पांच साल से बंद 111 मौसम यंत्र

वर्ष 2013-14 में लगाए थे
कृषि आयुक्त ने मांगी रिपोर्ट

By: Suresh Jain

Published: 01 Jul 2019, 12:12 PM IST

भीलवाड़ा।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत जिले में तीन बीमा कंपनियों के लगाए १११ मौसम आधारित उपकरण टावर (मौसम यंत्र) पांच साल से खराब पड़े हैं। कृषि आयुक्त ने अब हर जिले से एेसे उपकरणों की रिपोर्ट मांगी है। कृषि विभाग का दावा है कि जिले में सभी १११ टावर आज भी चल रहे हैं। हालांकि इसका अब फसल बीमा में इस्तेमाल नहीं हो रहा।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू है। बीमा कंपनी सरकार व किसानों से प्रीमियम ले कर खजाना भर रही है। रिस्क कवर के नाम पर कंपनी सरकार व किसानों से ठगी कर रही थी। बीमा कंपनी किसानों से ज्यादा सरकार से फायदा उठा रही है। सरकार पहले बीमा कंपनी को आधा प्रीमियम देती है और फिर फसल खराब होने पर अरबों रुपए किसानों को मुआवजे के रूप में देती है। फसल खराब होने पर बीमा कंपनी को किसानों को क्लेम देना होता है लेकिन कंपनी किसानों को कभी कभार अल्प मुआवजा देती है। सरकार अब इन केन्द्रों को नए सिरे से चालू करना चाह रही है।
दिखावा बने यंत्र
मौसम आधारित बीमा योजना में बीमा कंपनी ने १११ जगह स्वनियंत्रित मौसम यंत्र लगाए थे। इनकी रिपोर्ट से क्लेम तय होता था। जिले में ३८४ पंचायते हैं लेकिन ऑटोमैटिक मौसमयंत्र महज १११ हैं। बीमा कंपनी १५ से २० किलोमीटर की दूरी का मौसम एक ही यंत्र से रिकार्ड करती है, जो कभी सही नहीं होता है। कई बार एक किमी दायरे में भी बारिश या अकाल हो सकता है।
इनका होता है बीमा
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बैंकों से ऋण लेने वाले किसान का स्वत: फसल बीमा हो जाता है। प्रीमियम की आधी राशि किसान के खाते व आधी राशि सरकार देती है। यह फ सल के अनुसार कम ज्यादा हो सकती है। केसीसी के तहत ऋण लेने वाले किसानों को आमतौर पर बैंक वाले इस बारे में नहीं बताते। इसके कारण किसान कभी क्लेम भी नहीं करते। वैसे किसान चाहें तो अपनी मर्जी से भी फसल बीमा करा सकते हैं।
यहां लगे मौसम यंत्र
जिले में तीन कंपनियों की ओर से मौसम तंत्र लगे हैं। इनमें जहाजपुर ११, कोटड़ी १०, माण्डलगढ़ व आसीन्द ९-९, बदनोर ४, हुरड़ा, बनेड़ा ७-७, फूलियाकलां, भीलवाड़ा, बिजौलियां ५-५, शाहपुरा, सहाड़ा, माण्डल ८-८, करेड़ा, रायपुर ६-६, हमीरगढ़ ३ केन्द्र हैं।
मौका रिपोर्ट भेजी
मुख्यालय से मांगी रिपोर्ट के आधार पर जिले में संचालित १११ केन्द्रों की रिपोर्ट भेज दी गई है। इनमें से कुछ केन्द्र बन्द हैं। इनकी स्थापना वर्ष २०१३-१४ में की गई थी।
जीएल चावला, उपनिदेशक कृषि विस्तार

Suresh Jain Reporting
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