पंचायती राज कर्मचारियों के हितों के साथ हो रहा कुठाराधात

मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

By: Suresh Jain

Published: 18 Jun 2021, 09:38 AM IST

भीलवाड़ा।
पंचायती राज संस्थाओं में पदस्थापित मंत्रालयिक संवर्ग के 12 हजार 500 के कार्मिकों के हितों के विरूद्ध ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज विभाग तथा वित्त विभाग पक्षपातपूर्ण नीति अपना रहा है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम जिला परिषद के सीईओ को ज्ञापन दिया है।
जिलाध्यक्ष गोपालस्वरूप वैष्णव ने बताया कि गृह जिले में स्थानान्तरण के नियमों को संशोधित किया जाए। या पॉलिसी तय कर इच्छुक कार्मिकों का अन्तरजिला स्थानान्तरण किया जाए। वित्त विभाग की ओर से निर्धारित नॉर्मस २४ अप्रेल २०१७ के अनुसार अन्य 122 विभागों की तर्ज पर पंचायती राज संस्थाओं के मंत्रालयिक संवर्ग का कैडर स्ट्रेन्थ रिव्यू किया जाए। मनरेगा से प्रतिनियुक्ति समाप्त करने अथवा मद 2515 से वेतन भुगतान तथा प्रतिनियुक्ति अवधि के भत्ते का भुगतान किया जाए। कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 के शेष पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तत्काल प्रारम्भ की जाए। ग्राम पंचायतों में पदस्थापित कनिष्ठ लिपिकों की पंचायत के लेखों में भागीदारी सुनिश्चित करें। राजस्व विभाग व अन्य विभागों की तर्ज पर पंचायती राज संस्थाओं में मंत्रालयिक संवर्ग से राजस्थान ग्रामीण विकास सेवा के 25 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति के लिए पदों का कोटा फिक्स किया जाए। कनिष्ठ लिपिकों को एक से अधिक पंचायतों का चार्ज नही दिया जाए।
महामंत्री शोभालाल तेली ने बताया कि पंचायती राज विभाग का सबसे बडा कैडर, अन्याय व अनदेखी के चलते आंदोलन के लिए विवश होना पड़ रहा है। १5 दिवस में मंत्रालयिक कर्मचारियों के हकों पर कोई निर्णय नहीं होने पर विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों द्वारा मनरेगा योजना एवं अन्य विभागीय कार्यों के बहिष्कार सहित चरणबद्ध आंदोलन प्रारम्भ किया जाएगा।

Suresh Jain Reporting
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