कोयले की कमी, दो थर्मल प्लांट बंद, दो पर संकट

प्रोसेस व डाई हाउस पर सीधा असर, कपड़ा प्रोसेस की दर 4 रुपए मीटर बढ़ाई
एक साल में कोयला 5600 रुपए प्रतिटन से बढ़कर 15 हजार टन पहुंचा, फिर भी नहीं मिल रहा

By: Suresh Jain

Published: 08 Oct 2021, 09:18 AM IST

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
चीन के बाद अब देश में कोयला संकट से वस्त्रनगरी के उद्योग प्रभावित होने लगे हैं। इण्डोनेशिया से आने वाला कोयले का दाम एक साल में 250 प्रतिशत बढऩे से भीलवाड़ा के दो थर्मल प्लांट बंद हो गए जबकि दो की हालत चिन्ताजनक है। प्रोसेस व डाई हाउस चलने मुश्किल हो गए। कपड़ा प्रोसेस की दर लगभग चार रुपए मीटर तक बढ़ाने के बाद भी हालात सुधरे नहीं है। नागौर माइंस में भी पानी भरा होने से कोयला पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है।
चीन में लगातार कोयला संकट के चलते कई विद्युत उत्पादन प्लांट बंद होने तथा कई उद्योग बन्द होने से इसका असर तेजी से देश पर पडऩे लगा है। स्थानीय कोयला भी पर्याप्त नहीं मिल रहा। कपड़ा प्रोसेस हाउस में पेटकॉक पर रोक तथा सीमेन्ट उद्योग में काम आने के बाद इनकी दरों में भारी उछाल आया। कोयले के साथ पेटकॉक 21600 रुपए प्रति टन हो गया। ऐसे में सीमेन्ट उद्योग पर भी असर पडऩे लगा है।
सरेरी व हमीरगढ़ प्लांट बन्द
भीलवाड़ा व बांसवाड़ा में कुल चार प्लांट हैं, जो कोयले से चलते हैं। काफी समय से कोयले की कमी व दामों में तेजी से से भीलवाड़ा के सरेरी व हमीरगढ़ स्थित दो औद्योगिक इकाईयों ने अपने प्लांट बंद कर स्क्रेप कर दिया। एक बीलिया में तथा बांसवाड़ा में एक बड़े औद्योगिक ईकाई में दो प्लांट में से एक बंद है तो दूसरा क्षमता से ५० प्रतिशत उत्पादन पर चल रहे हैं।
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करोड़ों को पड़ा अतिरिक्त भार
शहर में 18 प्रोसेसिंग इकाइयों में रोजाना 1800 टन कोयला लगता है। 12 माह पहले एक टन कोयले की कीमत 5600 रुपए थी जबकि 4 माह पूर्व कीमत बढ़कर 8700 रुपए टन हो गई। वर्तमान में 15 हजार रुपए टन पहुंच गई है। अन्य खर्च अलग है। इससे प्रोसेसिंग मालिक परेशान है। एक साल में करीब 10 हजार रुपए प्रति टन अतिरिक्त भार पडऩे लगा। इन इकाइयों में एक माह में 54 हजार टन कोयले की खपत है। एक माह में उद्योगों पर लगभग 54 करोड़ रुपए का भार बढ़ गया।
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उद्यमी क्या करें
एक प्रोसेस हाउस संचालक ने कहा कि पहले ऑयल आधारित प्लांट थे। ऑयल की दरें बढऩे से इन प्लांट को चलाना मुश्किल हो गया। उसे बंद कर कोयला आधारित किया। अब कोयला संकट व दरें बढऩे से दो थर्मल प्लांट बंद हो गए। उद्यमी सोलर प्लांट लगाना चाहते है तो सरकार उस पर भी दरें बढ़ा रही है। सरकार में पूर्व में लागू नेट मिटरिंंग व्यवस्था बंद कर दी गई। सोलर बिजली पहले सरकार को सस्ती दर पर बेचनी पड़ती तो बाद में महंगी दर से खरीदनी पड़ रही है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले का संकट है। इस कारण इनके दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। भीलवाड़ा के दो थर्मल प्लांट बंद हो चुके है। यहीं हालात रहे तो अन्य प्लांट भी बंद हो जाएंगे।
अशोक बाहेती, कोयला व्यापारी
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सभी उद्योगों पर पड़ा असर
अन्तराष्ट्रीय स्तर पर कोयला संकट आने से सभी उद्योगों पर असर पड़ा है। बांसवाड़ा में दो थर्मल प्लांट हैं। उसमें एक आधा चल रहा है। कोयला नहीं मिल रहा है। मिल रहा है तो उसके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
एनके बहेडिय़ा, सीओओ आरएसडब्ल्यूएम

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