिजनों ने यही बताया था कि बाल विवाह करना सामाजिक मजबूरी है। राजस्थान पत्रिका ने प्रदेश की सबसे बड़ी सामाजिक बुराई के तह तक जाने की कोशिश की। इसमें यह जाना है कि आखिर यहां पर ही इतने बाल विवाह क्यों होते हैं। उन्हें पता है कि उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद होगा इसके बाद भी वे इस गैर कानूनी काम को क्यों करते हैं। इस पर पत्रिका ने विशेषज्ञों से भी बातचीत की।
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एक कुरीति ऐसी जो करती है बरबाद


मेवाड़ में कुछ समाज में कुंवारे लड़के साथ अपनी बालिका की शादी करना असामाजिक माना जाता है। मतलब जिस लड़कें का बाल विवाह नहीं हुआ हो उससे अपनी बच्ची की शादी नहीं कराई जाती है। चित्तौडग़ढ़ जिले में एक ४० वर्षीय युवक की आठ साल की लड़की से शादी कराना इसी का उदाहरण है। लड़कियों की कमी से भी नुकसान समाज में लड़कियों की कमी है। एेसे में यदि लड़के की शादी करनी है तो अपने घर से लड़की देनी पड़ती है। लड़की छोटी होती है तो भी घर में दुल्हन लाने के चक्कर में उसका बाल विवाह कर दिया जाता है। इसे आंटा-सांटा प्रथा करते हैं। लड़कियों की कमी के कारण यह प नाता प्रथा भी देती है बढ़ावा नाता प्रथा भी एक कारण है। कई बार मां स्वैच्छा से किसी अन्य परिवार में चली जाती है। एेसे में उन बच्चों का बाल विवाह कर जिम्मेदारियों से मुक्त होना मानते हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में एक से अधिक संतानें होती है। आर्थिक बोझ ज्यादा होने के कारण सभी बच्चों की शादियां एक साथ की जाती है। इससे भी बाल विवाह को बढ़ावा मिलता है।
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पत्रिका अपील थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से हम और आप किसी बच्चे का जीवन बरबाद होने से बचा सकते हैं। बाल विवाह मासूम जिंदगियों के भविष्य के साथ एक घिनौना खिलवाड़ है। अगर हम मिल कर प्रयास करें तो जल्दी ही इस कुप्रथा को खत्म कर पाने में सफल हो सकते हैं।


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एक्सपर्ट व्यू...


बाल विवाह का प्रमुख कारण है सामाजिक दबाव। कई बार परिवार के लोग या पड़ोसी ही ताना देते हैं। खानपान के कारण लड़कियां मां के बराबर हो जाती है तो उसकी शादी करने के लिए ताने सुनने को मिलते हैं। इस कारण से भी उनका विवाह कर दिया जाता है जबकि उम्र कम ही होती है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी है। बाल विवाह के नुकसान की जानकारी नहीं है। कई लोग कर्ज लेकर भी बाल विवाह करते हैं क्योंकि रीति-रिवाज ही ऐसे बने हुए हैं। हम लोग इनकी समझाइस करते हैं तो ये लोग जानते हैं कि बाल विवाह अपराध है। इसके बावजूद करना इनकी मजबूरी मानते हैं। समाज में नाता प्रथा, आंटा-सांटा, कुंवारे लड़कें की शादी नहीं होना एेसी कुरीतियां हमारे भीलवाड़ा में ज्यादा है। इस कारण यहां बाल विवाह होते हैं। इसमें परिजनों को ही अपने बच्चों के भविष्य को लेकर जागरुक रहना पड़ेगा।


डॉ. सुमन त्रिवेदी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति

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